फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore news: Thousands join Nandishwar Kawad Yatra for Mahakal Jalabhishek with Narmada water

Indore News: महाकाल भक्तों का जनसैलाब, नंदीश्वर कावड़ यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सागर

Sat, 26 Jul 2025 03:10 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Sat, 26 Jul 2025 03:10 PM IST
सार

Indore News: श्रावण मास के तीसरे सोमवार के अवसर पर ओंकारेश्वर से नर्मदा जल लाकर महाकाल के जलाभिषेक हेतु निकली नंदीश्वर कांवड़ यात्रा इंदौर में भव्य रूप से आयोजित की गई।

विज्ञापन
Indore news: Thousands join Nandishwar Kawad Yatra for Mahakal Jalabhishek with Narmada water
कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

श्रावण मास में महादेव के जलाभिषेक के लिए इंदौर में भव्य नंदीश्वर कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा नगर भ्रमण पर निकली, जिसमें हजारों की संख्या में बाबा महाकाल के भक्तों ने भाग लिया। यात्रा का यह चौथा वर्ष है और यह 21 जुलाई को ओंकारेश्वर से मां नर्मदा का जल लेकर प्रारंभ हुई थी। इंदौर पहुंचने के बाद रात्रि विश्राम के पश्चात शुक्रवार सुबह यह यात्रा जूनी इंदौर, कलेक्टरेट से राजबाड़ा होते हुए मां अहिल्या को नमन कर उज्जैन के लिए रवाना हुई, जहां श्रावण मास के तीसरे सोमवार को बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया जाएगा।
विज्ञापन


यात्रा में झांकियां, घोड़े-ऊंट और भगवा परिधान
पूरे यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए और कावड़ियों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई। इस धार्मिक यात्रा को भव्य रूप देने के लिए घोड़े, ऊंट, ढोल-ताशों तथा आकर्षक झांकियों को भी शामिल किया गया। यात्रा में सम्मिलित कावड़िये भगवा रंग की पौशाक में नजर आए। आयोजन में शामिल सभी कावड़ियों के लिए भोजन, वस्त्र, कावड़ और ठहरने की संपूर्ण व्यवस्था भाजपा युवा मोर्चा के प्रभारी धनंजय अनीत जैन द्वारा की गई।
विज्ञापन


शिव जलाभिषेक की पौराणिक परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव का जलाभिषेक सर्वप्रथम समुद्र मंथन के समय देवताओं द्वारा किया गया था। हलाहल विष पीने के बाद उनके दुष्प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने गंगाजल शिवजी पर अर्पित किया था। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि शिवलिंग पर शीतल जल, विशेष रूप से गंगा या नर्मदा का जल, चढ़ाया जाता है। इससे भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


भगवान परशुराम और कांवड़ यात्रा की प्राचीनता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने त्रेता युग में उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लेकर 'पुरा महादेव' (बागपत) में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। इसी आधार पर आज भी पूरे देश में शिवभक्त कांवड़ यात्रा करते हैं। कई विद्वान भगवान परशुराम को दुनिया का पहला कांवड़ यात्री मानते हैं। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए धनंजय अनीत जैन ने बताया कि नर्मदा जल से बाबा महाकाल का जलाभिषेक इस वर्ष 28 जुलाई को होगा और सभी भक्तों की श्रद्धा व सेवा से यह यात्रा हर वर्ष अधिक भव्य होती जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed