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Indore News: नगर निगम की रिमूवल गैंग को सेना जैसी वर्दी के मामले ने पकड़ा तूल, विरोध के बाद महापौर बैकफुट पर

Fri, 17 May 2024 05:28 PM IST
Arvind Tiwari अरविंद तिवारी
Updated Fri, 17 May 2024 05:28 PM IST
सार

Indore News In Hindi: इंदौर नगर निगम की अतिक्रमण हटाने वाली टीम को सेना जैसी वर्दी पहनाने के मसले ने तूल पकड़ लिया है। विरोध के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी बैकफुट पर हैं। पहले तो उन्होंने भी इस पर सहमति दी थी, अब वर्दी हटाने की बात कह रहे हैं।

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Indore News: The issue of army-like uniforms to Municipal Corporation's removal gang caught fire
इंदौर नगर निगम की रिमूवल गैंग को सेना जैसी वर्दी पहनाई गई है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर नगर निगम की रिमूवल गेंग को सेना जैसी वर्दी पहनाने के निगम आयुक्त शिवम वर्मा के फैसले का तगड़ा विरोध होने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव को बैकफुट पर आना पड़ा है। उन्होंने वर्दी में सुधार की बात कहते हुए एक तरह से आयुक्त के नए आदेश को वापस लेने की घोषणा कर दी है।  

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निगम आयुक्त रहते हुए ग्वालियर में रिमूवल गेंग को इसी तरह की वर्दी पहनवा चुके वर्मा का फैसला दो महीने बाद ही सेना की आपत्ति के चलते बदलना पड़ा था। तब सेना के उच्च अधिकारियों ने ग्वालियर के तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को पत्र लिखकर वर्दी पर आपत्ति जताई थी। इंदौर में तो दो दिन बाद ही वर्दी वापस लेने की स्थिति बन गई। ऐसी 600 वर्दी तैयार करवाई गई थी जो अब किसी काम की नहीं है। महापौर ने निगम के अमले में एकरूपता और अनुशासन की बात कहते हुए नई वर्दी में संशोधन की बात कही है। सीधे तौर पर इसका यही अर्थ निकलता है कि वर्दी वापस ले ली गई है। 
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चुने हुए जनप्रतिनिधि भी नाराज
आयुक्त के फैसले पर नगर निगम के चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने भी आपत्ति ली है। महापौर परिषद के वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक अभी आचार संहिता लगी हुई है इसलिए अफसर जमकर मनमानी कर रहे हैं। निगम आयुक्त ने रिमूवल गेंग की नई ड्रेस के संबंध में  मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) तक को विश्वास में नहीं लिया। इस फैसले को लागू करने में उन्हें ऐसी क्या जल्दी थी, यह समझ से परे है। महापौर परिषद के ही एक अन्य सदस्य का कहना है कि अफसर फैसला ले लेते हैं और जब जनता के बीच आलोचना होती है तो किरकिरी हमारी होती है। इस मामले में कम से कम महापौर को तो भरोसे में ले लेते। फैसला सही नहीं था, इसीलिए दो दिन में ही इसे वापस लेना पड़ा।
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कानूनन भी ऐसा नहीं कर सकते 
सेना जैसी वर्दी का उपयोग कानूनन की अपराध की श्रेणी में आता है। इंडियन पीनल कोड की धारा 140 के तहत सेना जैसी वर्दी का उपयोग अपराध की श्रेणी में आता है। इसके लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान है। इस तरह की वर्दी पहनना पूरी तरह अपराध है ही, वर्दी में उपयोग होने वाला कपड़ा बेचना भी प्रतिबंधित है।

कांग्रेस को बेवजह मुद्दा मिल गया 
आयुक्त के इस निर्णय के कारण कांग्रेस को बैठे-बिठाए विरोध का एक मुद्दा मिल गया। उसने इस मुद्दे पर राजवाड़ा पर आंदोलन की घोषणा भी कर दी थी। इंदौर नगर निगम में  नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे का कहना था कि आखिर यह फैसला बिना जनप्रतिनिधियों की जानकारी के लिया कैसे गया, यह बड़ा मुद्दा है। 

सेना से जुड़े लोगों की भी आपत्ति थी 
भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले और अब इंदौर में रह रहे कई पूर्व सैन्य अफसरों ने भी निगम आयुक्त के फैसले पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि यह ठीक नहीं है। उनका कहना था कि पठानकोट हमले के बाद तो सेना की ओर से इस मामले में बहुत कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन लोगों ने महू में पदस्थ सेना के आला अफसरों के माध्यम से इस मामले में विरोध दर्ज करने की तैयारी भी कर ली थी।


कानून के जानकार महापौर के रहते ऐसा कैसे हो गया?
शहर से जुड़े मुद्दों पर हमेशा संवेदनशील रहने वाले लोगों का कहना है कि कानून के जानकारी महापौर के रहते हुए आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्या आयुक्त ने उन्हें जानकारी दिए बिना यह फैसला ले लिया था। इस तरह के मनमाने फैसलों पर महापौर को सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए।

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