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Indore News: नेता अधिकारी सो रहे, जनता मर रही... हादसों में मौत का असली जिम्मेदार कौन?
Tue, 16 Sep 2025 09:50 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 16 Sep 2025 09:50 PM IST
सार
Indore News: हाल ही में एयरपोर्ट रोड पर हुए एक ट्रक हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन हादसों के पीछे कई कारण हैं...
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कुछ नहीं बदला... सीएम के आने के पहले पुलिसकर्मियों के सामने ही भीड़ में से ट्रक गुजरते रहे।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
केंद्र सरकार की रिपोर्ट में इंदौर देश में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में दूसरे नंबर पर आ चुका है। दिल्ली के बाद सबसे अधिक हादसों वाला शहर अब लगातार बड़े और भयावह हादसों की तरफ बढ़ता जा रहा है। सोमवार को एयरपोर्ट रोड पर हुए ट्रक हादसे में तीन लोगों की जान चली गई और 12 लोग घायल हैं। लगातार हो रहे हादसे यह बताते हैं कि जिम्मदार गहरी नींद में हैं और जनता को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है। कई कारण हैं जिन पर लगातार संस्थाओं और प्रबुद्धजनों ने चिंता जताई है। हालांकि राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता के चलते इनमें सुधार की गुंजाइश कम ही नजर आती है। आइए नजर डालते हैं उन प्रमुख बिंदुओं पर जिनकी वजह से हादसों में लगातार इजाफा होता जा रहा है।
यह भी पढ़ें...Indore Truck Accident: नो एंट्री में कैसे घुसा ट्रक? इंदौर हादसे को लेकर हाईकोर्ट सख्त; अब कमिश्नर देंगे सफाई
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नशे का गढ़ बन रहा इंदौर
सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल जोशी बताते हैं कि इंदौर आने वाले ट्रकों को खंडवा रोड, उज्जैन रोड या देवास रोड पर इंदौर के आने के पहले ही शराब की कई दुकानें मिलती हैं। रास्ते में अधिकतर ट्रक ड्राइवर लगातार ड्राइविंग करते हैं और शहर के ठीक पहले आने वाले ढाबों और शराब दुकानों पर रुकते हैं। यहां पर नशा, भोजन और आराम के बाद यह सीधे शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाकों में आते हैं और इस वजह से इस तरह के हादसे हो जाते हैं।
बैरिकेटिंग की कमी
आर्किटेक्ट अतुल सेठ ने कहा कि शहर के नाकों पर और शहर के अंदर होने वाली चेकिंग में पुलिसकर्मी बिना बैरिकेटिंग के चेकिंग करते हैं। पुलिस को देखकर गाड़ी वाले स्पीड बढ़ा लेते हैं और कई बार इस तरह के हादसे हो जाते हैं। इसी सप्ताह अन्नपूर्णा क्षेत्र में एक कार चालक पुलिसकर्मियों से बचने के चक्कर में कई गाड़ियों से टकरा गया था। यदि बैरिकेटिंग करके चेकिंग करेंगे तो गाड़ी भगाने की जगह ही नहीं मिल पाएगी और नशे में गाड़ी चला रहे चालकों को पकड़ने में आसानी होगी।
रात 11 वाला नियम कहीं नहीं दिखता
सामाजिक कार्यकर्ता अभय बाथम ने बताया कि शहर में नियम है कि भारी वाहन रात 11 बजे से सुबह 6 बजे के बीच में ही अंदर आ सकते हैं। इस नियम का कभी भी कहीं भी पालन नहीं किया जाता। दिनभर ट्रैफिक जाम और हादसों को नियंत्रित करने के लिए यह नियम बनाया गया था लेकिन पुलिसकर्मी सभी जगह भारी वाहन चालकों से कुछ पैसे लेकर उन्हें किसी भी सड़क पर जाने की अनुमति दे देते हैं।
रिश्वतखोरी ने नशेड़ियों को दिया रास्ता
एनजीओ संचालक अंकुर लोकरे बताते हैं कि शहर में हर जगह रिश्वतखोरी के उदाहरण खुलेआम देखने को मिल रहे हैं। अवैध पार्किंग से गाड़ियां उठाने वाली टीमें हों या फिर सड़क पर तैनात पुलिसकर्मी। 200 से 500 रुपए की रिश्वत के बाद बिना रोक टोक के नशेड़ी आसानी से अपने वाहन लेकर कहीं भी चले जाते हैं। शनिवार और रविवार को होने वाली पुलिस की स्पेशल चेकिंग में हर सप्ताह 500 से अधिक वाहन चालक नशे में गाड़ियां चलाते हुए मिलते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में होने वाली इस विशेष चेकिंग में नशेड़ियों को सीधे जेल भेज दिया जाता है या फिर उनकी गाड़ियां जप्त कर ली जाती हैं। यदि इसी तरह की चेकिंग रोज हो तो नशे में वाहन चलाना शहर में किसी के लिए संभव न हो।
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नशे का गढ़ बन रहा इंदौर
सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल जोशी बताते हैं कि इंदौर आने वाले ट्रकों को खंडवा रोड, उज्जैन रोड या देवास रोड पर इंदौर के आने के पहले ही शराब की कई दुकानें मिलती हैं। रास्ते में अधिकतर ट्रक ड्राइवर लगातार ड्राइविंग करते हैं और शहर के ठीक पहले आने वाले ढाबों और शराब दुकानों पर रुकते हैं। यहां पर नशा, भोजन और आराम के बाद यह सीधे शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाकों में आते हैं और इस वजह से इस तरह के हादसे हो जाते हैं।
बैरिकेटिंग की कमी
आर्किटेक्ट अतुल सेठ ने कहा कि शहर के नाकों पर और शहर के अंदर होने वाली चेकिंग में पुलिसकर्मी बिना बैरिकेटिंग के चेकिंग करते हैं। पुलिस को देखकर गाड़ी वाले स्पीड बढ़ा लेते हैं और कई बार इस तरह के हादसे हो जाते हैं। इसी सप्ताह अन्नपूर्णा क्षेत्र में एक कार चालक पुलिसकर्मियों से बचने के चक्कर में कई गाड़ियों से टकरा गया था। यदि बैरिकेटिंग करके चेकिंग करेंगे तो गाड़ी भगाने की जगह ही नहीं मिल पाएगी और नशे में गाड़ी चला रहे चालकों को पकड़ने में आसानी होगी।
रात 11 वाला नियम कहीं नहीं दिखता
सामाजिक कार्यकर्ता अभय बाथम ने बताया कि शहर में नियम है कि भारी वाहन रात 11 बजे से सुबह 6 बजे के बीच में ही अंदर आ सकते हैं। इस नियम का कभी भी कहीं भी पालन नहीं किया जाता। दिनभर ट्रैफिक जाम और हादसों को नियंत्रित करने के लिए यह नियम बनाया गया था लेकिन पुलिसकर्मी सभी जगह भारी वाहन चालकों से कुछ पैसे लेकर उन्हें किसी भी सड़क पर जाने की अनुमति दे देते हैं।
रिश्वतखोरी ने नशेड़ियों को दिया रास्ता
एनजीओ संचालक अंकुर लोकरे बताते हैं कि शहर में हर जगह रिश्वतखोरी के उदाहरण खुलेआम देखने को मिल रहे हैं। अवैध पार्किंग से गाड़ियां उठाने वाली टीमें हों या फिर सड़क पर तैनात पुलिसकर्मी। 200 से 500 रुपए की रिश्वत के बाद बिना रोक टोक के नशेड़ी आसानी से अपने वाहन लेकर कहीं भी चले जाते हैं। शनिवार और रविवार को होने वाली पुलिस की स्पेशल चेकिंग में हर सप्ताह 500 से अधिक वाहन चालक नशे में गाड़ियां चलाते हुए मिलते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में होने वाली इस विशेष चेकिंग में नशेड़ियों को सीधे जेल भेज दिया जाता है या फिर उनकी गाड़ियां जप्त कर ली जाती हैं। यदि इसी तरह की चेकिंग रोज हो तो नशे में वाहन चलाना शहर में किसी के लिए संभव न हो।
