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इंदौर: दूषित पानी से मौतों का मामला, अफसरों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की याचिका

Fri, 09 Jan 2026 08:50 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Fri, 09 Jan 2026 08:50 PM IST
सार

Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में स्थानीय निवासी रामू सिंह ने कोर्ट में याचिका दायर कर जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग की है।

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Indore News Petition filed against officials for culpable homicide over contaminated water deaths in Bhagirath
साथी वकील के साथ याचिका की जानकारी देते वकील दिलीप नागर। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले ने अब कानूनी तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने हेतु कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। भागीरथपुरा निवासी रामू सिंह द्वारा लगाई गई इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं।
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दो साल से गंदा पानी पीने को मजबूर थे लोग
याचिकाकर्ता के वकील दिलीप नागर के अनुसार, भागीरथपुरा के निवासी पिछले दो वर्षों से दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब साल 2024 में दूषित पानी के सेवन से एक युवती की जान चली गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में नर्मदा पाइप लाइन बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटशीट जारी की गई थी।
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टेंडर प्रक्रिया में देरी और अधिकारियों पर आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पाइप लाइन के लिए टेंडर प्रक्रिया तो शुरू हुई थी, लेकिन तत्कालीन निगमायुक्त और वर्तमान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कथित तौर पर टेंडर को आगे नहीं बढ़ने दिया। उनके बाद आए निगमायुक्त दिलीप यादव पर भी टेंडर पास न करने के आरोप लगाए गए हैं। लंबे समय तक टेंडर अटके रहने के कारण लोग बीमार होते रहे और मौतें हुईं। अंततः भारी दबाव के बाद 30 दिसंबर को यह टेंडर पास किया गया।

कोर्ट ने पुलिस से मांगी जांच रिपोर्ट
कोर्ट में दायर याचिका के माध्यम से मांग की गई है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ धारा 106 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया जाए। साथ ही यह भी अपील की गई है कि निष्पक्ष जांच होने तक इन अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जाए। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बाणगंगा थाना प्रभारी को 24 जनवरी तक पूरी जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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