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Indore News: 56 दुकान पर युवाओं ने दिखाई डेयरी उद्योग की हकीकत, दूध का सच जानकर दर्शकों की आंखों में आ गए आंसू
Mon, 24 Aug 2026 03:37 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 24 Aug 2026 03:37 PM IST
सार
Indore News: 15 कलाकारों की 10 मिनट की प्रस्तुति ने डेयरी उद्योग की जमीनी हकीकत, बेसहारा पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और पशु क्रूरता पर प्रकाश डाला।
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56 दुकान पर 15 युवाओं ने दी नाट्य प्रस्तुति।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के मशहूर 56 दुकान क्षेत्र में युवा कार्यकर्ताओं द्वारा एक विचारोत्तेजक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। यह आयोजन देश के 10 प्रमुख शहरों में चलाए जा रहे एक व्यापक जन जागरूकता अभियान का हिस्सा था। हर सफेद दिखने वाली चीज सफेद तो होती है, पर उसके पीछे छुपा है कोई अनसुना सच, इसी मुख्य विचार को केंद्र में रखते हुए एक अनोखे गेम शो के अंदाज में यह प्रस्तुति दी गई। इस नाटक ने वहां मौजूद बड़ी संख्या में दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया।
इंदौर एनिमल लिबरेशन और वन जस्ट वर्ल्ड संस्थाओं के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 15 कलाकारों ने हिस्सा लिया। डोंट बिलीव द डेयरी टेल यानी दूध का सच शीर्षक से तैयार की गई लगभग 10 मिनट की इस नाट्य प्रस्तुति ने डेयरी उद्योग से जुड़ी आम सामाजिक धारणाओं को खुली चुनौती दी। नाटक के जरिए गायों और भैंसों के साथ होने वाले क्रूर व्यवहार को उजागर किया गया, जिसे देखकर उपस्थित नागरिकों ने करुणा का मार्ग चुनने का संकल्प व्यक्त किया।
सोशल मीडिया वीडियो से मिली अभियान को प्रेरणा
यह पूरा नाटक प्रसिद्ध टीवी शो होस्ट अमिताभ बच्चन और प्रतियोगी सिद्धार्थ शर्मा के बीच हुई एक चर्चित बातचीत से प्रेरित था। सोशल मीडिया पर करोड़ों बार देखे गए उस वायरल वीडियो ने भारतीय डेयरी क्षेत्र की वास्तविक सच्चाइयों पर देश भर में बहस छेड़ दी थी। उस बातचीत में दूध पर बछड़े के प्राकृतिक अधिकार और डेयरी प्रथाओं पर उठाए गए सवालों ने लाखों लोगों को इस विषय पर नए सिरे से सोचने के लिए प्रेरित किया।
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देश के 10 प्रमुख शहरों में हो रहा है मंचन
युवाओं के नेतृत्व में जारी यह अभियान देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रहा है। 23 अगस्त 2026 को इंदौर के साथ-साथ चंडीगढ़, अहमदाबाद, हैदराबाद और नागपुर में इसका सफल मंचन किया गया। आने वाले दिनों में 30 अगस्त 2026 को मुंबई, पुणे, कोलकाता और हिसार में तथा 13 सितंबर 2026 को फरीदाबाद में यह नाटक प्रस्तुत किया जाएगा। इस माध्यम से युवा कलाकार डेयरी उद्योग की जमीनी हकीकत की ओर आम जनता का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरण पर पड़ता प्रभाव
कार्यक्रम के आयोजकों दुर्गा बलानी, सुरेश व्यास और अजय ने बताया कि वायरल वीडियो पर जनता की प्रतिक्रिया दर्शाती है कि देश का युवा अब पुरानी मान्यताओं पर सवाल उठा रहा है। आयोजकों के अनुसार डेयरी क्षेत्र की चिंताएं केवल पशु कल्याण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा संबंध पर्यावरण और सड़क सुरक्षा से भी है। दूध देना बंद कर चुके पशुओं को सड़कों पर छोड़ दिए जाने से शहरों में बेसहारा पशुओं और तेज रफ्तार वाहनों के बीच टकराने से कई जानलेवा हादसे हो रहे हैं।
पारदर्शिता और विकल्प अपनाने का आह्वान
संस्था की फाउंडर दुर्गा बलानी ने स्पष्ट किया कि नाटक का उद्देश्य युवाओं से सहज भाषा में संवाद स्थापित करना है ताकि उन विषयों पर बात हो सके जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती। यह अभियान नीति निर्माताओं, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से ऐसी खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने की अपील करता है जो पशुओं, इंसानों और प्रकृति तीनों के लिए हितकारी हों। साथ ही, कृषि पशुओं और पर्यावरण के संरक्षण के लिए पौध आधारित विकल्पों को दैनिक जीवन में शामिल करने पर जोर दिया गया है।
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इंदौर एनिमल लिबरेशन और वन जस्ट वर्ल्ड संस्थाओं के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 15 कलाकारों ने हिस्सा लिया। डोंट बिलीव द डेयरी टेल यानी दूध का सच शीर्षक से तैयार की गई लगभग 10 मिनट की इस नाट्य प्रस्तुति ने डेयरी उद्योग से जुड़ी आम सामाजिक धारणाओं को खुली चुनौती दी। नाटक के जरिए गायों और भैंसों के साथ होने वाले क्रूर व्यवहार को उजागर किया गया, जिसे देखकर उपस्थित नागरिकों ने करुणा का मार्ग चुनने का संकल्प व्यक्त किया।
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सोशल मीडिया वीडियो से मिली अभियान को प्रेरणा
यह पूरा नाटक प्रसिद्ध टीवी शो होस्ट अमिताभ बच्चन और प्रतियोगी सिद्धार्थ शर्मा के बीच हुई एक चर्चित बातचीत से प्रेरित था। सोशल मीडिया पर करोड़ों बार देखे गए उस वायरल वीडियो ने भारतीय डेयरी क्षेत्र की वास्तविक सच्चाइयों पर देश भर में बहस छेड़ दी थी। उस बातचीत में दूध पर बछड़े के प्राकृतिक अधिकार और डेयरी प्रथाओं पर उठाए गए सवालों ने लाखों लोगों को इस विषय पर नए सिरे से सोचने के लिए प्रेरित किया।
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देश के 10 प्रमुख शहरों में हो रहा है मंचन
युवाओं के नेतृत्व में जारी यह अभियान देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रहा है। 23 अगस्त 2026 को इंदौर के साथ-साथ चंडीगढ़, अहमदाबाद, हैदराबाद और नागपुर में इसका सफल मंचन किया गया। आने वाले दिनों में 30 अगस्त 2026 को मुंबई, पुणे, कोलकाता और हिसार में तथा 13 सितंबर 2026 को फरीदाबाद में यह नाटक प्रस्तुत किया जाएगा। इस माध्यम से युवा कलाकार डेयरी उद्योग की जमीनी हकीकत की ओर आम जनता का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरण पर पड़ता प्रभाव
कार्यक्रम के आयोजकों दुर्गा बलानी, सुरेश व्यास और अजय ने बताया कि वायरल वीडियो पर जनता की प्रतिक्रिया दर्शाती है कि देश का युवा अब पुरानी मान्यताओं पर सवाल उठा रहा है। आयोजकों के अनुसार डेयरी क्षेत्र की चिंताएं केवल पशु कल्याण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा संबंध पर्यावरण और सड़क सुरक्षा से भी है। दूध देना बंद कर चुके पशुओं को सड़कों पर छोड़ दिए जाने से शहरों में बेसहारा पशुओं और तेज रफ्तार वाहनों के बीच टकराने से कई जानलेवा हादसे हो रहे हैं।
पारदर्शिता और विकल्प अपनाने का आह्वान
संस्था की फाउंडर दुर्गा बलानी ने स्पष्ट किया कि नाटक का उद्देश्य युवाओं से सहज भाषा में संवाद स्थापित करना है ताकि उन विषयों पर बात हो सके जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती। यह अभियान नीति निर्माताओं, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से ऐसी खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने की अपील करता है जो पशुओं, इंसानों और प्रकृति तीनों के लिए हितकारी हों। साथ ही, कृषि पशुओं और पर्यावरण के संरक्षण के लिए पौध आधारित विकल्पों को दैनिक जीवन में शामिल करने पर जोर दिया गया है।
