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Indore News: इंदौर की जेल देखकर हो जाएंगे दंग, खानपान से लेकर कैदियों के स्वास्थ्य पर भी होगा ध्यान
Tue, 06 May 2025 07:39 AM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 06 May 2025 07:39 AM IST
सार
Indore News: इंदौर के सांवेर रोड पर 217 करोड़ की लागत से नई सेंट्रल जेल का निर्माण तेजी से हो रहा है, जिसमें 4,000 से अधिक कैदियों के लिए जगह और 60 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल शामिल होगा।
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विस्तार
सांवेर रोड स्थित नई सेंट्रल जेल का निर्माण बीते कई वर्षों से अधूरा पड़ा था, जिसे पूरा करने के लिए शासन ने 217 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की। लोक निर्माण विभाग ने टेंडर जारी कर इस परियोजना का कार्य बीसीसी रियल इन्फ्रा कंपनी को सौंपा। इसके तहत अब दूसरे चरण का निर्माण कार्य चल रहा है। इस नई जेल में 4,000 से अधिक कैदियों के लिए व्यवस्था होगी और यहां 60 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक अस्पताल भी बनेगा, जिसमें कैदियों को आपातकालीन एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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130 साल पुराने कानूनों में बदलाव की तैयारी, नया जेल अधिनियम रास्ते में
130 साल पुराने अंग्रेजों के बनाए जेल कानूनों में अब संशोधन की तैयारी की जा रही है। मोहन सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा रही है और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक नया जेल अधिनियम तैयार किया जा रहा है। यह अधिनियम कैबिनेट की मंजूरी के बाद नोटिफाई किया जाएगा। हालांकि पूर्व में जारी नोटिफिकेशन पर अमल नहीं हो पाया है। इंदौर की वर्तमान सेंट्रल जेल शहर के मध्य और घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है, जिससे इसकी शिफ्टिंग की योजना बनी और सांवेर रोड पर 50 एकड़ में नई जेल का निर्माण प्रारंभ हुआ।
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नई जेल में थर्ड जेंडर बैरक, सुधारात्मक गृह की अवधारणा
पहले हाउसिंग बोर्ड को यह परियोजना सौंपी गई थी, लेकिन बाद में यह निजी कंपनी को दे दी गई। विवादों के बाद अब शेष कार्य लोक निर्माण विभाग से करवाया जा रहा है। हाल ही में 168 करोड़ रुपए का टेंडर शेष निर्माण कार्यों के लिए पास हुआ। दूसरे चरण के अंतर्गत प्रशासनिक ब्लॉक, क्वार्टर और अन्य बैरकों का निर्माण हो रहा है। 4,000 से अधिक कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में थर्ड जेंडर के लिए भी अलग बैरक बनाई जा रही है। नया जेल अधिनियम, जो 1 जनवरी से लागू होना था, अब सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार संशोधित हो रहा है। इसी के अंतर्गत जेल विभाग का नाम ‘बंदी गृह एवं सुधारात्मक विभाग’ और जेल को 'सुधारात्मक गृह' के रूप में जाना जाएगा।
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सुधारात्मक बदलावों के साथ हाईटेक जेलें, वीडियो कोर्ट की सुविधा भी
कैदियों को खुली जेल व्यवस्था, चिकित्सा, भोजन, नाश्ता, चाय, पानी जैसी सुविधाओं में सुधार होगा। महिला कैदियों को शैम्पू, हेयर रिमूव्हल क्रीम जैसी जरूरतें भी मुहैया कराई जाएंगी। शासन ने प्रिजन एक्ट 1884 में बदलाव करते हुए कैदियों के लिए पौष्टिक आहार जैसे दूध, सलाद, चायपत्ती, तेल आदि की मात्रा बढ़ा दी है। नई जेलों में न्यायाधीशों के लिए चैम्बर भी बनाए जा रहे हैं, ताकि विशेष परिस्थितियों में जेल में ही सुनवाई हो सके। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई की प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है। 13 अगस्त को ‘मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदी गृह अधिनियम 2024’ नाम से नोटिफिकेशन जारी हुआ, जिसे गांधी जयंती से लागू किया जाना था, पर अधिनियम की अंग्रेजी प्रति न बनने और अन्य त्रुटियों के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जरूरी संशोधन किए जा रहे हैं और इसके बाद नया जेल अधिनियम प्रभावी होगा, जिसमें जेलों को सुधार संस्थान और जेल अधिकारियों को सुधार सेवा अधिकारी के रूप में जाना जाएगा। साथ ही खतरनाक कैदियों के लिए अलग बैरक और अधिक स्थान की व्यवस्था भी की जाएगी।
