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Indore News: बीच रास्ते में गायब हो रहा करोड़ों लीटर नर्मदा का पानी, टंकियां खाली, जनता बेहाल

Mon, 25 May 2026 06:08 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Mon, 25 May 2026 06:08 PM IST
सार

जलूद से इंदौर भेजे जा रहे पानी में रोजाना 12 से 48 एमएलडी (करीब 1.2 से 4.8 करोड़ लीटर) की कमी दर्ज की गई। दूसरी तरफ शहर की 106 टंकियां पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं और लाखों नागरिकों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। 

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Indore News Narmada Water Supply Jalud water tanks shortage summer problem
पटेल नगर में पानी भरने के लिए लोग कई घंटों तक लाइन में इंतजार कर रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

इंदौर में बढ़ती गर्मी के कारण पानी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में नर्मदा प्रोजेक्ट पर भी पूरी क्षमता से पानी की सप्लाई बनाए रखने का दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। लेकिन कुछ समय पहले एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जलूद से इंदौर तक आने वाले नर्मदा तृतीय चरण के पानी की मात्रा में हर दिन बहुत बड़ा अंतर आ रहा है। यानी, जलूद से जितना पानी इंदौर भेजा जा रहा है, उतना पानी इंदौर पहुंच ही नहीं रहा है। इसमें रोजाना 12 से 48 एमएलडी तक का बड़ा अंतर दर्ज किया जा रहा है।
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लाखों लोगों की प्यास पर असर
एक एमएलडी में 10 लाख लीटर पानी होता है। इस हिसाब से देखा जाए तो 12 से 48 एमएलडी के मुताबिक यह कमी रोजाना 1.2 करोड़ से 4.8 करोड़ लीटर पानी की बैठती है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्रालय के तहत काम करने वाले सीपीएचईईओ (सेंट्रल पब्लिक हेल्थ एंड एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन) के मानकों के अनुसार हर व्यक्ति की दैनिक जरूरतों के लिए 135 लीटर पानी की उपलब्धता बेहद जरूरी है। ऐसे में इंदौर के रास्ते में गायब होने वाले 1.2 करोड़ लीटर पानी से 88 हजार लोगों की और 4.8 करोड़ लीटर पानी से 3 लाख 55 हजार लोगों की जरूरत आसानी से पूरी हो सकती है। हालांकि इस अंतर को कम करने के लिए इस काम से जुड़ी दो निजी कंपनियों को इस साल मार्च महीने में नोटिस जारी किया गया था। इसके साथ ही पूरे सिस्टम की रोजाना बारीकी से मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी गई।
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मार्च के दावे, मई में हुए फेल
मार्च में जब इस गंभीर स्थिति को लेकर तृतीय चरण के पानी सप्लाई की बारीकी से मॉनिटरिंग की गई तो यह बात पूरी तरह साफ हो गई कि जलूद से जितना पानी लिफ्ट किया जा रहा है, उतना इंदौर तक नहीं पहुंच रहा है। मार्च में नगर निगम ने दावा किया था कि पानी की सप्लाई में आ रही इस गड़बड़ को जल्द ही पूरी तरह से ठीक कर दिया जाएगा, लेकिन मई के महीने में शहर में जिस तरह से हालात बिगड़ गए हैं, उससे साफ पता चलता है कि पानी की सप्लाई व्यवस्था में अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है।
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पूरी क्षमता से पंपिंग के बाद भी टंकियां खाली
नर्मदा प्रोजेक्ट के तहत प्रथम व द्वितीय चरण से करीब 96 एमएलडी और तृतीय चरण से लगभग 350 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है। यह पानी करीब 70 किलोमीटर दूर जलूद से विभिन्न पंपिंग स्टेशन, फिल्टर प्लांट और जल शुद्धीकरण संयंत्रों के जरिए इंदौर शहर तक पहुंचता है। हालांकि रोजाना इतना पानी लिफ्ट करने के बावजूद शहर की 106 टंकियां पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं। इसका सीधा असर शहर के जल वितरण पर पड़ रहा है और कई इलाकों में पानी की भारी कमी की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे यह साफ है कि पानी जितना भेजा रहा है उतना इंदौर तक पहुंच नहीं पा रहा है।

कचरा जमने से प्रभावित हो रही पंपिंग
जलूद स्थित इंटेकवेल तक पहुंचने वाली नहर में जमा कचरा, कंजी, प्लास्टिक वेस्ट और अन्य गंदगी के कारण पंपिंग प्रक्रिया हमेशा प्रभावित होती है। इससे पानी का डिस्चार्ज काफी कम होता है और आगे की सप्लाई बाधित होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए जलूद में नर्मदा नदी से इंटेक वेल के बीच की नहर की सफाई की जाती है और बड़ी मात्रा में कचरा हटाया जाता है। भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो, इसके लिए 30 मीटर लंबी नहर में डबल स्क्रीनिंग जाली लगाने का काम भी शुरू किया गया है। इससे कचरा आगे पंपिंग सिस्टम तक नहीं पहुंच पाएगा और पानी का प्रवाह बेहतर बना रहेगा।

मार्च के आंकड़ों ने खोली पोल
नर्मदा प्रोजेक्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल मार्च में हर दिन तृतीय चरण का 348 एमएलडी के लगभग पानी सप्लाई किया गया, जबकि इंदौर तक सिर्फ 316 एमएलडी के आसपास ही पानी पहुंचा। यानी इसमें सीधे तौर पर लगभग 32 एमएलडी का अंतर आया। मार्च के पूरे महीने में हर दिन इसी तरह रिकॉर्ड का मिलान किया गया जिसमें पता चला है कि हर दिन 12 से 48 एमएलडी तक का अंतर पाया गया है। इसे दूर करने के लिए नर्मदा प्रोजेक्ट के स्टाफ ने प्रयास तेज किए और प्रबंधन ने पानी लिफ्टिंग व वितरण से जुड़ी दोनों निजी कंपनियों को नोटिस भी जारी किए।

जिम्मेदार कंपनियों से मांगा जवाब
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन कंपनियों से स्पष्ट जवाब मांगा गया है कि आखिर पूरी क्षमता से काम होने के बावजूद सप्लाई में यह कमी क्यों आ रही है और शहर की टंकियां पूरी तरह क्यों नहीं भर पा रही हैं? प्रोजेक्ट में कार्य विभाजन के अनुसार, चिमरटेक कंपनी की जिम्मेदारी जलूद से पानी लिफ्ट करना, उसका ट्रीटमेंट करना और वांचू पॉइंट स्थित ब्रेक थ्रू पॉइंट तक पहुंचाना है। इसके बाद रामकी कंपनी पर शहर की सभी टंकियों तक पानी के वितरण की जिम्मेदारी है। अब यह जांचा जा रही है कि कमी लिफ्टिंग स्तर पर हो रही है या वितरण व्यवस्था में कहीं लीकेज या कोई बड़ी तकनीकी परेशानी है।


जल्द होगा तकनीकी अपग्रेडेशन
नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर आशीष पाठक के अनुसार पानी सप्लाई को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और इसमें छोटी सी भी कमी नहीं रखी जा रही है। एक महीने पहले हमें पानी की सप्लाई कम होने से जुड़ी जानकारी मिली थी जिसके बाद हमने इस काम से जुड़ी दो कंपनियों को नोटिस जारी किए। हम पानी का लीकेज रोकने और सप्लाई बेहतर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। पूरी व्यवस्था अभी बेहतर तरीके से चल रही है और जल्द ही इसमें तकनीकी रूप से भी कई अपग्रेडेशन किए जाएंगे ताकि जलूद से इंदौर तक आने वाले पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखा जा सके।
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