MPPSC: एमपीपीएससी आंदोलन के लीडर्स को भेजा जेल, छात्र भड़के
एमपीपीएससी के छात्रों ने फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है, सरकार को आज शाम तक का समय दिया है।
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मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) द्वारा 2025 के लिए जारी नोटिफिकेशन के बाद केवल 158 पदों की घोषणा होने से विवाद गहराता जा रहा है। इस निर्णय के खिलाफ पहले से नाराज युवाओं में रोष और बढ़ गया है। हाल ही में हुए आंदोलन के प्रमुख और एनईवाययू के संयोजक राधे जाट और रणजीत किशानवंशी को पुलिस ले गई और बाद में उन्हें जेल में भेज दिया गया।
दोनों की गिरफ्तारी की घटनाओं को लेकर उनके दोस्तों ने बताया कि सुबह राधे जाट को उनके तीन इमली स्थित निवास से पुलिस लेकर गई, जबकि रणजीत किशानवंशी को भंवरकुआं क्षेत्र में एक मित्र के फ्लैट से ले जाया गया।
पुलिस का कहना है कि वे बिना अनुमति धरना प्रदर्शन करने की योजना बना रहे थे। पुलिस ने दोनों पर धारा 151 समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा है। इससे पहले भी एमपीपीएससी न्याय यात्रा के दौरान उन पर धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह मुख्यमंत्री मोहन यादव की तानाशाही का जीता जागता उदाहरण है। वहीं दिग्विजय सिंह ने कहा कि बेरोजगार युवा नेताओं को जेल भेजना क्या न्यायपूर्ण है जबकि 41 का नोटिस देकर मुचलके पर छोड़ने का नियम है।
इससे पहले एमपीपीएससी का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद युवाओं में गुस्सा फूट पड़ा था। रात को आंदोलनकारियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश साझा किए, जिसमें उन्होंने सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाया। राधे जाट और रणजीत ने अपने संदेश में कहा था कि 700 पदों की मांग के मुकाबले केवल 158 पदों का आना युवाओं के साथ अन्याय है, और इसके लिए सरकार को जवाब देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे पीछे नहीं हटेंगे और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। इसके बाद रात दो बजे गूगल मीट के जरिए लगभग 150 युवा जुड़े और तय हुआ कि बुधवार को भंवरकुआं स्थित डीडी गार्डन में आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। लेकिन बैठक से पहले ही दोनों आंदोलनकारियों को उठा लिया गया।
इससे पहले 90 घंटे तक पीएससी के बाहर चले आंदोलन ने सरकार को झकझोर दिया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर सकारात्मक आश्वासन दिया था, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हो गया। युवाओं को उम्मीद थी कि अगर 700 पद नहीं तो कम से कम 300-400 पद दिए जाएंगे, लेकिन केवल 158 पदों की घोषणा ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब इस मामले ने एक बार फिर आंदोलन की आग भड़का दी है।
