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Indore News: बेटी ने बढ़ाया मान, भावुक हुई मां, बताई स्टेट टॉपर बेटी के संघर्ष की पूरी कहानी
Wed, 15 Apr 2026 05:46 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 15 Apr 2026 05:46 PM IST
सार
Indore News: इंदौर की तन्वी कुमावत ने 12वीं जीव विज्ञान संकाय में मप्र में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। 500 में से 492 अंक हासिल करने वाली तन्वी ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतरता, परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है।
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माता पिता और शिक्षकों के साथ तन्वी ने खुशियां साझा की।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बुधवार सुबह 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए। मप्र के परिणामों में इंदौर जिले में प्रतिभाओं ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। तन्वी कुमावत ने 12वीं कक्षा के जीव विज्ञान संकाय में पूरे प्रदेश में टॉप किया है। तन्वी ने 500 में से 492 अंक प्राप्त कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
सफलता का मूल मंत्र निरंतरता और धैर्य
टॉपर तन्वी कुमावत का मानना है कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज निरंतरता है। उनका कहना है कि यदि कोई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में निरंतरता रखता है, तो वह आधी जंग वहीं जीत लेता है। इसके साथ ही अपने मानसिक तनाव और परीक्षा के दबाव पर नियंत्रण रखना भी बेहद आवश्यक है। तन्वी ने बताया कि उन्होंने अपने आसपास के वातावरण और लोगों से हमेशा अच्छी चीजें सीखने की कोशिश की है। उनके लिए उनके आसपास के सभी लोग प्रेरणास्रोत रहे हैं जिनसे उन्होंने जीवन की गहराई को समझा है।
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सोशल मीडिया और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाया
आज के दौर में विद्यार्थियों के लिए सोशल मीडिया और अन्य मनोरंजन के साधन बड़े भटकाव का कारण बनते हैं। इस पर तन्वी का कहना है कि वह भी फोन और सोशल मीडिया का उपयोग करती हैं, लेकिन उन्होंने इसके और अपनी पढ़ाई के बीच एक संतुलन बना लिया था। वे मानती हैं कि ज्यादा घंटे पढ़ने से बेहतर है कि रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ा जाए। उनके अनुसार नियमित पढ़ाई ही अच्छे अंक लाने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने आने वाले विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे एनसीईआरटी की पुस्तकों पर ध्यान दें और शिक्षकों के व्याख्यान कभी मिस न करें।
डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने का सपना
तन्वी कुमावत का लक्ष्य भविष्य में एक कुशल डॉक्टर बनना है। उनका उद्देश्य केवल एक सफल चिकित्सक बनना ही नहीं है, बल्कि वे समाज के लिए कुछ सकारात्मक योगदान देना चाहती हैं। वे एक ऐसा डॉक्टर बनना चाहती हैं जो समाज के लोगों का भला कर सके और मानवता की सेवा कर सके। अपनी इस सफलता का श्रेय वे अपने माता-पिता, पूरे परिवार और शिक्षकों को समान रूप से देती हैं। परीक्षा के दौरान जब कभी कोई पेपर कठिन आता था, तो वे अपने पूरे साल की मेहनत पर भरोसा रखकर आत्मविश्वास बनाए रखती थीं।
पिता बोले हमने कभी पढ़ाई के लिए दबाव नहीं बनाया, मां ने कहा मैं उसके साथ रातभर जागती रही
तन्वी की इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता का भी कड़ा संघर्ष रहा है। उनके पिता संदीप कुमावत, जो एक स्कूल में मैनेजमेंट का कार्य करते हैं, उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी पर कभी टॉप करने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने केवल तन्वी की जरूरतों और संसाधनों का ध्यान रखा और उस पर भरोसा किया। वहीं उनकी माता मनीला कुमावत, जो स्वयं एक शिक्षिका हैं, उन्होंने कहा कि बेटी की पढ़ाई के दौरान वे भी रात-रात भर जागती थीं। उनका मानना है कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उच्च शिक्षा देना बहुत जरूरी है ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
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सफलता का मूल मंत्र निरंतरता और धैर्य
टॉपर तन्वी कुमावत का मानना है कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज निरंतरता है। उनका कहना है कि यदि कोई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में निरंतरता रखता है, तो वह आधी जंग वहीं जीत लेता है। इसके साथ ही अपने मानसिक तनाव और परीक्षा के दबाव पर नियंत्रण रखना भी बेहद आवश्यक है। तन्वी ने बताया कि उन्होंने अपने आसपास के वातावरण और लोगों से हमेशा अच्छी चीजें सीखने की कोशिश की है। उनके लिए उनके आसपास के सभी लोग प्रेरणास्रोत रहे हैं जिनसे उन्होंने जीवन की गहराई को समझा है।
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सोशल मीडिया और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाया
आज के दौर में विद्यार्थियों के लिए सोशल मीडिया और अन्य मनोरंजन के साधन बड़े भटकाव का कारण बनते हैं। इस पर तन्वी का कहना है कि वह भी फोन और सोशल मीडिया का उपयोग करती हैं, लेकिन उन्होंने इसके और अपनी पढ़ाई के बीच एक संतुलन बना लिया था। वे मानती हैं कि ज्यादा घंटे पढ़ने से बेहतर है कि रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ा जाए। उनके अनुसार नियमित पढ़ाई ही अच्छे अंक लाने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने आने वाले विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे एनसीईआरटी की पुस्तकों पर ध्यान दें और शिक्षकों के व्याख्यान कभी मिस न करें।
डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने का सपना
तन्वी कुमावत का लक्ष्य भविष्य में एक कुशल डॉक्टर बनना है। उनका उद्देश्य केवल एक सफल चिकित्सक बनना ही नहीं है, बल्कि वे समाज के लिए कुछ सकारात्मक योगदान देना चाहती हैं। वे एक ऐसा डॉक्टर बनना चाहती हैं जो समाज के लोगों का भला कर सके और मानवता की सेवा कर सके। अपनी इस सफलता का श्रेय वे अपने माता-पिता, पूरे परिवार और शिक्षकों को समान रूप से देती हैं। परीक्षा के दौरान जब कभी कोई पेपर कठिन आता था, तो वे अपने पूरे साल की मेहनत पर भरोसा रखकर आत्मविश्वास बनाए रखती थीं।
पिता बोले हमने कभी पढ़ाई के लिए दबाव नहीं बनाया, मां ने कहा मैं उसके साथ रातभर जागती रही
तन्वी की इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता का भी कड़ा संघर्ष रहा है। उनके पिता संदीप कुमावत, जो एक स्कूल में मैनेजमेंट का कार्य करते हैं, उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी पर कभी टॉप करने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने केवल तन्वी की जरूरतों और संसाधनों का ध्यान रखा और उस पर भरोसा किया। वहीं उनकी माता मनीला कुमावत, जो स्वयं एक शिक्षिका हैं, उन्होंने कहा कि बेटी की पढ़ाई के दौरान वे भी रात-रात भर जागती थीं। उनका मानना है कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उच्च शिक्षा देना बहुत जरूरी है ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
