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Indore News: बिस्कुट फिल्म ने मचाया धमाल, मालवी बोली से जीता दुनिया का दिल, जीते 6 इंटरनेशनल अवॉर्ड

Fri, 01 Aug 2025 06:57 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Fri, 01 Aug 2025 06:57 PM IST
सार

Indore News: फिल्म 'बिस्कुट' ने मालवी बोली और मालवा की संस्कृति को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। फिल्म का यूट्यूब प्रीमियर शुक्रवार को हुआ। फिल्म में इंदौर के कलाकारों ने अभिनय किया है और इसकी कहानी दो भाईयों की भावनात्मक मुलाकात पर आधारित है। 

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Indore news: Malvi short film 'Biscuit' wins 6 international awards, premieres on YouTube
फिल्म के निर्माता निर्देशक औऱ अभिनेता - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

आंखों के सामने घटी छोटी सी घटना भी एक फिल्म बन सकती है। मालवा के दो भाईयों की सच्ची कहानी डायरेक्टर गौतम जोशी के सामने घटी और उन्होंने उस पर पूरी फिल्म ही बना दी। आज यह फिल्म कई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड जीत रही है और सभी को प्रेरणा दे रही है। इंदौर में शुक्रवार को कॉमेडी को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने वाली शॉर्ट फिल्म ‘बिस्कुट’ का यूट्यूब प्रीमियर आयोजित किया गया। ओपियम पिक्चर्स और सिफर फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता पीयूष चौधरी और निर्देशक गौतम जोशी हैं। इस फिल्म में इंदौर के कलाकारों ने काम किया है जिसमें रोहित तिवारी और क्षितिज पवार ऑलरेडी नेशनल मंच और नेशनल फिल्मों में अपना हुनर दिखा रहे हैं। इस विशेष अवसर पर अमर उजाला ने इन चारों से बातचीत की और जाना कि किस तरह से उन्होंने इस फिल्म में मालवी भाषा को नया जीवन देने का प्रयास किया। 
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चारों ने बताया कि जब फिल्म की योजना बनी तभी यह तय कर लिया था कि फिल्म मालवी भाषा में ही होगी। फिल्म मालवा के दो भाईयों की सच्ची कहानी है जो अचानक कई साल के बाद अस्पताल में मिलते हैं और बचपन में खाए चाय बिस्कुट के पलों को याद करते हैं। चारों ने बताया कि हम फिल्म को पूरी तरह से जीवंत रखना चाहते थे इसीलिए हमने इसे मालवी में ही बनाया और आज पूरी दुनिया इसे सराह रही है। 
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फिल्म ने 6 इंटरनेशनल अवॉर्ड जीते 
इस कॉमेडी फिल्म को दुनिया के कई फिल्म फेस्टिवल्स में प्रदर्शित किया गया और इस फिल्म को दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल मेंशन मिला इसके अलावा फिल्म ने 6 इंटरनेशनल अवॉर्ड जीते और 7 से अधिक फेस्टिवल्स में प्रदर्शित किया गया है। फिल्म के निर्माता पीयूष चौधरी ने बताया कि कॉमेडी जैसी जॉनार में एक्सपेरिमेंट करना बहुत बड़ा रिस्क था लेकिन साथ ही ये एक अवसर भी था सिनेमा में नया टेस्ट देने का। हम अब जल्द ही फुल स्क्रीन की तरफ बढ़ने वाले हैं। इस फिल्म ने हमें इंटरनेशनल मंच पर जाने का कॉन्फिडेंस दिया है।
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इंदौर के अभिनेताओं ने निभाए मुख्य किरदार
निर्माता पीयूष चौधरी ने बताया कि मालवा से हमें प्यार है और मालवी से भी एक्टर रोहित तिवारी और क्षितिज पवार की केमिस्ट्री ने इसके हास्य में जान डाल दी है। ये दोनों इंदौर से निकले इंटरनेशनल स्टार हैं। साथ ही प्रमोद फरक्या के मार्गदर्शन ने हमें बड़ा सोचने की ताकत दी है। 6 से ज्यादा इंटरनेशनल अवॉर्ड इसका बेस्ट एग्जाम्पल है। स्टोरी टेलिंग कि हमारी यात्रा अभी बड़ा रूप लेने जा रही है।

इंदौर के अस्पताल में हुई शूटिंग
अभिनेता क्षितिज पवार ने बताया कि फिल्म की शूटिंग इंदौर के एक अस्पताल रॉबर्ट नर्सिंग होम में की गई और लगभग इस फिल्म को बनाने में तीन से साढ़े तीन महीने का समय लगा है। इस फिल्म की विशेषता यह है कि जिस तरह एक हाई एंड टिपिकल बॉलीवुड फिल्म जिन रिसोर्सेस के साथ शूट की जाती है, जैसे कैमरा हमने यूज किया है, रिकॉर्डर्स और जो गैजेट्स यूज किए हैं वह हाई एंड फीचर फिल्म वाले यूज किया है। 


साउथ की फिल्मों के एडिटर्स ने फिल्म को तराशा
निर्देशक गौतम जोशी ने बताया कि अगर आर्टिस्ट की बात की जाए, राइटर, डायरेक्टर, आर्टिस्ट इंदौर के हैं, लेकिन टेक्नीशियन जो सिनेमा को अच्छे तरीके से जानते हैं, वह हमने मुंबई से बुलाए। एडिटर, जो साउथ की फिल्में एडिट करते हैं, उन लोगों से एडिट करवाया ताकि एडिटिंग में एक नया स्टाइल समझ में आ सके। लैंग्वेज पर भी कमांड रखा है कि हम जितना बोलचाल की मालवी भाषा का इस्तेमाल करें और जो सबको आसानी से समझ में आए। और सबसे बड़ी बात यह रही, मालवी भाषा के इस्तेमाल के कारण, इस भाषा की खूबसूरती के कारण, पहले हमें यह डर था कि इंदौर के बाहर के लोग इस भाषा को समझ पाएंगे या नहीं लेकिन सबसे अच्छी बात यह रही की, हिंदुस्तान के साथ, विदेशों में भी उन्होंने सबटाइटल के साथ उस लैंग्वेज को, उन एक्सेंट को, उन शब्दों के बोलने की अंदाज को लोगों ने बहुत पसंद किया। संभवत यही एक कारण बना, अगर यह फिल्म दूसरी भाषा में बनती तो उतना वह प्रभाव नहीं लेकर आ पाती लेकिन मालवी भाषा ने उस फिल्म ने, मालवी के बोलने के तरीके ने, पर्सनालिटी ने इस फिल्म में जान डाल दी। 
 
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