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Indore News: आईआईटी इंदौर ने बनाया नया उपकरण, आर्द्रभूमियों को प्रदूषण से बचाएगा
Sat, 04 Oct 2025 01:54 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 04 Oct 2025 01:54 PM IST
सार
Indore News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के शोधकर्ताओं ने एक उन्नत डिजिटल उपकरण विकसित किया है। यह आर्द्रभूमियों की जल गुणवत्ता की निगरानी करेगा।
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प्रो. मनीष कुमार गोयल
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक डिजिटल एप्लिकेशन विकसित किया है, जो लगभग वास्तविक समय में आर्द्रभूमियों के स्वास्थ्य की निगरानी कर सकता है। यह एप्लिकेशन प्रदूषण, पोषक तत्वों की अधिकता और अन्य पर्यावरणीय खतरों की पहचान समय रहते कर लेता है, जिससे इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा आसान हो जाती है। इस परियोजना का नेतृत्व सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मनीष कुमार गोयल और उनके शोधार्थी विजय जैन ने किया है। यह उपग्रह चित्रों और क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक का उपयोग करके जल गुणवत्ता का सटीक विश्लेषण करता है और गंभीर समस्याओं का पूर्वानुमान लगाता है।
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आर्द्रभूमियों का महत्व और मौजूदा चुनौतियां
आर्द्रभूमियां पृथ्वी की “जीवन रेखा” कही जाती हैं, ये जल को स्वच्छ करती हैं, बाढ़ को नियंत्रित करती हैं, कार्बन का भंडारण करती हैं और अनेक प्रजातियों को आवास प्रदान करती हैं। यद्यपि ये पृथ्वी की सतह का मात्र 9% हिस्सा कवर करती हैं, लेकिन वैश्विक पारिस्थितिक सेवाओं में 23% से अधिक योगदान देती हैं। भारत में लगभग 15.98 मिलियन हेक्टेयर आर्द्रभूमियां हैं, जो देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 5% है। भारत 1982 सेरामसर कन्वेंशन का सदस्य है और वर्तमान में 93 रामसर-निर्धारित आर्द्रभूमियां हैं। हालांकि, बढ़ते शहरीकरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और आक्रामक प्रजातियों के कारण ये आर्द्रभूमियां खतरे में हैं।
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नया उपकरण कैसे करेगा मदद
पारंपरिक रूप से आर्द्रभूमियों की निगरानी मैन्युअल जल नमूनाकरण और प्रयोगशाला परीक्षणों पर निर्भर रही है, जिससे समय पर कार्रवाई में देरी होती थी। आईआईटी इंदौर का यह नया एप्लिकेशन Sentinel-2 उपग्रह डेटा का उपयोग करता है, जिसमें 10 मीटर स्थानिक और 5 दिन की टेम्पोरल रिजाल्यूशन है। यह चार प्रमुख सूचकांकों NDCI (क्लोरोफिल मात्रा), NDTI (गंदलापन), NDWI (मीठे पानी की उपलब्धता) और NDMI (जलीय वनस्पति में नमी) का विश्लेषण कर आर्द्रभूमि की समग्र स्थिति का आकलन करता है। यह प्रणाली रीयल-टाइम अपडेट देती है, किफायती है, उपयोग में सरल है और पूर्व चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करती है। इसे पूरे भारत की आर्द्रभूमियों में लागू किया जा सकता है।
आईआईटी इंदौर का दृष्टिकोण और भविष्य की दिशा
आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने कहा कि यह नवाचार सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रो. मनीष कुमार गोयल के अनुसार, “यह उपकरण वास्तविक समय का डेटा प्रदान करता है, जो आर्द्रभूमियों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में उपयोगी है। इससे समय पर कार्रवाई और संरक्षण संभव होता है।” उन्होंने आगे बताया कि भविष्य में इस एप्लिकेशन में और अधिक जल गुणवत्ता मापदंड शामिल किए जाएंगे, ताकि प्रदूषण की घटनाओं पर तुरंत अलर्ट मिल सके। महत्वपूर्ण रूप से, यह एप्लिकेशन सभी उपयोगकर्ताओं के लिए निःशुल्क है, जिससे सरकारें, संरक्षण समूह और आम नागरिक सभी इसका लाभ उठा सकते हैं।
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पारंपरिक रूप से आर्द्रभूमियों की निगरानी मैन्युअल जल नमूनाकरण और प्रयोगशाला परीक्षणों पर निर्भर रही है, जिससे समय पर कार्रवाई में देरी होती थी। आईआईटी इंदौर का यह नया एप्लिकेशन Sentinel-2 उपग्रह डेटा का उपयोग करता है, जिसमें 10 मीटर स्थानिक और 5 दिन की टेम्पोरल रिजाल्यूशन है। यह चार प्रमुख सूचकांकों NDCI (क्लोरोफिल मात्रा), NDTI (गंदलापन), NDWI (मीठे पानी की उपलब्धता) और NDMI (जलीय वनस्पति में नमी) का विश्लेषण कर आर्द्रभूमि की समग्र स्थिति का आकलन करता है। यह प्रणाली रीयल-टाइम अपडेट देती है, किफायती है, उपयोग में सरल है और पूर्व चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करती है। इसे पूरे भारत की आर्द्रभूमियों में लागू किया जा सकता है।
आईआईटी इंदौर का दृष्टिकोण और भविष्य की दिशा
आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने कहा कि यह नवाचार सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रो. मनीष कुमार गोयल के अनुसार, “यह उपकरण वास्तविक समय का डेटा प्रदान करता है, जो आर्द्रभूमियों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में उपयोगी है। इससे समय पर कार्रवाई और संरक्षण संभव होता है।” उन्होंने आगे बताया कि भविष्य में इस एप्लिकेशन में और अधिक जल गुणवत्ता मापदंड शामिल किए जाएंगे, ताकि प्रदूषण की घटनाओं पर तुरंत अलर्ट मिल सके। महत्वपूर्ण रूप से, यह एप्लिकेशन सभी उपयोगकर्ताओं के लिए निःशुल्क है, जिससे सरकारें, संरक्षण समूह और आम नागरिक सभी इसका लाभ उठा सकते हैं।
