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Indore News: वॉट्सऐप पर नकली नोट बेचने वाला गिरोह गिरफ्तार, 40 लाख की ठगी का खुलासा
Tue, 13 May 2025 08:09 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 13 May 2025 08:09 PM IST
सार
Indore News: इंदौर के पलासिया इलाके में पुलिस ने दो युवकों को नकली नोटों की तस्करी करते रंगे हाथों पकड़ा। वॉट्सऐप के जरिए 1 लाख के बदले 4 लाख नकली नोट देने की डील कर रहे इन युवकों के पास से 40 लाख रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के पलासिया इलाके में पुलिस ने एक बड़े नकली नोट रैकेट का खुलासा किया है। वॉट्सऐप के जरिए नकली नोट बेचने का सौदा कर रहे दो युवकों को सादी वर्दी में पकड़ा गया। गिरफ्तार किए गए युवकों के पास से करीब 40 लाख रुपये के नकली नोट बरामद हुए हैं। यह नोट असली नोटों की गड्डियों में ऊपर और नीचे छिपा कर रखे गए थे, ताकि पहली नजर में नकली न लगें। पुलिस को शक है कि यह पूरा मामला एक संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है। डीसीपी हंसराज सिंह जैन की टीम को सूचना मिली थी कि कुछ युवक सोशल मीडिया पर नकली नोट बेचने का सौदा कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने खुद को ग्राहक बनाकर उनसे वॉट्सऐप पर संपर्क किया और तय सौदे के तहत दोनों युवकों को पलासिया इलाके में बुलाया गया।
बैग में छिपाकर लाए थे नकली नोट, मौके पर हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र के जलगांव निवासी प्रथमेश येवलेकर और बड़वाह निवासी दीपक कौशल तय समय पर पलासिया पहुंचे। वे एक बैग में नकली नोट लेकर आए थे। पहले से तैनात पुलिस टीम ने जैसे ही दोनों को देखा, तुरंत दबोच लिया। जांच में उनके बैग से करीब 20 गड्डियों में छिपाकर रखे गए नकली नोट मिले। आरोपी नकली नोटों के ऊपर और नीचे असली नोट रखकर उन्हें छिपाकर लाए थे ताकि वे असली दिखें। तलाशी के दौरान कुछ असली नोट भी बरामद हुए हैं। पुलिस का मानना है कि इन नोटों की छपाई इतनी साफ है कि आम आदमी के लिए पहचान पाना मुश्किल होता।
बड़े गिरोह से जुड़ा हो सकता है मामला, साइबर सेल कर रही जांच
फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए क्राइम ब्रांच और साइबर सेल को भी इस केस में शामिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इस नेटवर्क का पूरा खुलासा किया जा सकता है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी यह नकली नोट कहां से ला रहे थे और इनके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। अफसरों का मानना है कि इस रैकेट में कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिन तक जल्द ही पुलिस पहुंच सकती है।
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चिल्ड्रन बैंक के नोट से करते थे धोखाधड़ी, सोशल मीडिया पर करते थे प्रचार
एडीशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा के अनुसार, आरोपियों से जो नकली नोट बरामद हुए हैं, वे ‘चिल्ड्रन बैंक’ के हैं जिन्हें आमतौर पर बच्चों के खेलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आरोपी इन नोटों को ऊपर-नीचे असली नोट लगाकर गड्डी बनाते थे और चिन्हित गड्डी को दिखाकर सौदा करते थे। इसके बाद पुलिस या क्राइम ब्रांच का डर दिखाकर मौके से तुरंत रवाना हो जाते थे। ठगी का पता खरीदार को बाद में चलता था। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी फेसबुक और वॉट्सऐप पर विज्ञापन डालकर लोगों को फंसाते थे और ठिकाने बदल-बदल कर सौदा करते थे। प्रथमेश पहले से इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है और उसने दीपक को भी इस रैकेट में शामिल किया। पुलिस अब इनसे और घटनाओं के बारे में पूछताछ कर रही है।
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बैग में छिपाकर लाए थे नकली नोट, मौके पर हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र के जलगांव निवासी प्रथमेश येवलेकर और बड़वाह निवासी दीपक कौशल तय समय पर पलासिया पहुंचे। वे एक बैग में नकली नोट लेकर आए थे। पहले से तैनात पुलिस टीम ने जैसे ही दोनों को देखा, तुरंत दबोच लिया। जांच में उनके बैग से करीब 20 गड्डियों में छिपाकर रखे गए नकली नोट मिले। आरोपी नकली नोटों के ऊपर और नीचे असली नोट रखकर उन्हें छिपाकर लाए थे ताकि वे असली दिखें। तलाशी के दौरान कुछ असली नोट भी बरामद हुए हैं। पुलिस का मानना है कि इन नोटों की छपाई इतनी साफ है कि आम आदमी के लिए पहचान पाना मुश्किल होता।
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बड़े गिरोह से जुड़ा हो सकता है मामला, साइबर सेल कर रही जांच
फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए क्राइम ब्रांच और साइबर सेल को भी इस केस में शामिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इस नेटवर्क का पूरा खुलासा किया जा सकता है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी यह नकली नोट कहां से ला रहे थे और इनके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। अफसरों का मानना है कि इस रैकेट में कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिन तक जल्द ही पुलिस पहुंच सकती है।
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चिल्ड्रन बैंक के नोट से करते थे धोखाधड़ी, सोशल मीडिया पर करते थे प्रचार
एडीशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा के अनुसार, आरोपियों से जो नकली नोट बरामद हुए हैं, वे ‘चिल्ड्रन बैंक’ के हैं जिन्हें आमतौर पर बच्चों के खेलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आरोपी इन नोटों को ऊपर-नीचे असली नोट लगाकर गड्डी बनाते थे और चिन्हित गड्डी को दिखाकर सौदा करते थे। इसके बाद पुलिस या क्राइम ब्रांच का डर दिखाकर मौके से तुरंत रवाना हो जाते थे। ठगी का पता खरीदार को बाद में चलता था। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी फेसबुक और वॉट्सऐप पर विज्ञापन डालकर लोगों को फंसाते थे और ठिकाने बदल-बदल कर सौदा करते थे। प्रथमेश पहले से इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है और उसने दीपक को भी इस रैकेट में शामिल किया। पुलिस अब इनसे और घटनाओं के बारे में पूछताछ कर रही है।
