Indore News: ज्यादा डिग्री वाले प्रोफेसर कुलगुरु पद के योग्य नहीं! इंटरव्यू का बुलावा तक नहीं भेजा गया
27 सितंबर को डीएवीवी के कुल गुरु का कार्यकाल पूरा हो रहा है। चयन समिति ने तीन नाम फाइनल करके राज्यपाल कार्यालय भेज दिए हैं। जल्द ही इंदौर को नया कुल गुरु मिलेगा।
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इंदौर में डीएवीवी (देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी) को जल्द ही नया कुलगुरु मिलने वाला है। कुलगुरु डॉ. रेणु जैन का कार्यकाल 27 सितंबर को पूरा हो रहा है। अगले कुलगुरु के लिए 285 प्रोफेसर्स ने अपनी दावेदारी पेश की थी। इसमें से चयन कमेटी ने 10 आवेदकों को योग्यता की विभिन्न कसौटी पर परखने और इंटरव्यू प्रकिया पूर्ण करने के बाद बंद लिफाफे में तीन नामों का पैनल कुलाधिपति को राजभवन भेज दिया है। किसी एक नाम पर राजभवन की मुहर लगना शेष है। कुलगुरु की दौड़ में कई योग्य व ज्यादा डिग्री वाले प्रोफेसर भी थे, लेकिन उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलावा तक नहीं दिया गया। इससे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
कुलगुरु पद के लिए जिन 10 प्रोफेसरों का इंटरव्यू हुआ, उनमें से पांच प्रोफेसर इंदौर के और पांच अन्य दावेदार थे। यदि नाम की घोषणा में विलंब होता है तो देअविवि में रेणु जैन को अगले आदेश तक प्रभारी कुलपति बनाया जा सकता है।
इन्हें बुलाया इंदौर से इंटरव्यू के लिए
इंदौर से पांच प्रोफेसरों के आवेदन कमेटी ने स्वीकार किए और इंटरव्यू के लिए न्योता भेजा। इनमें यूनिवर्सिटी के डॉ. आशुतोष मिश्रा (मैथेमेटिक्स डिपार्टमेंट हेड), डॉ. राजीव दीक्षित (डॉयरेक्टर कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल), कन्हैया आहूजा (इकॉनामिक्स हेड) के साथ सचिन शर्मा (प्रोफेसर आईएमएस और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अभाविप) शामिल थे, वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित को भी बुलाया गया, लेकिन वे इंटरव्यू देने नहीं गए। इन सभी में प्रोफेसर मिश्रा ही सबसे ज्यादा अनुभवी हैं और प्रभारी कुलपति रह चुके हैं, दीक्षित के राजनीतिक संबंध काफी मजबूत हैं, वहीं शर्मा एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी हैं।
चयन प्रक्रिया विवादों में क्यों आई?
चयन कमेटी में कुलाधिपति ओर से नियुक्त पणिनी संस्कृत यूनिवर्सिटी के विजय कुमार, शासन से नियुक्ति प्रतिनिधि चित्रकूट ग्रामोदय के कुलपति भरत मिश्रा और यूजीसी से नियुक्त प्रतिनिधि साउथ विहार सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति कामेश्वर नाथ सिंह थे। इन्होंने अधिक डिग्रीधारी, अनुभवी प्रोफेसरों के आवेदन खारिज कर दिए और उन्हें इंटरव्यू तक के लिए नहीं बुलाया। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर छानबीन समिति ने किस आधार पर नामों को छांटा और फिर उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।
इन अनुभवी प्रोफेसर्स को मौका नहीं मिला
इंदौर और मप्र नहीं बल्कि देश में सबसे ज्यादा डिग्रीधारी और अनुभवी प्रोफेसर मंगल मिश्रा हैं, इनके पास एक-दो नहीं बल्कि छह विषय में पीएचडी है और डीलिट् भी है और दर्जन भर डिग्रियां हैं। इनके आवेदन को कमेटी ने इंटरव्यू लायक भी नहीं समझा। जीएसटीआईटीएस के डायरेक्टर रहे राकेश सक्सेना हों या सीनियर प्रोफेसर नितिन सप्रे या फिर इंदौर के प्रोफेसर राजेश वर्मा जो जबलपुर में कुलपति हैं, इन सभी के आवेदन को इंटरव्यू योग्य भी नहीं समझा गया। इसी तरह मंत्री तुलसी सिलावट के भाई और होलकर कॉलेज को ए डबल प्लस दिलाने वाले डॉ. सुरेश सिलावट को भी भी कमेटी ने अलग कर दिया।
कुलाधिपति अंतिम निर्णय लेंगे
चयन कमेटी ने कुलपति पद के लिए योग्य लगे दावेदारों में से तीन के नाम बंद लिफाफे में अपनी अनुशंसा के साथ कुलाधिपति को दे दिए हैं। इसमें से राज्यपाल जिसे उचित लगेगा उसे कुलपति नियुक्ति करेंगे, हालांकि, यह अनिवार्य नहीं है, समस्त अधिकार कुलाधिपति के पास होते हैं वह चाहें तो इन अनुशंसाओं के परे जाकर कोई भी नाम घोषित कर सकते हैं। वैसे भी कमेटी की पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ चुकी है।
वर्तमान कुलगुरु ने राष्ट्रपति को बुलाकर विवि इतिहास में नाम दर्ज करवाया
27 सितंबर को मौजूदा कुलगुरु डॉ. रेणु जैन का कार्यकाल पूरा हो रहा है। डीएवीवी में पूरे 24 साल बाद कोई कुलपति कार्यकाल पूरा करने जा रहा है। उसके पहले दो दशक तक एक भी कुलगुरु कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कोई इस्तीफा देकर गया तो किसी को धारा 52 लगाकर हटाया गया। वर्तमान कुलपति प्रो. रेणु जैन न केवल 4 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही हैं, बल्कि प्रभारी कुलपति के तौर पर भी वे सर्वाधिक एक वर्ष तक पद पर रहीं। देअविवि की पहली महिला कुल गुरु डॉ. रेणु जैन अपने कार्यकाल के अंतिम माह में राष्ट्रपति द्रोपदी मूर्म को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित कर के विवि के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं।
