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Indore News: इंदौर में होगा जानवरों का अंतिम संस्कार, नगर निगम का हरियाणा की कंपनी से 3 करोड़ का अनुबंध
Thu, 29 May 2025 04:44 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Thu, 29 May 2025 04:44 PM IST
सार
Indore News: इंदौर अब मृत जानवरों को दफनाने के बजाय उनका विधिवत अंतिम संस्कार करेगा। नगर निगम ने हरियाणा की माइक्रोटेक कंपनी के साथ मिलकर प्लांट निर्माण का निर्णय लिया है, जिस पर लगभग 3 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
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इंदौर नगर निगम में घोटाला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर नगर निगम ने शहर में मृत जानवरों को जमीन में गाड़ने की परंपरा को खत्म करते हुए उनके विधिवत अंतिम संस्कार की नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए निगम ने हरियाणा की माइक्रोटेक कंपनी से पांच साल का करार किया है। यह कंपनी अंतिम संस्कार प्लांट का निर्माण, संचालन और रखरखाव करेगी। योजना पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अब तक मृत जानवरों को गड्ढा खोदकर जमीन में दफनाया जाता था, जिससे बदबू और भूजल प्रदूषण की समस्याएं उत्पन्न होती थीं। इस समस्या के समाधान के लिए निगम ने निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे, जिनमें से पांच कंपनियों ने रुचि दिखाई और अंततः हरियाणा की कंपनी को चुना गया।
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इंदौर बनेगा मध्य प्रदेश का पहला ऐसा शहर
नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने बताया कि इस योजना के लागू होने के बाद इंदौर मध्य प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन जाएगा, जहां मृत जानवरों का वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से अंतिम संस्कार किया जाएगा। भविष्य में इस प्लांट में पालतू जानवरों का भी अंतिम संस्कार संभव होगा, जिसके लिए शुल्क निर्धारित किया जाएगा। इस पहल से न केवल स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि शहर में बढ़ते प्रदूषण को भी रोका जा सकेगा। यह योजना स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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भोपाल और ग्वालियर में पहले से मौजूद है यह सुविधा
भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों में पहले ही एनिमल इंसीनरेटर की सुविधा उपलब्ध है। भोपाल में 5 करोड़ की लागत से एक इंसीनरेटर लगाया गया है, जो प्रतिदिन 35–40 मृत जानवरों का अंतिम संस्कार कर सकता है। इसकी क्षमता प्रति घंटे 300 किलो और पूरे दिन में लगभग 4 टन शवों के अंतिम संस्कार की है। इसमें डबल स्क्रबर टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है, जो धुएं को ठंडा कर उसमें मौजूद हानिकारक कणों को फिल्टर करती है। ग्वालियर के केदारपुरा क्षेत्र में भी दो इंसीनरेटर 7–8 करोड़ रुपये की लागत से लगाए जा चुके हैं, जिससे वहां भी जमीन और भूजल को प्रदूषण से बचाया जा रहा है।
देश के अन्य शहरों में भी है अंतिम संस्कार की सुविधा
दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मृत जानवरों के अंतिम संस्कार की यह व्यवस्था पहले से लागू है। दिल्ली, आगरा और कोटा जैसे शहरों में यह सिस्टम सफलतापूर्वक काम कर रहा है। खासकर आगरा में अंतिम संस्कार के बाद पशु अस्थियां परिजनों को विसर्जन के लिए सौंपी जाती हैं। यह व्यवस्था न केवल धार्मिक भावना का सम्मान करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद जरूरी मानी जा रही है। अब इंदौर भी इस आधुनिक सुविधा से लैस हो जाएगा, जिससे यह शहर एक नई मिसाल कायम करेगा।
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भोपाल और ग्वालियर में पहले से मौजूद है यह सुविधा
भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों में पहले ही एनिमल इंसीनरेटर की सुविधा उपलब्ध है। भोपाल में 5 करोड़ की लागत से एक इंसीनरेटर लगाया गया है, जो प्रतिदिन 35–40 मृत जानवरों का अंतिम संस्कार कर सकता है। इसकी क्षमता प्रति घंटे 300 किलो और पूरे दिन में लगभग 4 टन शवों के अंतिम संस्कार की है। इसमें डबल स्क्रबर टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है, जो धुएं को ठंडा कर उसमें मौजूद हानिकारक कणों को फिल्टर करती है। ग्वालियर के केदारपुरा क्षेत्र में भी दो इंसीनरेटर 7–8 करोड़ रुपये की लागत से लगाए जा चुके हैं, जिससे वहां भी जमीन और भूजल को प्रदूषण से बचाया जा रहा है।
देश के अन्य शहरों में भी है अंतिम संस्कार की सुविधा
दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मृत जानवरों के अंतिम संस्कार की यह व्यवस्था पहले से लागू है। दिल्ली, आगरा और कोटा जैसे शहरों में यह सिस्टम सफलतापूर्वक काम कर रहा है। खासकर आगरा में अंतिम संस्कार के बाद पशु अस्थियां परिजनों को विसर्जन के लिए सौंपी जाती हैं। यह व्यवस्था न केवल धार्मिक भावना का सम्मान करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद जरूरी मानी जा रही है। अब इंदौर भी इस आधुनिक सुविधा से लैस हो जाएगा, जिससे यह शहर एक नई मिसाल कायम करेगा।
