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Indore News: मोहित को मिला अमेरिका में नया परिवार, अब विदेश में संवर जाएगा भविष्य
Wed, 26 Mar 2025 12:11 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ,इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ,इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Wed, 26 Mar 2025 12:11 PM IST
सार
Indore News: झाबुआ के सरकारी अस्पताल में छह महीने पहले लावारिस मिले मासूम मोहित (परिवर्तित नाम) को अब एक अमेरिकी दंपति ने गोद ले लिया है।
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Indore News
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
छह महीने पहले पेटलावद, झाबुआ के सरकारी अस्पताल में लावारिस हालत में मिले नाबालिग मोहित (परिवर्तित नाम) को आखिरकार एक नया परिवार मिल गया है। बुधवार को यह मासूम अपने नए माता-पिता के साथ अपना जन्मदिन मनाने वाला है। इस दंपति ने न केवल बच्चे को अपनाया है, बल्कि उसे एक नया जीवन और सुरक्षित भविष्य भी प्रदान किया है। पासपोर्ट की औपचारिकताएं पूरी होते ही यह परिवार अमेरिका रवाना होगा, जहां बच्चे को माता-पिता का भरपूर स्नेह और देखभाल मिलेगी।
जन्मजात स्वास्थ्य समस्या बनी परित्याग का कारण
यह बच्चा क्लेफ्ट पैलेट (कटे तालू) और क्लेफ्ट लिप (कटे होंठ) जैसी जन्मजात स्वास्थ्य समस्या के साथ पैदा हुआ था। जन्म के दो महीने बाद ही उसके जैविक माता-पिता ने उसे पेटलावद के सरकारी अस्पताल में लावारिस छोड़ दिया। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने उसे इंदौर की संजीवनी सेवा संगम संस्था को सौंप दिया, जहां उसका इलाज किया गया। संस्था ने न केवल उसका समुचित उपचार करवाया, बल्कि उसे स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उसी संस्था के प्रयासों से इस मासूम को एक नया परिवार मिल पाया है।
ये भी पढ़ें-इंदौर में बने रहे डिजिटल बस स्टाॅप, बसों की जानकारी और चार्जिंग की सुविधा भी रहेगी
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बच्चे के माता-पिता की तलाश रही विफल
संस्था द्वारा लंबे समय तक बच्चे के जैविक माता-पिता को खोजने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। झाबुआ जिले की बाल कल्याण समिति ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संजीवनी सेवा संगम संस्था को बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी। संस्था में कार्यरत महिला केयरटेकर्स ने उसे अपनी संतान की तरह पाला और उसे हर प्रकार की सुविधा और देखभाल प्रदान की। इस दौरान बच्चे की अच्छी परवरिश के साथ-साथ उसके मानसिक और शारीरिक विकास का भी विशेष ध्यान रखा गया।
अब अमेरिका में मिलेगा प्यार और सुरक्षित भविष्य
संस्था के अथक प्रयासों के कारण अब यह बच्चा एक अमेरिकी दंपति के परिवार का हिस्सा बनने जा रहा है। बुधवार को दंपति बच्चे के साथ अमेरिका के लिए रवाना होगा। वहां उसे प्यार, सुरक्षा और बेहतर अवसर मिलेंगे, जिससे उसका जीवन संवर सकेगा। यह कहानी समाज में परित्यक्त बच्चों के पुनर्वास की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो दर्शाती है कि यदि सही देखभाल और अवसर मिले तो कोई भी बच्चा उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ सकता है।
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जन्मजात स्वास्थ्य समस्या बनी परित्याग का कारण
यह बच्चा क्लेफ्ट पैलेट (कटे तालू) और क्लेफ्ट लिप (कटे होंठ) जैसी जन्मजात स्वास्थ्य समस्या के साथ पैदा हुआ था। जन्म के दो महीने बाद ही उसके जैविक माता-पिता ने उसे पेटलावद के सरकारी अस्पताल में लावारिस छोड़ दिया। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने उसे इंदौर की संजीवनी सेवा संगम संस्था को सौंप दिया, जहां उसका इलाज किया गया। संस्था ने न केवल उसका समुचित उपचार करवाया, बल्कि उसे स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उसी संस्था के प्रयासों से इस मासूम को एक नया परिवार मिल पाया है।
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बच्चे के माता-पिता की तलाश रही विफल
संस्था द्वारा लंबे समय तक बच्चे के जैविक माता-पिता को खोजने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। झाबुआ जिले की बाल कल्याण समिति ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संजीवनी सेवा संगम संस्था को बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी। संस्था में कार्यरत महिला केयरटेकर्स ने उसे अपनी संतान की तरह पाला और उसे हर प्रकार की सुविधा और देखभाल प्रदान की। इस दौरान बच्चे की अच्छी परवरिश के साथ-साथ उसके मानसिक और शारीरिक विकास का भी विशेष ध्यान रखा गया।
अब अमेरिका में मिलेगा प्यार और सुरक्षित भविष्य
संस्था के अथक प्रयासों के कारण अब यह बच्चा एक अमेरिकी दंपति के परिवार का हिस्सा बनने जा रहा है। बुधवार को दंपति बच्चे के साथ अमेरिका के लिए रवाना होगा। वहां उसे प्यार, सुरक्षा और बेहतर अवसर मिलेंगे, जिससे उसका जीवन संवर सकेगा। यह कहानी समाज में परित्यक्त बच्चों के पुनर्वास की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो दर्शाती है कि यदि सही देखभाल और अवसर मिले तो कोई भी बच्चा उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ सकता है।
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