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इंदौर: जूनियर डॉक्टर से रैगिंग के मामले में एचओडी समेत कई वरिष्ठ डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस
Sat, 26 Sep 2026 11:01 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sat, 26 Sep 2026 11:01 AM IST
सार
इंदौर के एमटीएच अस्पताल में जूनियर डॉक्टर से रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के बाद कॉलेज प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। एचओडी समेत कई डॉक्टरों को नोटिस जारी किए गए हैं और ड्यूटी का समय अधिकतम 12 घंटे तय किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज में बड़ी कार्रवाई।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर के एमटीएच अस्पताल में पीजी विद्यार्थी डॉ. सिम्मी यादव से रैगिंग और ड्यूटी से जुड़ी शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में विभाग के एचओडी डॉ. नीलेश दलाल सहित शिकायत से जुड़े वरिष्ठ डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसके साथ ही विभाग की व्यवस्था और निगरानी के लिए दो वरिष्ठ प्रोफेसरों को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने डॉक्टरों, पीजी विद्यार्थियों और सीनियर रेजिडेंट्स के साथ बैठक कर पूरे मामले सहित कार्यस्थल के माहौल, ड्यूटी रोस्टर, तनाव प्रबंधन और आपसी संवाद पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि रैगिंग को लेकर अस्पताल की जीरो टॉलरेंस नीति है। वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा कनिष्ठ डॉक्टरों को बुली करना, परेशान करना या किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार करना रैगिंग की श्रेणी में ही माना जाएगा।
तीन अलग-अलग कमेटियां गठित की
डीन ने जानकारी दी कि रैगिंग और ड्यूटी आवंटन से जुड़ी शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें पीड़िता के पिता और भाई द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतें भी शामिल हैं। मामला सामने आते ही जांच के लिए एंटी रैगिंग कमेटी सहित तीन अलग-अलग कमेटियां गठित कर दी गई हैं। इन कमेटियों की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासनिक कदम उठाते हुए विभाग के यूनिट हेड को रोटेशन नीति के तहत बदल दिया गया है और जिम्मेदारी दूसरे प्रोफेसर को सौंपी गई है, जो पीड़िता के मेंटर भी हैं। उन्हें विभाग की स्थिति सामान्य करने और ड्यूटी से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पीएसएम विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सलील साकल्ले और डॉ. बीना को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। दोनों अधिकारी प्रतिदिन विद्यार्थियों से संवाद कर स्थिति की रिपोर्ट डीन को सौंपेंगे।
ड्यूटी रोस्टर और मानसिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देश
बैठक में पीजी विद्यार्थियों और डॉक्टरों की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। डीन ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में डॉक्टरों की ड्यूटी 12 घंटे से अधिक नहीं होगी। सामान्य दिनों में 8 घंटे की ड्यूटी का रोस्टर लागू रहेगा, जबकि आपातकालीन परिस्थितियों में इसे अधिकतम 12 घंटे तक ही बढ़ाया जा सकेगा। चिकित्सा क्षेत्र की जिम्मेदारियों को देखते हुए डॉ. घनघोरिया ने काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि तनाव महसूस होने पर अपने सहकर्मियों, वरिष्ठों, परिवार या विशेषज्ञों से खुलकर संवाद करें। अस्पताल प्रशासन का उद्देश्य मरीजों के इलाज के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक कार्य वातावरण प्रदान करना है।
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क्या है मामला
एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमटीएच अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जूनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत डॉ. सिम्मी यादव को इंसुलिन का अत्यधिक सेवन करने के बाद गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन तक शिकायत भेजी गई थी। पीड़िता के भाई कुणाल यादव ने एनएमसी के एंटी रैगिंग सेल में शिकायत दर्ज कराते हुए वरिष्ठ डॉक्टरों पर रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, धमकाने और शैक्षणिक कार्य में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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तीन अलग-अलग कमेटियां गठित की
डीन ने जानकारी दी कि रैगिंग और ड्यूटी आवंटन से जुड़ी शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें पीड़िता के पिता और भाई द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतें भी शामिल हैं। मामला सामने आते ही जांच के लिए एंटी रैगिंग कमेटी सहित तीन अलग-अलग कमेटियां गठित कर दी गई हैं। इन कमेटियों की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासनिक कदम उठाते हुए विभाग के यूनिट हेड को रोटेशन नीति के तहत बदल दिया गया है और जिम्मेदारी दूसरे प्रोफेसर को सौंपी गई है, जो पीड़िता के मेंटर भी हैं। उन्हें विभाग की स्थिति सामान्य करने और ड्यूटी से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पीएसएम विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सलील साकल्ले और डॉ. बीना को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। दोनों अधिकारी प्रतिदिन विद्यार्थियों से संवाद कर स्थिति की रिपोर्ट डीन को सौंपेंगे।
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ड्यूटी रोस्टर और मानसिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देश
बैठक में पीजी विद्यार्थियों और डॉक्टरों की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। डीन ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में डॉक्टरों की ड्यूटी 12 घंटे से अधिक नहीं होगी। सामान्य दिनों में 8 घंटे की ड्यूटी का रोस्टर लागू रहेगा, जबकि आपातकालीन परिस्थितियों में इसे अधिकतम 12 घंटे तक ही बढ़ाया जा सकेगा। चिकित्सा क्षेत्र की जिम्मेदारियों को देखते हुए डॉ. घनघोरिया ने काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि तनाव महसूस होने पर अपने सहकर्मियों, वरिष्ठों, परिवार या विशेषज्ञों से खुलकर संवाद करें। अस्पताल प्रशासन का उद्देश्य मरीजों के इलाज के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक कार्य वातावरण प्रदान करना है।
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क्या है मामला
एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमटीएच अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जूनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत डॉ. सिम्मी यादव को इंसुलिन का अत्यधिक सेवन करने के बाद गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन तक शिकायत भेजी गई थी। पीड़िता के भाई कुणाल यादव ने एनएमसी के एंटी रैगिंग सेल में शिकायत दर्ज कराते हुए वरिष्ठ डॉक्टरों पर रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, धमकाने और शैक्षणिक कार्य में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
