इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट की सफलता के लिए इंटर कनेक्टिविटी सबसे बड़ी चुनौती
मेट्रो निर्माण पर ही पूरा ध्यान, लोग मेट्रो तक कैसे पहुंचेंगे, इसकी कोई तैयारी नहीं, इंटर कनेक्टिविटी के अभाव में अधिक समय लगने से लोग अपनी गाड़ी से जाना करेंगे पसंद
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इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट की सफलता इसी बात पर निर्भर करती है कि लोगों को घर से मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने और फिर स्टेशन से दूसरा पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिलने की सुविधा कितनी बेहतर होगी। यदि इंटर कनेक्टिविटी कमजोर रही तो लोगों को अपने घर या ऑफिस तक पहुंचने में समय बहुत लगेगा और वे मेट्रो के बजाय अपनी गाड़ी से जाना ही पसंद करेंगे। शहर के ट्रैफिक, ट्रांसपोर्टेशन और डवलपमेंट के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और प्रशासन को मेट्रो बनाने के साथ-साथ इंटर कनेक्टिविटी पर भी ध्यान देना होगा वरना प्रोजेक्ट की सफलता के सामने प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाएगा। हाल ही में शहर में यातायात पर आयोजित एक कार्यक्रम में भी यह प्रमुख मुद्दा उठा जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने जल्द से जल्द हल निकालने की बात कही।
अधिक समय लगा तो लोग मेट्रो में नहीं जाएंगे
शहर के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेट्रो स्टेशन तक जाने में किसी व्यक्ति को दो से तीन बार गाडिय़ां बदलना पड़ी और इसके बाद कुछ किमी पैदल भी चलना पड़ा तो वह मेट्रो में जाना बिल्कुल भी पसंद नहीं करेगा। इसका हल यही है कि यदि वह मेट्रो स्टेशन जाना चाहता है तो उसे उसके घर या ऑफिस के आसपास से मेट्रो स्टेशन के लिए सीधे एक वाहन मिल जाए। यह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का होगा तो उसे अधिक सुविधा होगी। इसलिए इस तरह की कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर जोर देना होगा।
क्यों उठ रहा यह सवाल
मेट्रो में पब्लिक आवाजाही पसंद करेगी या नहीं करेगी यह सवाल बार बार इसलिए उठ रहा है क्योंकि मेट्रो सर्कल डिजाइन में तैयार की गई है और इसकी डिजाइन पर शुरू से ही सवाल उठाया गया है। सर्कल डिजाइन की वजह से मेट्रो शहर के बाहर वाले रास्तों पर ही चलेगी और बीच के पूरे शहर के लोगों को मेट्रो तक पहुंचने के लिए बहुत अधिक समय देना पड़ेगा। इस वजह से कई विशेषज्ञों ने मेट्रो के रेडियल डिजाइन पर भी जोर दिया था जिस पर शुरू में सभी की सहमति भी बनी लेकिन बाद में इसे बदलकर सर्कल डिजाइन में कर दिया गया।
रेडियल डिजाइन बदलकर सर्कल की, इससे नुकसान ज्यादा
2013 में मेट्रो की रेडियल डिजाइन थी। यह शहर को चार जगह से क्रॉस कर रही थी। इससे शहर की अधिकांश जनता मेट्रो स्टेशन तक आसानी से पहुंच जाती। इसके बाद अचानक सर्कल डिजाइन आ गया। इससे मेट्रो शहर के बाहर के क्षेत्रों से होते हुए गुजरेगी और मध्य में रहने वाली बड़ी आबादी मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच ही नहीं पाएगी। इसका हल यही है कि शहर के मध्य क्षेत्रों में बीआरटीएस या अन्य माध्यमों से ऐसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट विकल्प तैयार करना होंगे जो लोगों को उनके घर या ऑफिस के आसपास तक पहुंचा पाएं। इसमें भी यदि उन्हें ऑटो या टैक्सी जैसे महंगे विकल्प पर जाना पड़ेगा तो वह खुद की गाड़ी से जाना ही पसंद करेंगे। इसलिए इसमेंं पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम ही तैयार करना होगा।
- अतुल सेठ, सीनियर आर्किटेक्ट, अतुल शेठ
जल्द इस पर भी शुरू होगा काम
अभी पूरा ध्यान मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण पर है। इसके साथ इन सभी विषयों पर चर्चा जारी है। सिटी इंटर कनेक्टिविटी पर भी जल्द ही काम किया जाएगा। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि शहरवासी मेट्रो में आवाजाही को प्राथमिकता दें। इसके लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
- डॉ. इलैया राजा टी, कलेक्टर, इंदौर
