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Indore: महिला आरक्षण बिल अटका तो इंदौर में मैराथन हुई निरस्त, निगम के सम्मेलन में निंदा प्रस्ताव

Sat, 18 Apr 2026 02:08 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Sat, 18 Apr 2026 02:08 PM IST
सार

महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन बिल के मंजूर होने की उम्मीद में इंदौर में मैराथन आयोजित की गई,जो बिल के अटकने से निरस्त हो गई। भाग लेने आए कई लोगों को वापस लौटना पड़ा। 

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Indore: Marathon cancelled in Indore as women's reservation bill stalled, condemnation motion passed at corpor
बिल अटकने के विरोध में काले कपड़े पहन कर आए मेयर और पार्षद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन का बिल मंजूर नहीं हो पाया। इस बिल के मंजूर होने की उम्मीद के साथ इंदौर में एक मैराथन आयोजित की गई थी, लेकिन बिल के अटकने के कारण सारी तैयारियां धरी रह गईं। मैराथन निरस्त हो गई और कई धावकों को उल्टे पांव अपने घर लौटना पड़ा।

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इसके अलावा नगर निगम परिषद हाल में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विशेष सम्मेलन आयोजित किया गया था। बिल मंजूर नहीं होने के बावजूद सम्मेलन तो आयोजित किया गया, लेकिन उसमें बहुमत के आधार पर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। सम्मेलन में कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच इस बिल को लेकर काफी देर तक बहस हुई और कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी। भाजपा की महिला पार्षद काले कपड़े पहनकर आई थीं।

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मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि 2026 में देश की जनसंख्या डेढ़ सौ करोड़ है, जिनमें से 75 करोड़ महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए 545 सीटों को बढ़ाकर 850 सीटें करने का संविधान संशोधन सदन में आया था। वह केवल इसलिए गिर गया क्योंकि समाजवादी पार्टी ने 68 प्रतिशत से ज्यादा अपने परिवार को आरक्षण दे रखा है। कांग्रेस ने पचास प्रतिशत से ज्यादा दे रखा है। टीएमसी ने शत-प्रतिशत आरक्षण दे रखा है, लेकिन महिला आरक्षण की बात आई तो उसका विरोध किया। देश में जब भी कोई ऐतिहासिक काम करने की बात आई, तो कांग्रेस ने उसका विरोध किया है।

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नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि भाजपा की कहीं भी महिला वर्ग को सशक्त करने की सोच नहीं है। जो कानून बन चुका है, उसे लागू करने में भाजपा सरकार पीछे क्यों हट रही है? 2026 में जनगणना 2027 तक खत्म होगी। एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग की महिलाओं को आरक्षण कैसे मिलेगा, यह भी बिल में सुनिश्चित करना पड़ेगा, जो इस बिल में नहीं है।

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