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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Malegaon blast acquitted Shyam Sahu said- they used to torture me by keeping me in a cold room of seve

Indore:मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी श्याम साहू बोले- सात-आठ डिग्री के ठंडे कमरे में रखकर प्रताड़ना देते थे

Tue, 05 Aug 2025 06:17 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 05 Aug 2025 06:17 PM IST
सार

श्याम ने बताया कि महाराष्ट्र में वर्ष 2008 में चुनाव थे। वर्ग विशेष के वोट पाने के लिए भगवा आतंकवाद की फर्जी कहानी लिखी गई।  अफसर चाहते थे कि संघ के नेता, हिन्दू समाज के लिए काम करने वाले नेतागणों का नाम हम लें, ताकि उन्हें फंसा सके।

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Indore: Malegaon blast acquitted Shyam Sahu said- they used to torture me by keeping me in a cold room of seve
श्याम साहू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मालेगांव बम धमाका मामले में बरी हुए इंदौर के श्याम साहू ने अमर उजाला से चर्चा में खुद की गिरफ्तारी और प्रताड़ना से लेकर निर्दोष साबित होने तक का पूरा किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि मुझे गिरफ्तार किया गया तो पता भी नहीं था कि किस केस में मुझे ले जा रहे हैं। महाराष्ट्र एटीएस के मुंबई दफ्तर में मुझे ले जाया गया और यातनाएं देना शुरू कर दिया गया। मुझे जिस कमरे में रखा था, उसके पास के कमरे में महिला के चीखने और रोने की आवाजें आती थीं। दूसरे दिन जब हमारा सामना कराया गया तो पता चला कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भी केस में फंसाया गया है। मारपीट के कारण दीदी से तो पैर पर खड़े होते भी नहीं बन रहा था। 

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चक्की के पट्टे से मारते थे हमें
साहू ने एटीएस हिरासत के दिनों को याद करते हुए कहा कि हमारे कपड़े उतार दिए जाते थे। सिर्फ अंतरवस्त्र में रखा जाता था। चक्की के पट्टे से पैर के तलवों पर मारते थे और बड़े लठ्ठ जांघों के बीच रखे जाते थे और वजनदार लोग लठ्ठ पर पैर रखकर उसे रोल करते थे, लगता था कि हमारी चमड़ी फट जाएगी। कांच के कमरे में रखा जाता था। कभी कभी मन में ख्याल आने लगते थे कि जो गुनाह हमने किया नहीं है, वह भी इस यातना से बचने के लिए कबूल कर लें, लेकिन हम झूठ के आगे नहीं झुके। एसी वाले कमरे का तापमान पांच, छह डिग्री पर रखकर बेहद ठंडे कमरे में हमें घंटों रखा जाता था। कांच के दूसरी तरफ से हमें अफसर देखते थे। हालत खराब होने पर वे हमारे पास आते थे और बोलते थे कि जो हम बोल रहे हैं, वह कबूल कर लो।

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चुनाव के कारण फंसाया
श्याम साहू ने बताया कि महाराष्ट्र में वर्ष 2008 में चुनाव थे। राजस्थान में उसके बाद चुनाव थे। वर्ग विशेष के वोट पाने के लिए भगवा आतंकवाद की फर्जी कहानी लिखी गई। एटीएस अफसर चाहते थे कि संघ के नेता, हिंदू समाज के लिए काम करने वाले नेतागणों के हम नाम लें, ताकि इस केस में उन्हें फंसाया जा सके और चुनाव में कांग्रेस को राजनीतिक लाभ मिल सके, लेकिन उनके पास हमारे खिलाफ ठोस सबूत नहीं थे। गवाह भी डरा धमका कर बनाए गए थे। कोर्ट में जब केस पहुंचा तो कमजोर साक्ष्य और गवाह पलटने से वह कमजोर हो गया। श्याम ने कहा कि कोर्ट में केस एनआईए ने लड़ा। अब इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में जाए या नहीं, यह सरकार के विवेक में निर्भर करता है। हमारे खिलाफ सारे सबूत झूठे हैं।

विजयवर्गीय को चुप कराने के लिए बोला था
श्याम साहू ने कहा कि जब हमें गिरफ्तार किया गया था तो संगठन और संघ के पदाधिकारियों की अपनी मजबूरियां रही होंगी। मैं उस पर कुछ ज्यादा बोल नहीं सकता, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सबके मना करने के बावजूद मेरे घर पहुंचे थे। उसके बाद कई रिश्तेदार हमारे परिवार से जुड़ने लगे। उन्हें लगने लगा कि मैंने कोई गलती नहीं है। जब विजयवर्गीय हमारे पक्ष में बयान दे रहे थे तो एटीएस चीफ हेमंत करकरे ने मुझसे कहा था कि ये आदमी कौन है, उसे चुप कराओ। बहुत बोल रहा है, तो मैंने कहा कि आप पढ़े-लिखे हो, वे प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री हैं। सम्मानीय व्यक्ति हैं। यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगी उस दिन लाॅकअप में मेरी खूब पिटाई की गई थी।

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