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इंदौर: नामांतरण घोटाले से सबक, अब लागू की नई व्यवस्था, लोगों को मिलेगी लेजर की प्रति

Thu, 03 Sep 2026 12:44 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Thu, 03 Sep 2026 12:44 PM IST
सार

इंदौर नगर निगम में सामने आए नामांतरण घोटाले ने सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह कर्मचारियों ने एक साल में 354 संपत्तिकर खातों में नाम बदल दिए। ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए निगम अब नामांतरण के बाद आवेदक को लेजर की प्रति भी देगा।

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Indore: Lessons learned from the name transfer scam, new system implemented, people will get a copy of the led
इंदौर नगर निगम में घोटाला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर नगर निगम में हुए नामांतरण घोटाले के सामने आने के बाद 6 कर्मचारियों के खिलाफ अफसरों ने एमजी रोड थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। उधर, निगम ने नामांतरण के लिए नई व्यवस्था लागू की है। नामांतरण के बाद आवेदक को लेजर की प्रति भी मुहैया कराई जाएगी, ताकि उसमें दर्ज संपत्ति, संपत्तिकर खाते और नामांतरण को देख सके और गलती पाए जाने पर उसमें तत्काल सुधार भी करा सके। यह व्यवस्था दो-तीन दिन में लागू हो जाएगी।

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नगर निगम में छह कर्मचारियों ने मिलकर एक साल के भीतर 354 संपत्तिकर खातों में नाम बदले। इसके लिए तत्कालीन उपायुक्तों की आईडी का इस्तेमाल किया गया। बताते हैं कि कर्मचारियों को नामांतरण के काम दलाल लाकर देते थे।
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पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। कर्मचारियों ने संपत्तिकर रिकॉर्ड में भी बदलाव कर दिए, जबकि ये सरकारी दस्तावेज होते हैं। पुलिस ने इस मामले में रियाज अंसारी, संजय यादव, सौरभ तिवारी, संतोष मालवीय, अजय सोलंकी और सागर पंवार के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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इंदौर में 50 से ज्यादा कॉलोनियों की लीज नगर निगम देता है। इसके अलावा इंदौर विकास प्राधिकरण और मप्र गृह निर्माण मंडल की कॉलोनियां भी इंदौर में हैं। नामांतरण बैंक से लोन लेने, संपत्ति बेचने सहित अन्य कामों के लिए होते हैं। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि एक साथ इतने प्रकरणों में नामांतरण करने के पीछे आखिर क्या वजह हो सकती है। नई व्यवस्था के तहत नामांतरण के लेजर की प्रति मिलने से आवेदकों के पास भी सरकारी दस्तावेज रहेगा, जो भविष्य में मिलान करने के काम आएगा।

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