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Indore: हाईकोर्ट का फैसला- जैन समाज के वैवाहिक मामलों का निपटारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत होगा
Mon, 24 Mar 2025 08:30 PM IST
अभिषेक चेंडके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अभिषेक चेंडके
Updated Mon, 24 Mar 2025 08:30 PM IST
सार
कुटुंब न्यायालय के फैसले को नीतेश सेठी ने चुनौति देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। संविधान में हिंदू की परिभाषा का हवाला देते हुए कहा गया कि उसमें जैन भी शामिल है। उत्तराधिकारी अधिनियम में भी जैन धर्मावलंबियों को शामिल किया गया है।
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हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ही जैन समाज से जुड़े वैवाहिक मामलों की सुनवाई और निराकरण भविष्य में कोर्ट में होगा। मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कुटुंब न्यायालय के एक फैसले को निरस्त कर दिया। कुटुंब न्यायालय ने एक जैन दंपती द्वारा तलाक के लिए प्रस्तुत याचिका को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि केंद्र सरकार द्वारा जैन समाज को अल्पसंख्यक समुदाय घोषित किया गया है। इसकी सुनवाई हिंदू विवाह अधिनियम के तहत नहीं हो सकती है।
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लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब जैन समाज के वैवाहिक मामले हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ही सुने जाएंगे। निचली कोर्ट ने इस प्रकरण में यह निष्कर्ष निकाला कि विवाह अधिनियम के प्रावधान जैन समुदाय पर लागू नहीं होते, यह गंभीर त्रुटि है। जैन समुदाय को 10 वर्ष पहले अल्पसंख्यक दर्जा मिला हो, लेकिन उन्हें किसी भी कानून के तहत आवेदन करने का पूरा अधिकार है।
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हिंदू की परिभाषा में जैन शामिल
कुटुंब न्यायालय के फैसले को नीतेश सेठी ने चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट में संविधान में हिंदू की परिभाषा का हवाला देते हुए कहा गया कि उसमें जैन भी शामिल है। उत्तराधिकारी अधिनियम में भी जैन धर्मावलंबियों को शामिल किया गया है।
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अल्पसंख्यकों में बौद्ध, जैन, सिख शामिल हैं और इन सभी के वैवाहिक विवाद हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ही निराकृत होते रहे हैं, इसलिए हिंदू अधिनियम के तहत ही जैन समाज के वैवाहिक मामलों की सुनवाई होना चाहिए। हाईकोर्ट ने कुटुंब न्यायालय के फैसले को निरस्त किया और आदेश दिया कि जैन समाज से जुड़े मामलों की सुनवाई हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत हो।
फैसले का स्वागत
जैन काॅफ्रेंस युवा शाखा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक जैन टीनू ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला न केवल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है, बल्कि जैन समाज के हितों की भी रक्षा करता है।
