Indore: पांच माह में जलेगा यूका का 336 टन कचरा, फिर राख होगी होगी लैंडफील
पहले दिन जलाए गए कचरे से उत्सर्जित काबर्नमोनो आक्साईड, कार्बनडाई आक्साईड हाईड्रोजन फ्लोराईड, हाईड्रोजन क्लोराईड, सल्फरडाई ऑक्साईड, नाईट्रोजन ऑक्साईड की मात्रा की जांच की गई है। प्रदूषण मंडल ने तय मानकों से गैसों का उर्त्सजन काम होना पाया है।
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पीथमपुर में दस दिन में तीन टन कचरे जलकर राख होगा। पहले दिन वातावरण में तय मानकों के हिसाब से ही गैसों का उत्सर्जन हुआ। कचरे के निपटन के दौरान वातावरण पर नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला। इसके चलते अब 30 टन के बाद में कचरे को जलाने का सिलासिला जारी रहेगा। संभागायुक्त दीपक सिंह ने इसकी पुष्टि की है। 337 टन कचरे को जलाने के लिए चार से पांच माह का समय लगेगा।
भोपाल से लाए गए यूनियन कार्बाइड के कचरे में सेविन रेसिड्यू नेप्थाल, सेमीप्रोसेस्ड पेस्टीसाइट और परिसर की मिट्टी लाई गई है। पांचों अपशिष्ठों को रखा गया है। पांचों अपशिष्ठ को मिलाकर कुल मात्रा 10 टन जलाई जाएगी।
पहले दिन जलाए गए कचरे से उत्सर्जित काबर्नमोनो आक्साईड, कार्बनडाई आक्साईड हाईड्रोजन फ्लोराईड, हाईड्रोजन क्लोराईड, सल्फरडाई ऑक्साईड, नाईट्रोजन ऑक्साईड की मात्रा की जांच की गई है। प्रदूषण मंडल ने तय मानकों से गैसों का उर्त्सजन काम होना पाया है।
हर घंटे चल रहा 135 किलोग्राम कचरा
रामकी के कचरा भस्मक में हर घंटे 135 किलो यूका कचरा जल रहा है। 800 से 1200 डिग्री तापमान बरकार रखने के लिए हर घंटे 600 लीटर डीजल की खपत पहले दिन अाई है। 9-9 किलो के 30 बैगों को दहन कक्षों में डाला जा रहा है। इसके बाद जो राख बचेगी, उसे परिसर में ही लैंडफील किया जाएगा। इसके लिए खोदे गए खड्ढे में विशेष प्रकार की प्लास्टिक बिछाई गई है, ताकि राख के कारण मिट्टी अौर भूजल प्रभावित न हो।
तय मात्रा के अनुसार निकल रही गैसें
कचरा जलाने के दौरान जो गैसें वातावरण में फैल रही है। वह निर्धारित मात्रा से कम उत्सर्जित हो रही है। पर्यावरणविद अेापी जोशी का कहना है कि भले ही कचरा 40 वर्षों से फैक्टरी में पड़ा हो, लेकिन उसमें कई रसायन हानिकारक भी है। कचरे को जलाने के दौरान गैसों का उत्सर्जन तय मानकों के हिसाब से हो रहा है।
कचरा लगातार जलता रहेगा
संभागायुक्त दीपक सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार दस-दस टन के तीन ट्रायल होना है। पहले दिन कचरे के निष्पादन के दौरान कोई नकारात्मक प्रभाव नजर नहीं आया। गैसों का भी वातावरण में घातक असर नहीं देखा गया। अब कचरे का निपटान लगातार जारी रहेगा।
