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IIT: फसलों की बीमारी और कीड़ों की पहचान करने वाला ऐप बना रहा IIT, खेती को बेहतर बनाने के लिए जुटे 14 इनोवेटर्स
Sat, 06 Jan 2024 06:46 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 06 Jan 2024 06:46 PM IST
सार
आईआईटी IIT इंदौर में आयोजित हुआ रूरल इनोवेटर्स कॉन्क्लेव, कई ऐप विकसित करने के अंतिम चरण में है आईआईटी इंदौर
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आईआईटी में कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किए गए माडल।
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
आईआईटी IIT इंदौर में 5 और 6 जनवरी, 2024 को रूरल इनोवेटर्स कॉन्क्लेव का आयोजित किया गया। इसमें इनोवेटर्स और उद्यमियों के एक बड़े समूह को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, उसके माध्यम से सहायता करने और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपने नवाचारों को लेकर विचार साझा करने का एक मंच प्रदान किया गया। इस दौरान, प्रतिभागियों ने कॉन्क्लेव में अपने उत्पाद प्रदर्शित किए। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के सामने आने वाली समस्याओं से अवगत कराया और उनके लिए संभावित समाधान बताए। कॉन्क्लेव में ग्रामीण इनोवेटर्स के सामने आने वाली चुनौतियों और आने वाले 10 वर्षों में अपेक्षित ग्रामीण इनोवेशन पर चर्चा शामिल रही। इसके अलावा, इस अवसर पर 14 से अधिक इनोवेटर्स ने भी अपने इनोवेशन का प्रदर्शन किया। यह कॉन्क्लेव ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केंद्र, आईआईटी इंदौर द्वारा विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड के सहयोग से आयोजित किया गया।
कई संगठनों और संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा आईआईटी
आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, आईआईटी इंदौर ग्रामीण भारत के सामने आने वाली समस्या की पहचान करने के लिए आस-पास के संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। हम सहभागिता, सतत, पारदर्शी और लैंगिक-संवेदनशील प्रक्रियाओं को अपनाकर लोगों की जीवन स्थितियों को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। उचित और अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास और अनुप्रयोग के माध्यम से यह काम किया जाएगा।
भूमिगत जल प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
सुहास जोशी ने कहा कि हम कई ऐप विकसित करने के अंतिम चरण में हैं, जो किसानों को भू-जल प्रबंधन और सोयाबीन के पौधों और आलू की फसलों में बीमारी और कीड़ों की पहचान करने में काफी मदद करेंगे। जनजातीय आजीविका के लिए तकनीकी नवाचार कार्यक्रम 'तितली' के तहत, हम ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को समझने और उनके सामने आने वाली समस्याओं का समाधान विकसित करने के लिए क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। हम उनकी जरूरतों को समझने और व्यवहार्य समाधान खोजने के लिए इंदौर और मध्य प्रदेश के आस-पास के उद्योगों के साथ भी मिलकर काम कर रहे हैं।
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ग्रामीण गतिविधियों के आसान इंटरफेस बनाने की तैयारी
ग्रामीण विकास और प्रौद्योगिकी केंद्र, आईआईटी इंदौर का लक्ष्य कौशल विकास, लघु-स्तरीय उद्यमिता, मूल्य वर्धित उत्पादों का विकास, लैंगिक विविधता के लिए पहुंच तथा अवसर और विभिन्न ग्रामीण गतिविधियों से जुड़े ई-प्लेटफॉर्म लॉन्च करने हेतु उपयोगकर्ता के लिए आसान इंटरफेस विकसित करना है, जिनके लिए ग्रामीण उद्यमियों को प्रौद्योगिकी तक आसान पहुंच के साथ अपने उत्पादों को विकसित करने और बेचने में मदद करने और कौशल तथा आउटरीच के बीच अंतर को सुविधाजनक बनाने के लिए बड़े समुदायों तक पहुंच की आवश्यकता होती है।
इस अवसर पर, उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर सुहास जोशी, प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार, सीआरडीटी आईआईटी दिल्ली, डॉ. देबप्रिया दत्ता, प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार - सीड डिवीजन, डीएसटी, डॉ. नेहा गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार, राज्य नीति और योजना आयोग, मध्य प्रदेश , प्रोफेसर पारुल ऋषि, आईआईएफएम भोपाल, श्री सिद्धार्थ जैन, सीईओ, इंदौर जिला पंचायत, भारती ठाकुर, सचिव, नर्मदा, प्रोफेसर संदीप चौधरी, डीन (प्रशासन) और डॉ. देबायन सरकार, प्रमुख सीआरडीटी ने भाग लिया।
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कई संगठनों और संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा आईआईटी
आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, आईआईटी इंदौर ग्रामीण भारत के सामने आने वाली समस्या की पहचान करने के लिए आस-पास के संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। हम सहभागिता, सतत, पारदर्शी और लैंगिक-संवेदनशील प्रक्रियाओं को अपनाकर लोगों की जीवन स्थितियों को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। उचित और अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास और अनुप्रयोग के माध्यम से यह काम किया जाएगा।
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भूमिगत जल प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
सुहास जोशी ने कहा कि हम कई ऐप विकसित करने के अंतिम चरण में हैं, जो किसानों को भू-जल प्रबंधन और सोयाबीन के पौधों और आलू की फसलों में बीमारी और कीड़ों की पहचान करने में काफी मदद करेंगे। जनजातीय आजीविका के लिए तकनीकी नवाचार कार्यक्रम 'तितली' के तहत, हम ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को समझने और उनके सामने आने वाली समस्याओं का समाधान विकसित करने के लिए क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। हम उनकी जरूरतों को समझने और व्यवहार्य समाधान खोजने के लिए इंदौर और मध्य प्रदेश के आस-पास के उद्योगों के साथ भी मिलकर काम कर रहे हैं।
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ग्रामीण गतिविधियों के आसान इंटरफेस बनाने की तैयारी
ग्रामीण विकास और प्रौद्योगिकी केंद्र, आईआईटी इंदौर का लक्ष्य कौशल विकास, लघु-स्तरीय उद्यमिता, मूल्य वर्धित उत्पादों का विकास, लैंगिक विविधता के लिए पहुंच तथा अवसर और विभिन्न ग्रामीण गतिविधियों से जुड़े ई-प्लेटफॉर्म लॉन्च करने हेतु उपयोगकर्ता के लिए आसान इंटरफेस विकसित करना है, जिनके लिए ग्रामीण उद्यमियों को प्रौद्योगिकी तक आसान पहुंच के साथ अपने उत्पादों को विकसित करने और बेचने में मदद करने और कौशल तथा आउटरीच के बीच अंतर को सुविधाजनक बनाने के लिए बड़े समुदायों तक पहुंच की आवश्यकता होती है।
इस अवसर पर, उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर सुहास जोशी, प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार, सीआरडीटी आईआईटी दिल्ली, डॉ. देबप्रिया दत्ता, प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार - सीड डिवीजन, डीएसटी, डॉ. नेहा गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार, राज्य नीति और योजना आयोग, मध्य प्रदेश , प्रोफेसर पारुल ऋषि, आईआईएफएम भोपाल, श्री सिद्धार्थ जैन, सीईओ, इंदौर जिला पंचायत, भारती ठाकुर, सचिव, नर्मदा, प्रोफेसर संदीप चौधरी, डीन (प्रशासन) और डॉ. देबायन सरकार, प्रमुख सीआरडीटी ने भाग लिया।
