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Khargone: आस्था ग्राम ट्रस्ट की संचालक अनुराधा का निधन, दिव्यांग बच्चों की सेवा-शिक्षा में लगा दिया अपना जीवन
Sun, 26 Mar 2023 05:00 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 26 Mar 2023 05:00 PM IST
सार
रिटायर्ड मेजर अनुराधा जैन का रविवार को हृदयाघात से निधन हो गया। सेना की मेडिकल कोर में अपना सेवाकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त मेजर अनुराधा ने खरगोन जिले के आदिवासी अंचल के दिव्यांग बच्चों की सेवा व शिक्षा में अपना बचा जीवन लगा दिया।
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रिटायर्ड मेजर अनुराधा जैन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
खरगोन के आस्था ग्राम ट्रस्ट की संचालक रिटायर्ड मेजर अनुराधा जैन का रविवार को हृदयाघात से निधन हो गया। वे 63 वर्ष की थीं। उनकी अंत्येष्टि सोमवार सुबह खरगोन में होगी।
सेना की मेडिकल कोर में अपना सेवाकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त मेजर अनुराधा ने खरगोन जिले के आदिवासी अंचल के दिव्यांग बच्चों की सेवा व शिक्षा में अपना बचा जीवन लगा दिया। वे इंदौर के प्रतिष्ठित व संपन्न परिवार की बेटी होने के बावजूद एकदम जमीनी व संघर्षपूर्ण जीवन जीती थीं। उन्हें कभी पद, प्रतिष्ठा व मान, सम्मान की भूख नहीं रही। निर्जन आस्था ग्राम को उन्होंने एक चैतन्य भूमि का रूप दिया जहां 'मानव सेवा ही माधव सेवा' के रूप में सर्वोपरि रही। अंचल के दिव्यांग बच्चों का जीवन संवारने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। सामाजिक जीवन की शुरुआत उन्होंने युवावस्था में इंदौर के अभ्यास मंडल व युवा जगत संगठन से की थी। समाज व युवाओं तथा वंचित बच्चों के लिए कुछ करने की कसक हमेशा उनके मन में रहती थी। शासन की मदद के बगैर उन्होंने अपना मिशन पूरा किया और आस्था ग्राम को एक आदर्श स्वैच्छिक संस्था के रूप में खड़ा किया।
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सेना की मेडिकल कोर में अपना सेवाकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त मेजर अनुराधा ने खरगोन जिले के आदिवासी अंचल के दिव्यांग बच्चों की सेवा व शिक्षा में अपना बचा जीवन लगा दिया। वे इंदौर के प्रतिष्ठित व संपन्न परिवार की बेटी होने के बावजूद एकदम जमीनी व संघर्षपूर्ण जीवन जीती थीं। उन्हें कभी पद, प्रतिष्ठा व मान, सम्मान की भूख नहीं रही। निर्जन आस्था ग्राम को उन्होंने एक चैतन्य भूमि का रूप दिया जहां 'मानव सेवा ही माधव सेवा' के रूप में सर्वोपरि रही। अंचल के दिव्यांग बच्चों का जीवन संवारने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। सामाजिक जीवन की शुरुआत उन्होंने युवावस्था में इंदौर के अभ्यास मंडल व युवा जगत संगठन से की थी। समाज व युवाओं तथा वंचित बच्चों के लिए कुछ करने की कसक हमेशा उनके मन में रहती थी। शासन की मदद के बगैर उन्होंने अपना मिशन पूरा किया और आस्था ग्राम को एक आदर्श स्वैच्छिक संस्था के रूप में खड़ा किया।
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