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Dhar Bhojshala: मुस्लिम पक्ष के वकील ने मांगी भोजशाला का सर्वे करने वाले अफसरों के प्रति परीक्षण की अनुमति

Mon, 04 May 2026 08:23 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Mon, 04 May 2026 08:23 PM IST
सार

भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के वकील के आवेदन पर कोर्ट ने फैसला नहीं लिया। उन्होंने भोजशाला करने वाले अधिकारियों के प्रति परीक्षण की अनुमति मांगी थी।

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Dhar Bhojshala: The lawyer of the Muslim side sought permission to cross-examine the officers who surveyed the
धार भोजशाला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर हाईकोर्ट में जारी धार भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के वकील ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उन अधिकारियों का प्रतिपरीक्षण करने की अनुमति मांगी, जिन्होंने कोर्ट के निर्देश पर भोजशाला का सर्वे किया। उनकी इस मांग पर हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता के वकील ने आपत्ति ली और 1 अप्रैल को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें इस तरह की अनुमति को स्वीकार नहीं किया गया था।

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कोर्ट ने भी मौलाना सोसायटी के वकील का आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया और कहा कि यह केस की प्रकृति पर निर्भर करता है,क्योकि प्रति परीक्षण किमिनल केस में होता है। इसके बाद वकील ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद एएसआई ने भोजशाला में किए गए सर्वे की वीडियोग्राफी का एक्सेस नहीं दिया। कोर्ट ने इस बारे में अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने बताया कि वीडियोग्राफी गूगल ड्राइव पर उपलब्ध करा दी गई है। कोर्ट ने आईटी सेक्शन को आदेश दिए कि प्रतिवादी के वकील को वीडियो दिखाने की व्यवस्था की जाए। अब वकील वीडियोग्राफी पर अपनी लिखित आपत्ति 7 मई को दर्ज करा सकेंगे।

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प्रतिवादी क्रमांक 8 के दोनों अधिवक्तागण वीडियोग्राफी पर अपनी लिखित आपत्ति 7 मई 2026 तक प्रस्तुत कर सकेंगे। अब मंगलवार को एएसआई के अधिवक्ता सुनील जैन और सलेक चंद जैन की ओर से दिनेश राजभर अपना पक्ष रखेंगे।

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आपको बता दें कि कोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने 98 दिनों तक भोजशाला का सर्वे किया और अपनी 2,000 से अधिक पेज की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। सर्वे में बताया गया कि भोजशाला का निर्माण 12वीं शताब्दी के आसपास हुआ, जब मालवा में मुगलों का आगमन नहीं हुआ था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष के वकील ने सर्वे पर सवाल उठाए हैं और उन्होंने सर्वे के वीडियो उपलब्ध कराने की मांग की थी।

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