एमपी: इंदौर में साइबर ठगी के छह मामलों में कार्रवाई, 4.90 लाख रुपये की पूरी रकम पीड़ितों को वापस
इंदौर क्राइम ब्रांच की साइबर टीम ने छह साइबर ठगी मामलों में कार्रवाई कर पीड़ितों की 4.90 लाख रुपये की पूरी रकम वापस कराई। ठगों ने फर्जी APK के जरिए मोबाइल अपडेट, KYC, चालान, बिजली बिल और गेमिंग के नाम पर ठगी की।
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साइबर ठगी के मामलों में कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच की साइबर टीम ने छह पीड़ितों की ठगी गई कुल 4 लाख 90 हजार रुपये की राशि वापस कराने में सफलता हासिल की है। साइबर ठगों ने अलग-अलग बहानों से पीड़ितों को व्हाट्सऐप और मैसेज के जरिए फर्जी APK फाइल भेजकर उसे डाउनलोड और इंस्टॉल करवाया। इसके बाद मोबाइल और बैंकिंग गतिविधियों का दुरुपयोग कर पीड़ितों के खातों से रकम निकाल ली गई।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, एक महिला एडवोकेट को मोबाइल अपडेट करने के नाम पर फर्जी लिंक भेजा गया था। APK इंस्टॉल करने के बाद उसके खाते से 1 लाख 30 हजार रुपये की ठगी हुई। इसी तरह एक निजी कर्मचारी को ट्रैफिक चालान के नाम पर APK भेजकर उसके खाते से 45 हजार रुपये निकाल लिए गए।
एक अन्य पीड़ित को बैंक KYC अपडेट करने के बहाने APK इंस्टॉल करवाया गया। इसके बाद उसके खाते से 90 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई। वहीं, एक अन्य मामले में Teen Patti गेमिंग के नाम पर भेजी गई APK फाइल इंस्टॉल करने के बाद पीड़ित के खाते से 95 हजार रुपये निकाल लिए गए।
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इसी तरह बिजली बिल भुगतान के नाम पर भेजी गई फर्जी APK के जरिए 1 लाख 2 हजार रुपये की ठगी की गई। वहीं, भजन संध्या के धार्मिक कार्यक्रम के नाम पर भेजी गई APK इंस्टॉल करने के बाद एक अन्य पीड़ित से 28 हजार रुपये ठग लिए गए।
घटना की जानकारी मिलते ही सभी पीड़ितों ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 और NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच की साइबर टीम ने संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जांच शुरू की। टीम ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से समन्वय कर ठगी की रकम को होल्ड या फ्रीज कराने के प्रयास किए।
त्वरित कार्रवाई और लगातार समन्वय के चलते सभी छह मामलों में ठगी की पूरी 4 लाख 90 हजार रुपये की राशि पीड़ितों को वापस करा दी गई।
क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि व्हाट्सऐप मैसेज पर प्राप्त किसी भी अनजान APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। बैंक KYC, ट्रैफिक चालान, बिजली बिल या किसी अन्य सेवा के नाम पर मिले लिंक की सत्यता केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से जांचें। OTP, PIN और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल कर NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
