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इंदौर: भोपाल मास्टर प्लान का प्रारुप जारी, इंदौर का मास्टर प्लान पांच साल से अटका

Sat, 26 Sep 2026 07:20 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Sat, 26 Sep 2026 07:20 PM IST
सार

भोपाल का मास्टर प्लान जहां प्रारूप जारी होने के बाद आगे बढ़ चुका है, वहीं इंदौर के नए मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार होने में ही पेंच फंसा हुआ है। पांच साल से नए मास्टर प्लान का इंतजार कर रहे इंदौर से लगे इलाकों में बेतरतीब बसाहट बढ़ रही है। 

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Indore: Draft of Bhopal Master Plan released; Indore's Master Plan stalled for five years.
इंदौर शहर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश सरकार ने भोपाल के मास्टर प्लान का प्रारूप तो जारी कर दिया, लेकिन प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर के मास्टर प्लान का तो अभी तक प्रारूप भी तैयार नहीं हुआ है। इंदौरवासियों को नए मास्टर प्लान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, जबकि भोपाल की तुलना में इंदौर के आसपास तेजी से बसाहट बढ़ रही है और दो साल बाद उज्जैन में सिंहस्थ मेला भी लगना है।

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पिछले पांच वर्षों से नए मास्टर प्लान के बिना ही इंदौर फैल रहा है। इसके कारण शहरी सीमा से जुड़े इलाकों में बेतरतीब विकास हो रहा है। जानकारों का कहना है कि इंदौर का मास्टर प्लान मेट्रोपॉलिटन सिटी के चक्कर में ही अटका हुआ है। नए मास्टर प्लान में नए इलाके भी जुड़ने हैं। इस कारण सबसे ज्यादा देर हो रही है।

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मेट्रोपॉलिटन सिटी की अधिसूचना जारी होने के बाद मास्टर प्लान तैयार करने की शुरुआत होना थी, लेकिन अभी तक नगर तथा ग्राम निवेश विभाग इस दिशा में कोई पहल नहीं कर पाया। नया मास्टर प्लान वर्ष 2035 को ध्यान में रखकर बनाया जाना है, लेकिन इसे तैयार करने में ही नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने पांच साल लगा दिए। अभी तक इसका प्रारूप भी प्रकाशित नहीं हो पाया है, जबकि भोपाल इस मामले में इंदौर से आगे रहा।

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2008 में लागू हुआ था मास्टर प्लान

इंदौर का मास्टर प्लान 2008 में लागू हुआ था, जो 2023 के हिसाब से तैयार किया गया था। मास्टर प्लान की मियाद अब खत्म हो चुकी है, लेकिन नए मास्टर प्लान को बनाने में अफसरों ने लंबा वक्त लगा दिया है। नियमानुसार नया मास्टर प्लान लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक इसका कोई अता-पता नहीं है।

 

इस बीच शहर की सीमा से लगे क्षेत्रों में अवैध बसाहट तेजी से बढ़ रही है। नए मास्टर प्लान के तहत शहर के 79 गांवों को शामिल करने की अधिसूचना जारी की गई है। इन क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की अनुमति भी फिलहाल नहीं मिल पा रही है।

शहर का पुराना मास्टर प्लान भी ठीक से लागू नहीं हो पाया है। मास्टर प्लान के कई मार्ग अब तक चौड़े नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा मास्टर प्लान में प्रस्तावित सिटी फॉरेस्ट भी आकार नहीं ले सके। वर्ष 2008 के मास्टर प्लान में नए ट्रेंचिंग ग्राउंड का भी प्रावधान था, लेकिन वह भी आज तक नहीं बन सका।सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि नया मास्टर प्लान 2035 के हिसाब से बनना है। इसकी कवायद चल रही है। मुख्यमंत्री से भी मास्टर प्लान को लेकर चर्चा हुई है।

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