इंदौर : इंदौर में सजी सुरमई शाम,गजलों के बोल में खुद को खोजते रहे श्रोता
इंदौर में शनिवार की शाम गजलों और गीतों के नाम रही। आनंद मोहन माथुर सभागृह में सृष्टि जगताप ने ‘दिल से दिल तक’ थीम के तहत अपनी सुरीली प्रस्तुति से श्रोताओं को मोहब्बत और यादों से जुड़ी गजलों के संसार में पहुंचा दिया।
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इंदौर के आनंद मोहन माथुर सभागृह में शनिवार की सुरमई शाम यादों का लिहाफ ओढ़कर आई। नवोदित गायिका सृष्टि जगताप ने उन चुनिंदा गजलों और गीतों को पेश किया जो दिल को सुकून देते हैं।
दिल से दिल तक की थीम की इस महफिल की शुरुआत मोहब्बत करने वाले... गजल के साथ हुई। फिर सृष्टि ने जगजीत सिंह के मशहूर गीत तुमको देखा तो ये ख्याल आया... को अपने अंदाज में गाया और अपनी थीम को माहौल देने की कोशिश की। फिर चुपके चुपके रात दिन, दिल में एक लहर सी उठी है अभी, रफ्ता-रफ्ता गजल गाकर समां बांध दिया।
श्रोता गजलों में खुद की जिंदगी के किस्सों को खोजने लगे। गजलों के बीच संचालनकर्ता पारुल सुखवानी की शायरी ने भी महफिल को अलग रंगत दी। कुल मिलाकर ये शाम श्रोताओं के लिए यादगार साबित हुई। गायकी के साथ साजिंदों की संगत और जुगलबंदी ने खूब समां बांधा। संतूर पर मंगेश जगताप थे, बांसुरी विशाल पाठक बजा रहे थे। विशाल वागले और ओंकार अग्निहोत्री ने तबले और हारमोनियम पर कई गीतों में जुगलबंदी की और श्रोताओं की तालियां अपने नाम कीं।
इस शाम के कुछ गीत यादगार रहे। उनमें जगजीत सिंह का गाया गीत कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे... और फिर ले आया दिल... गीत थे। कुछ जेन-जी दर्शक भी महफिल में थे। उनके लिए सृष्टि ने सादगी तो हमारी जरा देखिए... लागी तुमसे दिल की लगन... चुपके से लग जा गले जैसे गीतों को गुनगुनाया और उन्हें भी महफिल से जोड़ने की कोशिश की।इस महफिल में खास तौर पर मेहमान के रुप में चंदू शिंदे, अवधेश दवे, जितेंद्र भांडिया मौजूद थे। उनका स्वागत आयोजक अभिषेक गावड़े ने किया।
