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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: The bail application of the accused who became an IAS was rejected by a fake order, the court accepted - a crime of serious nature

इंदौर: फर्जी आदेश से आईएएस बने आरोपी की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने माना-गंभीर प्रकृति का अपराध

Thu, 16 Dec 2021 06:29 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Thu, 16 Dec 2021 06:29 PM IST
सार

फर्जी आदेश से आईएएस बने आरोपी की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। सेशन कोर्ट पहले ही आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर चुका है। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए तीन पन्नों का फैसला सुनाया, जिसमें कहा कि यह गंभीर प्रकृति का अपराध है।
 

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Indore: The bail application of the accused who became an IAS was rejected by a fake order, the court accepted - a crime of serious nature
अदालत ने आरोपियों पर 22-22 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। - फोटो : Social Media

विस्तार

फर्जी आदेश से आईएएस बने आरोपी की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। आरोपी फिलहाल जेल में बंद है। सेशन कोर्ट पहले ही आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर चुका है। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए तीन पन्नों का फैसला सुनाया जिसमें कहा कि यह गंभीर प्रकृति का अपराध है।
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गौरतलब है कि नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल में पदस्थ रहे संतोष वर्मा को कुछ समय पूर्व गिरफ्तार किया गया था। इस साल 27 जून को एमजी रोड पुलिस ने संतोष वर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के प्रकरण दर्ज किए थे। वर्मा के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली एक युवती ने लसूड़िया थाने में उसके खिलाफ मारपीट की रिपोर्ट लिखवाई थी। इस शिकायत के बाद जब पुलिस ने जांच की तो फर्जी आईएएस का खुलासा हुआ।
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यह पता चला कि वर्मा ने फर्जी रिपोर्ट पेश कर खुद को दोषमुक्त बताते हुए आईएएस कैडर हासिल कर लिया था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद शासन ने उसे निलंबित कर दिया था। पुलिस ने वर्मा के मोबाइल से कई प्रमुख लोगों से कई व्हाट्सएप चैटिंग और बातचीत के रिकॉर्ड भी हासिल किए, जिसमें न्यायालय से जुड़े प्रमुख लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से हुई बातचीत भी शामिल है। इसकी जांच चंडीगढ़ स्थित फॉरेंसिक लैब से करवाई जा रही है।
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कोर्ट ने माना गंभीर प्रकृति का अपराध
पिछले कई महीनों से आरोपी संतोष वर्मा जेल में बंद है। सेशन कोर्ट में उसने जमानत याचिका दायर की थी जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट में जमानत का आवेदन लगाया। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। तीन पन्नों के फैसले में कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर प्रकृति का अपराध है। वर्मा के खिलाफ एफआईआर की जांच चल रही है और पुलिस ने अभी चालान पेश नहीं किया है। इसलिए फिलहाल वर्मा को जेल में ही रहना पड़ेगा। 


फर्जी आदेश के जरिए प्राप्त किया आईएएस अवॉर्ड
उल्लेखनीय है कि सीबीआई और व्यापमं के विशेष न्यायाधीश के फर्जी हस्ताक्षर से खुद को दोषमुक्त बताने वाले बोगस दस्तावेज तैयार कर वर्मा ने डीपीसी में इनके माध्यम से पदोन्नति हासिल की थी। इसके बाद आईएएस अवॉर्ड प्राप्त किया। जब इंदौर की एक महिला ने जब उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखाई तब पुलिस जांच के बाद सच्चाई उजागर हुई। नियम के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवा में जब पदोन्नति की जाती है, तब अगर मामूली अपराध हो तो भी आईएएस अवॉर्ड नहीं मिल सकता। जबकि वर्मा के खिलाफ दो प्रकरण लम्बित थे और बाद में उसने फर्जी आदेश बनाकर खुद को दोषमुक्त बताते हुए डीपीसी के सामने इस फर्जी आदेश के जरिए आईएएस अवॉर्ड हासिल कर लिया। बाद में जिस विशेष न्यायाधीश के फर्जी साइन से यह डीपीसी तैयार हुई, उन्हीं की रिपोर्ट पर एमजी रोड पुलिस ने वर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी की जांच की और उसे गिरफ्तार भी कर लिया।  
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