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इंदौर: 66 करोड़ लोन घोटाले में बड़ा एक्शन, जाली रसीदों के दम पर बैंकों को लगाया करोड़ों का चूना, 21 आरोपी तलब
Fri, 02 Oct 2026 12:36 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Fri, 02 Oct 2026 12:36 PM IST
सार
रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े 66 करोड़ रुपये के बैंक ऋण मामले में विशेष पीएमएलए अदालत ने 21 आरोपियों और संबंधित संस्थाओं को तलब किया है। ईडी की जांच में फर्जी बिल और लॉरी रसीदों के जरिए बैंक क्रेडिट सुविधाओं के दुरुपयोग का मामला सामने आया है।
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66 करोड़ के बैंक ऋण घोटाले में ईडी की कार्रवाई
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
विशेष पीएमएलए अदालत ने रुचि ग्लोबल लिमिटेड (अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लि.) से जुड़े लगभग 66 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले में 21 आरोपियों और संबंधित संस्थाओं को तलब किया है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस बड़े वित्तीय मामले में अदालत के समक्ष आरोप पत्र पेश किया था। अदालत ने दस्तावेज का संज्ञान लेते हुए मामले से जुड़े सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर उपस्थित होने का आदेश दिया है। इस घोटाले में बैंकों के कंसोर्टियम से गैर-फंड आधारित साख सुविधाओं का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया था।
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जाली लॉरी रसीदों का सहारा लिया
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में खुलासा हुआ है कि रुचि ग्लोबल लिमिटेड ने पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ वडोदरा और जम्मू-कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से कृषि उत्पादों की खरीद के नाम पर गैर-फंड आधारित क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त की थीं। कंपनी ने इन सुविधाओं के तहत मुख्य रूप से लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) हासिल किए थे। आरोप है कि कंपनी ने अपने ही सहयोगियों के पक्ष में फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और जाली लॉरी रसीदों का सहारा लेकर एलसी तैयार करवाईं।
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सुनियोजित लेयरिंग और धोखाधड़ी
इन फर्जी दस्तावेज के आधार पर जब बैंकों से बिल डिस्काउंट करवाए गए, तब प्राप्त राशि को सीधे कंपनी के काम में लगाने के बजाय विभिन्न संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों में घुमाया गया। इसके बाद एक से तीन दिनों के भीतर यह पूरी रकम फिर से घूम-फिरकर रुचि ग्लोबल लिमिटेड के खातों में वापस पहुंचा दी गई। जांच एजेंसी ने इस पूरी प्रक्रिया को बैंक क्रेडिट की सुनियोजित लेयरिंग और धोखाधड़ी करार दिया है।
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बैंकों का भारी नुकसान
इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भोपाल की प्राथमिकी के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपनी जांच शुरू की थी। सीबीआई की मूल प्राथमिकी में रुचि ग्लोबल लिमिटेड, उमेश शाहरा, साकेत बरोडिया, आशुतोष मिश्रा और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के नाम शामिल थे।
बैंक समूह ने सीबीआई को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपियों की गतिविधियों से बैंकों को कुल 188.35 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय की मौजूदा कार्रवाई का मुख्य केंद्र 66 करोड़ रुपये की गैर-फंड आधारित सुविधाओं का दुरुपयोग है। जांच एजेंसी अब पूरे वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को एक-दूसरे से जोड़कर व्यापक स्तर पर पड़ताल कर रही है।
छापेमारी में नकदी जब्ती और संपत्ति कुर्क
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने 23 दिसंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत कई स्थानों पर तलाशी ली थी। इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने 23.50 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की थी और फर्जी लेन-देन से जुड़े कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था।
इसके बाद फरवरी 2026 में एजेंसी ने 5.13 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया था। कुर्क की गई संपत्तियों में रुचि ग्लोबल से जुड़े मुख्य आरोपी उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम पंजीकृत इंदौर की जमीन भी शामिल है। एजेंसी का दावा है कि बैंक से धोखाधड़ी कर हासिल की गई रकम का उपयोग ये संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया था। फिलहाल अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
