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Indore: आरोपी से साझा किए सबूत, खातिरदारी भी की, बाल कल्याण समिति के तीन सदस्यों को हटाने के लिए जारी किए नोटिस
Sun, 22 May 2022 05:44 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sun, 22 May 2022 05:44 PM IST
सार
बाल कल्याण समिति इंदौर के तीन सदस्यों को हटाने की तैयारी है। इनको कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। आरोप है कि सदस्यों ने यौन शोषण की पीड़िता से जुड़े सबूत आरोपी से साझा किए और उसकी खातिरदारी भी की।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नाबालिग के यौन शोषण के आरोपी पिता से सबूत शेयर करने और उसकी आवभगत करने के मामले में बाल कल्याण समिति के तीन सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इनको हटाने के नोटिस जारी किए हैं। किशोर न्याय बोर्ड में भी इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक जिन तीन सदस्यों को हटाने के लिए महिला बाल विकास विभाग ने नोटिस जारी किए हैं उनके नाम योगेश जैन, मनीष दुबे और अर्पणा दुबे है। इनको पद से हटाने के लिए कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इस मामले में बाल आयोग ने पुलिस कमिश्नर से भी रिपोर्ट मांगी है। इनके खिलाफ हुई जांच की रिपोर्ट में पाया है कि पीड़ित बच्ची को इन सदस्यों ने पॉक्सो के आरोपी के दोस्त की पत्नी को सौंप दिया और अध्यक्ष की सहमति तक नहीं ली। इनका यह कृत्य फैमिली कोर्ट इंदौर के आदेश की अवहेलना है, क्योंकि कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी उसके दादा-दादी को दे रखी है। आरोपी पिता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी उक्त तीनों सदस्यों ने समिति दफ्तर में मुलाकात की और पुलिस को उसकी मौजूदगी की सूचना नहीं दी। यह भी पॉक्सो कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। बता दें कि योगेश जैन एवं मनीष दुबे द्वारा कुछ समय पहले विजिटिंग कार्ड में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट लिखने का मामला भी उजागर हुआ था। इसमें उन्हें मजिस्ट्रेट ने ही बुलाकर फटकार लगाई थी। अब इनके खिलाफ समिति के लैटर हैड का दुरुपयोग करने की शिकायत हुई है। समिति अध्यक्ष इनसे जवाब मांगेंगे। बाल आयोग सदस्य ब्रजेश चौहान ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर आरोपी की मदद मामले में रिपोर्ट मांगी है। महिला बाल विकास विभाग के संचालक डॉ. विशाल नाडकर्णी ने बताया कि जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य योगेश जैन, मनीष दुबे और अर्पणा दुबे के खिलाफ पॉक्सो के आरोपी पिता की मदद करने संबंधी जांच रिपोर्ट पर हटाने के नोटिस जारी किए हैं। किशोर न्याय बोर्ड से भी कार्रवाई के लिए पत्र मिला है। इनके खिलाफ अंतिम फैसला शासन को लेना है।
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जानकारी के मुताबिक जिन तीन सदस्यों को हटाने के लिए महिला बाल विकास विभाग ने नोटिस जारी किए हैं उनके नाम योगेश जैन, मनीष दुबे और अर्पणा दुबे है। इनको पद से हटाने के लिए कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इस मामले में बाल आयोग ने पुलिस कमिश्नर से भी रिपोर्ट मांगी है। इनके खिलाफ हुई जांच की रिपोर्ट में पाया है कि पीड़ित बच्ची को इन सदस्यों ने पॉक्सो के आरोपी के दोस्त की पत्नी को सौंप दिया और अध्यक्ष की सहमति तक नहीं ली। इनका यह कृत्य फैमिली कोर्ट इंदौर के आदेश की अवहेलना है, क्योंकि कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी उसके दादा-दादी को दे रखी है। आरोपी पिता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी उक्त तीनों सदस्यों ने समिति दफ्तर में मुलाकात की और पुलिस को उसकी मौजूदगी की सूचना नहीं दी। यह भी पॉक्सो कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। बता दें कि योगेश जैन एवं मनीष दुबे द्वारा कुछ समय पहले विजिटिंग कार्ड में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट लिखने का मामला भी उजागर हुआ था। इसमें उन्हें मजिस्ट्रेट ने ही बुलाकर फटकार लगाई थी। अब इनके खिलाफ समिति के लैटर हैड का दुरुपयोग करने की शिकायत हुई है। समिति अध्यक्ष इनसे जवाब मांगेंगे। बाल आयोग सदस्य ब्रजेश चौहान ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर आरोपी की मदद मामले में रिपोर्ट मांगी है। महिला बाल विकास विभाग के संचालक डॉ. विशाल नाडकर्णी ने बताया कि जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य योगेश जैन, मनीष दुबे और अर्पणा दुबे के खिलाफ पॉक्सो के आरोपी पिता की मदद करने संबंधी जांच रिपोर्ट पर हटाने के नोटिस जारी किए हैं। किशोर न्याय बोर्ड से भी कार्रवाई के लिए पत्र मिला है। इनके खिलाफ अंतिम फैसला शासन को लेना है।
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