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इंदौर: ऑस्ट्रेलियाई कंपनी से 56 लाख का पैकेज पाने वाली छात्रा ने बताया सफलता का राज, जानिए सक्सेस मंत्र
Sun, 13 Feb 2022 10:52 AM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sun, 13 Feb 2022 10:52 AM IST
सार
आईईटी, डीएवीवी की छात्रा रीति नेमा को आस्ट्रेलिया की आईटी कंपनी ने 56 लाख का पैकेज दिया है जो यूनिवर्सिटी के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक पैकेज है। रीति ने अमर उजाला से बात कर बताया कि कैसे शुरुआत में वे नर्वस हुई और कैसे तीनों राउंड क्लियर किए।
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माता-पिता के साथ रीति नेमा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जिंदगी रूकने नहीं, बढ़ने का नाम है, सीखने का नाम है। जीतोड़ मेहनत कीजिए और अपना शत प्रतिशत दीजिए। सीखने की ललक बरकरार रखिए और हर चीज से सीखते रहिए। कुछ इस तरह के मूल मंत्र हैं रीति नेमा के जिनको आस्ट्रेलिया की आईटी कंपनी ने 56 लाख का सालाना पैकेज दिया है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के इतिहास में पहली बार इतना बड़ा पैकेज मिला है। रीति ने अपनी कामयाबी अमर उजाला से साझा की और बताया कि किस तरह उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
दरअसल, मूलतः भोपाल निवासी रीति नेमा के पिता कमलेश नेमा मेडिकल व्यवसायी हैं। माता कोमल नेमा गृहिणी हैं। 12वीं 85 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण कर रीति का सपना आईआईटी का था मगर उम्मीदानुरूप कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट और टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। बस यहीं से शुरू हुआ सॉफ्टवेयर की दुनिया में सपनों को सच करने का सफर। डेढ़ साल तक कॉलेज गईं, क्लासेस की लेकिन बाद में कोरोना के चलते ऑनलाइन ही पढ़ाई करनी पड़ी। इस विषम दौर में भी रीति ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि दोगुनी मेहनत की और नतीजा यह हुआ कि कामयाबी मिलती गई। जो पैकेज रीति को अभी मिला है उसके पहले दूसरी कंपनियां जॉब ऑफर कर चुकीं हैं। पहली बार 15 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर जॉब ऑफर आया था लेकिन शायद कुछ बड़ा करने का मन ही था जो आगे तैयारी करतीं रहीं और आज अधिकतम पैकेज हासिल किया। रीति को पजल सॉल्विंग और स्पीड क्यूबिक पसंद हैं। 12वीं के बाद बिना कोई ड्रॉप लिए उन्होंने इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया।
नर्वस हुई मगर नेगेटिव नहीं
अमर उजाला से हुई बातचीत में रीति ने बताया कि इस उपलब्धि से घरवाले बहुत खुश हैं। दो बड़ी बहनें हैं। एक सॉफ्टवेयर लाइन में हैं तो दूसरी डिजाइनिंग फील्ड में। सभी को अच्छा लगा और मैं भी खुश हूं। रीति के अनुसार 12वीं के बाद से ही आईआईटी का सोचा था। उम्मीदानुरूप आईआईटी नहीं मिला तो आईईटी में एडमिशन लिया। यहां का शैक्षणिक वातावरण बहुत अच्छा है। शैक्षणिक स्टाफ भी अच्छे से समझाता है। किस तरह से कैसे करना है, हर बात समझाई जाती है। प्लेसमेंट के पहले मीटिंग होती थी जिसमें बताते थे कि कैसे क्या होता है। कैसे सवाल पूछे जा सकते हैं। कैसे जवाब देते हैं। शुरुआत में भी मैं भी नर्वस थीं लेकिन जैसे-जैसे इंटरव्यू निकलते गए तो आत्मविश्वास आता गया। इस कंपनी के प्लेसमेंट के बारे में बताते हुए कहा कि तीन राउंड हुए थे। तीनों अच्छे थे। कोडिंग, सिस्टम डिजाइन, मैनेजमेंट राउंड हुए। आखिरी में मैनेजमेंट वैल्यू राउंड था जिसमें मैनेजमेंट स्किल्स देखी जाती है। सभी राउंड अच्छे हुए तो मन में था कि अच्छा ही होगा। कभी नेगेटिविटी नहीं आई और उसी का परिणाम है कि पॉजिटिव रिजल्ट मिला।
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कंसिस्टेंट रहें और लगातार सीखते रहें
रीति का कहना है कि मेरे लिए तो ये ड्रीम जॉब ही है क्योंकि मेरा शुरू से ही सपना था प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपिंग में जाने का। इसके अलावा दूसरी किसी जॉब का सोचा ही नहीं। घरवालों ने भी सहयोग किया और मैं भी पूरी मेहनत से सपनों को साकार करने में जुट गई। इस कंपनी के लिए नवंबर 2021 में इंटरव्यू हुए थे। अभी लास्ट सेमेस्टर चल रहा है। बैंगलुरु में जॉइनिंग होगी। मैं ये कहना चहती हूं कि हमेशा कंसिस्टेंट रहना चाहिए। जितनी जल्दी तैयारी करेंगे उतना अच्छा रहेगा। कंसिस्टेंट रहने से दूसरों से भी फायदा मिल जाता है। चीजों को लगातार सीखते रहें, एक्सप्लोर करते रहें। आजकल इंटरनेट पर इतने संसाधन उपलब्ध हैं कि उनसे बहुत फायदा मिल सकता है। इनमें फ्री रिसोर्सेज भी बहुत हैं। ऑनलाइन ही सबकुछ क्रेक किया जा सकता है। मेरे लिए जीवन का मंत्र यही है कि मेहनत पूरी करो, ईमानदारी से करो। इसके बाद जो होगा अच्छा होगा।
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दरअसल, मूलतः भोपाल निवासी रीति नेमा के पिता कमलेश नेमा मेडिकल व्यवसायी हैं। माता कोमल नेमा गृहिणी हैं। 12वीं 85 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण कर रीति का सपना आईआईटी का था मगर उम्मीदानुरूप कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट और टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। बस यहीं से शुरू हुआ सॉफ्टवेयर की दुनिया में सपनों को सच करने का सफर। डेढ़ साल तक कॉलेज गईं, क्लासेस की लेकिन बाद में कोरोना के चलते ऑनलाइन ही पढ़ाई करनी पड़ी। इस विषम दौर में भी रीति ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि दोगुनी मेहनत की और नतीजा यह हुआ कि कामयाबी मिलती गई। जो पैकेज रीति को अभी मिला है उसके पहले दूसरी कंपनियां जॉब ऑफर कर चुकीं हैं। पहली बार 15 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर जॉब ऑफर आया था लेकिन शायद कुछ बड़ा करने का मन ही था जो आगे तैयारी करतीं रहीं और आज अधिकतम पैकेज हासिल किया। रीति को पजल सॉल्विंग और स्पीड क्यूबिक पसंद हैं। 12वीं के बाद बिना कोई ड्रॉप लिए उन्होंने इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया।
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नर्वस हुई मगर नेगेटिव नहीं
अमर उजाला से हुई बातचीत में रीति ने बताया कि इस उपलब्धि से घरवाले बहुत खुश हैं। दो बड़ी बहनें हैं। एक सॉफ्टवेयर लाइन में हैं तो दूसरी डिजाइनिंग फील्ड में। सभी को अच्छा लगा और मैं भी खुश हूं। रीति के अनुसार 12वीं के बाद से ही आईआईटी का सोचा था। उम्मीदानुरूप आईआईटी नहीं मिला तो आईईटी में एडमिशन लिया। यहां का शैक्षणिक वातावरण बहुत अच्छा है। शैक्षणिक स्टाफ भी अच्छे से समझाता है। किस तरह से कैसे करना है, हर बात समझाई जाती है। प्लेसमेंट के पहले मीटिंग होती थी जिसमें बताते थे कि कैसे क्या होता है। कैसे सवाल पूछे जा सकते हैं। कैसे जवाब देते हैं। शुरुआत में भी मैं भी नर्वस थीं लेकिन जैसे-जैसे इंटरव्यू निकलते गए तो आत्मविश्वास आता गया। इस कंपनी के प्लेसमेंट के बारे में बताते हुए कहा कि तीन राउंड हुए थे। तीनों अच्छे थे। कोडिंग, सिस्टम डिजाइन, मैनेजमेंट राउंड हुए। आखिरी में मैनेजमेंट वैल्यू राउंड था जिसमें मैनेजमेंट स्किल्स देखी जाती है। सभी राउंड अच्छे हुए तो मन में था कि अच्छा ही होगा। कभी नेगेटिविटी नहीं आई और उसी का परिणाम है कि पॉजिटिव रिजल्ट मिला।
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कंसिस्टेंट रहें और लगातार सीखते रहें
रीति का कहना है कि मेरे लिए तो ये ड्रीम जॉब ही है क्योंकि मेरा शुरू से ही सपना था प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपिंग में जाने का। इसके अलावा दूसरी किसी जॉब का सोचा ही नहीं। घरवालों ने भी सहयोग किया और मैं भी पूरी मेहनत से सपनों को साकार करने में जुट गई। इस कंपनी के लिए नवंबर 2021 में इंटरव्यू हुए थे। अभी लास्ट सेमेस्टर चल रहा है। बैंगलुरु में जॉइनिंग होगी। मैं ये कहना चहती हूं कि हमेशा कंसिस्टेंट रहना चाहिए। जितनी जल्दी तैयारी करेंगे उतना अच्छा रहेगा। कंसिस्टेंट रहने से दूसरों से भी फायदा मिल जाता है। चीजों को लगातार सीखते रहें, एक्सप्लोर करते रहें। आजकल इंटरनेट पर इतने संसाधन उपलब्ध हैं कि उनसे बहुत फायदा मिल सकता है। इनमें फ्री रिसोर्सेज भी बहुत हैं। ऑनलाइन ही सबकुछ क्रेक किया जा सकता है। मेरे लिए जीवन का मंत्र यही है कि मेहनत पूरी करो, ईमानदारी से करो। इसके बाद जो होगा अच्छा होगा।
