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मिसाल बनी महिला सरपंच को सम्मान: गहने गिरवी रख गांव में लगवाए थे कैमरे, छह महीने में पंचायत हुई अपराध मुक्त

Sat, 21 Jan 2023 02:05 PM IST
Dinesh Sharma दिनेश शर्मा
Updated Sat, 21 Jan 2023 02:05 PM IST
सार

26 जनवरी को एक ऐसी महिला सरपंच का सम्मान होने जा रहा है, जिसने अपने अपना चुनावी वादा निभाने के लिए गहने तक गिरवी रख दिए थे।

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In Burhanpur, women sarpanch got cameras installed in the village by mortgaging jewelry
महिला सरपंच ने गहने गिरवी रखकर लगवाए थे गांव में सीसीटीवी कैमरे। - फोटो : अमर उजाला
26 जनवरी को एक ऐसी महिला सरपंच का सम्मान होने जा रहा है, जिसने अपने अपना चुनावी वादा निभाने के लिए गहने तक गिरवी रख दिए थे। उसकी पहल गांव और गांव से गुजरने वाले हाईवे को अपराध मुक्त करने की दिशा में ले जा रही है। पुलिस को उनकी इस कोशिश का बड़ा फायदा भी मिल रहा है। 


हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिले बुरहानपुर में इंदौर-इच्छापुर हाईवे से सटी ग्राम पंचायत झिरी की महिला सरपंच आशा विकास कैथवास की। बुरहानपुर जिला मुख्यालय में होने वाले परेड ग्राउंड पर पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा आशा कैथवास का सम्मान करेंगे। उन्हें इसके लिए आमंत्रण दिया गया है। उनकी पहल को अब और भी लोग अपनाने लगे हैं। आशा कैथवास अब गांव में सोलर पैनल और गोबर गैस प्लांट लगवाने की दिशा में काम कर रही हैं। जिससे सस्ती बिजली, खाद, ईंधन ग्रामीणों को मिल सके।
 
In Burhanpur, women sarpanch got cameras installed in the village by mortgaging jewelry
बुरहानपुर की झिरी पंचायत में गहने गिरवी रख कैमरे लगवाए गए थे। - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि आशा कैथवास ने अपनी पंचायत झिरी से गुजरने वाले हाईवे पर और गांव में नाइट विजन और हाई क्वालिटी के कैमरे लगवाए हैं। साथ ही पूरा सेटअप तैयार किया है। चार कैमरे हाईवे पर और दो कैमरे गांव में लगे हैं। बताया गया कि इसका खर्च तकरीबन 81 हजार रुपये आया था। उन्होने अपने सोने के गहने भी गिरवी रखकर 40 हजार रुपये और बाकी 40 हजार रुपये जमा पूंजी से जुटाए थे। हालांकि अब ये सारा पैसा जिला प्रशासन की मदद से उन्हें मिल गया है। 

कैसे मिली थी प्रेरणा
सरपंच पति विकास कैथवास का कहना है कि कुछ साल पहले हमारे रिश्तेदार की बालिका का हाईवे पर एक्सीडेंट हुआ था। जिसमें टक्कर मारने वाले वाहन का आज तक पता नहीं चल सका है। मन में टीस थी कि कैमरे होते तो दुर्घटना करने वाले वाहन का पता चल जाता। फिर एक और रिश्तेदार की हादसे में मौत हो गई थई। इसलिए हमने सोच रखा था कि कैमरे लगवाने की दिशा में कोई न कोई काम तो करेंगे। सरपंच चुनाव के समय जनता से वादा भी किया था। जीतने के बाद ही एक बच्चे का अपहरण  हो गया। तब तत्काल नाइट विजन कैमरे लगवाने की कोशिश शुरू कर दी। 
 
In Burhanpur, women sarpanch got cameras installed in the village by mortgaging jewelry
पंचायत से गुजरने वाले हाईवे पर चार और गांव में दो कैमरे लगवाए गए हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

पैसे कैसे जुटाए
कैमरे लगवाने के लिए कई कंपनियों से बात की। कोटेशन लिए। खर्च ज्यादा था तो मेरी पत्नी सरपंच आशा ने अपने गहने गिरवी रखकर पैसा जुटाया साथ ही जमा पूंजी भी लगा दी। हाईवे पर कैमरे लगवाने का अब फायदा नजर आने लगा है। महाराष्ट्र से हादसा कर कोई वाहन इस ओर आता है तो वहां की पुलिस हमारी मदद लेती है। हाईवे पर लूट की घटनाएं थम गई हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने अब कैमरे लगवाने की लागत लौटा दी है। गहने भी छुड़वा लिए हैं। 

पुलिस को मिल रही मदद
मामले में थाना प्रभारी हंसकुमार झिंझोरे का कहना है कि कैमरे लगाने का फायदा तो हुआ है। झिरी गांव हाईवे पर है। अगस्त महीने में 12 साल के बच्चे का अपहरण हुआ था, तब हमें कैमरों की कमी महसूस हुई थी। हमने नवनिर्वाचित सरपंच से बात की। चूंकि उनका चुनावी वादा था कि वे हाईवे पर कैमरे लगाना है। उन्होंने अपने गहने गिरवी रखकर कैमरे लगवाए हैं। इससे सड़क हादसों में वाहनों को ट्रेस करना, हाईवे पर लूट-छीनाझपटी और चोर-बदमाशों के गुजरने का पता लगाना आसान हुआ है। इस पहल के लिए 26 जनवरी को बुरहानपुर जिले में परेड कार्यक्रम में एसपी साहब सरपंच आशा कैथवास को सम्मानित करेंगे। 
 
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In Burhanpur, women sarpanch got cameras installed in the village by mortgaging jewelry
कैमरे लगने के बाद इलाके में अपराध की संख्या में कमी आई है। - फोटो : सोशल मीडिया

कौन हैं सरपंच आशा कैथवास
35 साल की आशा कैथवास पहली बार सरपंच बनी हैं। उनका विवाह 2009 में विकास कैथवास से हुआ। उनकी दो बेटियां हैं। विकास भाजपा अजा मोर्चा के पदाधिकारी भी हैं। आशा ने बहुत कम समय में सरपंची हासिल की। 

अब नया क्या
सरपंच आशा कैथवास ने बताया कि कैमरे लगवाने की पहल रंग लाने लगी है। हमारी पंचायत में गायों की संख्या ज्यादा है तो गोबर भी बहुतायत में मिलता है। अभी तक कोई व्यवस्था नहीं होने पर गोबर बारिश में सड़कों पर आ जाता है और गांव में गंदगी होती है। इसके लिए हमने गोबर गैस प्लांट बनाने की योजना बनाई है। जिससे सफाई भी होगी साथ ही स्वयं सहायता समूह कि महिलाओं को आय होने लगेगी। गैस के बाद बचे गोबर को जैविक खाद के रूप में बेचा जाएगा। इसकी योजना जिला पंचायत सहित भोपाल तक भेजी जा चुकी है। सभी को ये नवाचार पसंद भी आ रहा है। टीम ने मौका मुआयना भी कर लिया है। अगले वित्तीय वर्ष में फंड रिलीज हो जाएगा तो हम इस पर काम शुरू करेंगे। साथ ही गांव में सोलर पैनल लगवाने पर भी विचार चल रहा है। जिससे आदिवासी परिवारों को सस्ती बिजली मिल सकेगी। 
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