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बालिकाओं की जन्म दर में सुधार: मध्य प्रदेश के धार में 1000 बालक पर 1056 बालिका जन्म ले रहीं
Wed, 09 Feb 2022 03:31 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 09 Feb 2022 03:31 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में बालिकाओं की जन्म दर में काफी सुधार हुआ है। आदिवासी बाहुल्य धार जिले में हर दूसरे आंगन में बेटी की किलकारियां गूंज रही हैं। जिले में लिंगानुपात में भी सुधार होने के कारण अब 1000 बालक पर 1056 बालिका जन्म ले रही है।
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धार जिले में बालिका लिंगानुपात तेजी से बढ़ा है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पांच साल में धार जिले में बालिका लिंगानुपात तेजी से बढ़ा है। पांच साल पहले 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 992 थी। जो अब बढ़कर 1056 हो गई। लिंगानुपात में सुधार, समान अंतर होना व्यवस्था में बदलाव का संकेत दे रहा है।
मध्य प्रदेश में बालिकाओं की जन्म दर में काफी सुधार हुआ है। आदिवासी बाहुल्य धार जिले में हर दूसरे आंगन में बेटी की किलकारियां गूंज रही हैं। जिले में लिंगानुपात में भी सुधार होने के कारण अब 1000 बालक पर 1056 बालिका जन्म ले रही है।
महिला बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुभाष जैन ने बताया कि जिले में अब प्रति हजार बालक पर 1056 बालिकाएं हैं। शासन के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से ये स्थिति बनी है। उन्होंने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भी एक महत्वपूर्ण योगदान वाली योजना रही। इतना ही नहीं बेटियों के प्रति लोगों की सोच में भी अंतर देखने को मिला है। पहले के दौर में बेटों की चाह के चलते बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता था, परंतु अब ऐसा नहीं है। जिसके कारण अब यह आंकड़े तसल्ली देने वाले हैं।
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मध्य प्रदेश में बालिकाओं की जन्म दर में काफी सुधार हुआ है। आदिवासी बाहुल्य धार जिले में हर दूसरे आंगन में बेटी की किलकारियां गूंज रही हैं। जिले में लिंगानुपात में भी सुधार होने के कारण अब 1000 बालक पर 1056 बालिका जन्म ले रही है।
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महिला बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुभाष जैन ने बताया कि जिले में अब प्रति हजार बालक पर 1056 बालिकाएं हैं। शासन के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से ये स्थिति बनी है। उन्होंने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भी एक महत्वपूर्ण योगदान वाली योजना रही। इतना ही नहीं बेटियों के प्रति लोगों की सोच में भी अंतर देखने को मिला है। पहले के दौर में बेटों की चाह के चलते बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता था, परंतु अब ऐसा नहीं है। जिसके कारण अब यह आंकड़े तसल्ली देने वाले हैं।
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