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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Hanuman Janmotsav: Galle's Babba Zoo in Khajuraho, in the 9th century, Chandela kings built a 3 meter high Hanuman statue

हनुमान जन्मोत्सव: खजुराहो में गैल के बब्बा जू, 9वीं सदी में चंदेल राजाओं ने कराया था 3 मीटर ऊंची हनुमान प्रतिमा का निर्माण

Sat, 16 Apr 2022 04:43 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 16 Apr 2022 04:43 PM IST
सार

हनुमान जन्मोत्सव पर छतरपुर जिले के खजुराहो के गैल के बब्बा जू का जिक्र न हो, ये कैसे हो सकता है। इस प्राचीन मंदिर की काफी मान्यता है। बताया जाता है कि प्रतिमा 9वीं सदी में चंदेल राजाओं ने बनवाई थी।
 

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Hanuman Janmotsav: Galle's Babba Zoo in Khajuraho, in the 9th century, Chandela kings built a 3 meter high Hanuman statue
बताया जाता है कि प्रतिमा 9वीं सदी में चंदेल राजाओं ने बनवाई थी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो में पश्चिमी मंदिर समूहों से कुछ ही दूरी पर नगर के मध्य स्थित तीन मीटर ऊंची मूर्ति वाले हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में विराजमाज हनुमानजी को "गैल के बब्बा जू" के नाम से जाना जाता है। दरअसल गैल (रास्ते) के बब्बा जू इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मंदिर खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह से पुरानी बस्ती के रास्ते में नगर के बीच स्थित है और पुराना खजुराहो (पुरानी बस्ती) जाते समय यह रास्ते में पड़ता है। जिसे चंदेल शासकों ने कामुक मूर्तियों वाले मंदिरों से दूर और अलग रखने के लिए रास्ते में बनाया था।
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इतिहासकारों, प्राचीन लेखों तथा मंदिर की मूर्ति के पीछे अंकित लेख के अनुसार यह मंदिर लगभग 922 ईस्वी का बताया गया है, जिसे तात्कालीन चंदेल राजा हर्ष सिंह ने बनवाया था। खजुराहो के मंदिरों के गर्भगृह में वैष्णव पंथ तथा शिव सम्प्रदाय के स्वरूप विष्णु तथा शिव के साथ ही जैन सम्प्रदाय के तीर्थंकरों को समर्पित मूर्तियां थीं, लेकिन इन मंदिरों को हनुमान मंदिर के बिना शून्य बताया गया। खजुराहो के मंदिरों के बाहरी आवरण में कामकला की मूर्तिकला स्थापित होना थी और हनुमानजी अविवाहित देव थे। तब ये मंदिर पूर्वी मंदिर समूह तथा पश्चिमी मंदिर समूह के मध्य दक्षिण दिशा की तरफ दर्शाया गया। गैल के बब्बा जू हनुमान मंदिर के बारे में मान्यता है कि ये संभवत: पूरे बुंदेलखंड अंचल के सबसे प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में लगभग 3 मीटर ऊंची मूर्ति विराजमान है। बाद में इस मूर्ति पर सिन्दूर भी चढ़ाया जाने लगा और हिन्दू पंथ के लोगों द्वारा पूजा अर्चना भी पुरातन समय से चली आ रही है।
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ASI के अधीन मंदिर, टीनशेड में विराजे हनुमान
बात दें कि यह एकमात्र ऐंसा मंदिर है जो एक चबूतरे पर बगैर छत के निर्मित है, और अनुमान जी यहां खुले में विराजमान थे। हालांकि बाद में इस मंदिर को भी भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा अपने अधिपत्य में ले लिया गया और मूर्ति के ऊपर टीनशेड लगवाया गया है। मान्यता अनुसार मंदिर में दूर-दराज और देश-विदेश से लोग अपनी-अपनी मन्नत लेकर आते हैं और मनोकामना पूरी होने पर अपना प्रसाद चढ़ाते हैं।
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