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Hamidia Hospital Fire News: हादसे के दो घंटे पहले जन्मी थीं जुड़वा बेटियां, एक की मौत, दूसरी अस्पताल में
Tue, 09 Nov 2021 02:41 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Tue, 09 Nov 2021 02:41 PM IST
सार
भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल हादसे में अंकुश यादव ने अपनी एक बेटी को खो दिया।
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हमीदिया हादसे में बेटी खोने वाले पिता अंकुश यादव।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल में सोमवार रात लगी आग में झुलसे मासूमों की मौत उनके परिजन को जिंदगीभर का जख्म दे गई है। अब तक करीब 7 बच्चों के मरने की अपुष्ट खबरें सामने आई है। इस हादसे में दो घंटे पहले जन्मी मासूम भी असमय काल का ग्रास बन गई।
बच्ची के पिता का नाम अंकुश यादव है। उन्होंने बताया कि हादसे के महज 2 घंटे पहले ही एक निजी अस्पताल में उनकी जुड़वां बेटियां पैदा हुई थीं। एक बेटी स्वस्थ थी जबकि एक का वजन कम होने की वजह से डॉक्टर्स ने उन्हें कमला नेहरू अस्पताल में रेफर कर दिया था। अंकुश अपनी बेटियों को अस्पताल में भर्ती कर बाहर निकले ही थे कि अस्पताल में आग लग गई। ये देखते ही बदहवास अंकुश उल्टे-पैर अस्पताल की तरफ भागे। वो भागते हुए खुद अस्पताल की तीसरी मंजिल पर पहुंचे। अपनी आंखों के अपनी नवजात कोमल सी बच्ची को भी आग की लपटों और धुएं में मरते देखा।
अपनी आंखों के सामने देखी बेटी की मौत
अंकुश यादव ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वार्ड में आग लग चुकी थी। उन्होंने वहां मौजूद स्टाफ से कहा कि आग लग गई है। बच्चों को बाहर निकालो। पहले तो स्टाफ के लोगों ने उन्हें वॉर्ड में अंदर नहीं घुसने दिया। जब हालात बेकाबू होने लगे तो फिर किसी को कुछ नहीं सूझा। अंकुश यादव ने अपनी बेटी और बाकी बच्चों को बचाने के लिए गेट पर लगे कांच को अपने हाथ से ही तोड़ दिया। बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। आग तेजी से फैल रही थी। बाकी लोग भी बदहवास होकर यहां-वहां अपने बच्चों को बचाने में जुटे थे। वे धीरे धीरे अपने बच्चों को बाहर ले जाने लगे। इन सबके बावजूद अंकुश अपनी एक बेटी को नहीं बचा पाए। दूसरी अस्पताल में अभी भी जिंदगी-मौत की जंग लड़ रही है।
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बच्ची के पिता का नाम अंकुश यादव है। उन्होंने बताया कि हादसे के महज 2 घंटे पहले ही एक निजी अस्पताल में उनकी जुड़वां बेटियां पैदा हुई थीं। एक बेटी स्वस्थ थी जबकि एक का वजन कम होने की वजह से डॉक्टर्स ने उन्हें कमला नेहरू अस्पताल में रेफर कर दिया था। अंकुश अपनी बेटियों को अस्पताल में भर्ती कर बाहर निकले ही थे कि अस्पताल में आग लग गई। ये देखते ही बदहवास अंकुश उल्टे-पैर अस्पताल की तरफ भागे। वो भागते हुए खुद अस्पताल की तीसरी मंजिल पर पहुंचे। अपनी आंखों के अपनी नवजात कोमल सी बच्ची को भी आग की लपटों और धुएं में मरते देखा।
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अपनी आंखों के सामने देखी बेटी की मौत
अंकुश यादव ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वार्ड में आग लग चुकी थी। उन्होंने वहां मौजूद स्टाफ से कहा कि आग लग गई है। बच्चों को बाहर निकालो। पहले तो स्टाफ के लोगों ने उन्हें वॉर्ड में अंदर नहीं घुसने दिया। जब हालात बेकाबू होने लगे तो फिर किसी को कुछ नहीं सूझा। अंकुश यादव ने अपनी बेटी और बाकी बच्चों को बचाने के लिए गेट पर लगे कांच को अपने हाथ से ही तोड़ दिया। बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। आग तेजी से फैल रही थी। बाकी लोग भी बदहवास होकर यहां-वहां अपने बच्चों को बचाने में जुटे थे। वे धीरे धीरे अपने बच्चों को बाहर ले जाने लगे। इन सबके बावजूद अंकुश अपनी एक बेटी को नहीं बचा पाए। दूसरी अस्पताल में अभी भी जिंदगी-मौत की जंग लड़ रही है।
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