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Gwalior News: ग्वालियर-चंबल अंचल की सबसे बड़ी होलिका, गायों के 25 हजार कंडों से जलेगी, सात दशक की परंपरा
Thu, 13 Mar 2025 04:06 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: ग्वालियर ब्यूरो
Updated Thu, 13 Mar 2025 04:06 PM IST
सार
ग्वालियर के सराफा बाजार में 70 वर्षों से होलिका दहन का आयोजन हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के तहत इसे लकड़ी के बजाय 25 हजार गोबर कंडों से तैयार किया गया है। यह पहल पेड़ों की कटाई रोकने और पारंपरिक त्योहार को संरक्षित रखने का संदेश देती है।
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25 हजार कंडों से सजाई गई ग्वालियर-चंबल की सबसे बड़ी होली
विस्तार
ग्वालियर शहर में होली की तैयारियां जोरों पर हैं। आज रात बुराई के प्रतीक होलिका दहन का आयोजन होगा। शहर के प्रमुख चौराहों और घरों में इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल अंचल की सबसे बड़ी होलिका सराफा बाजार में तैयार की गई है, जहां करीब 25 हजार गोबर के कंडों से होली का निर्माण किया गया है। इस अनोखी होलिका को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सराफा बाजार पहुंचते हैं।
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बीते 70 वर्षों से सराफा बाजार के व्यापारियों द्वारा इस भव्य होलिका दहन का आयोजन किया जा रहा है। व्यापारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे रात 11 बजे होलिका की पूजा करेंगे, जिसके बाद दहन की परंपरा निभाई जाएगी।
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इस अनूठी होलिका की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह गोबर के कंडों से तैयार किया गया है। आयोजकों का कहना है कि पारंपरिक रूप से लोग होलिका दहन के लिए लकड़ी का उपयोग करते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। बड़ी होली के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पेड़ काटे जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सराफा बाजार में गोबर के कंडों का उपयोग कर होलिका तैयार की जाती है, जिससे पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता।
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इस पहल के माध्यम से व्यापारी और स्थानीय लोग एक महत्वपूर्ण संदेश देना चाहते हैं कि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण को साथ-साथ रखा जा सकता है। यह न केवल एक पर्यावरण अनुकूल प्रयास है, बल्कि अन्य लोगों को भी जागरूक करने का एक सार्थक तरीका है। इस प्रकार, ग्वालियर की यह होली न सिर्फ रंगों का त्योहार होगी, बल्कि पर्यावरण सरंक्षण का संदेश भी देगी।
