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MP News: पीएचई घोटाले में 74 लोगों पर केस होने के बाद SIT गठित, 16 करोड़ का घोटाला जांच में 33 करोड़ तक पहुंचा
Wed, 20 Sep 2023 07:35 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 20 Sep 2023 07:35 PM IST
सार
ग्वालियर के पीएचई विभाग में 16 करोड़ 24 लाख रुपये के घोटाला सामने आया था, पर जांच के दौरान घोटाले की रकम 33 करोड़ 80 लाख तक पहुंच गई है। मामले में अब तक पीएचई के पांच बड़े अफसरों सहित 74 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पीएचई विभाग में हुए घोटाले की जांच अब एसआईटी करेगी। 16 करोड़ 24 लाख रुपये के घोटाला सामने आया था, पर जांच के दौरान घोटाले की रकम 33 करोड़ 80 लाख तक पहुंच गई है। मामले में अब तक पीएचई के पांच बड़े अफसरों सहित 74 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। अनुमान है घोटाला 50 करोड रुपये का हुआ है ।
जानकारी के मुताबिक 27 जुलाई को वित्त विभाग ने 71 खातों में 16 करोड़ 42 लाख 13 हजार 853 रुपये का अनियमित भुगतान होने के संदेह में जांच के निर्देश दिए थे। अंतरिम जांच रिपोर्ट 23 अगस्त को प्रस्तुत की गई। इसमें घोटाले की राशि 18 करोड़ 92 लाख 25 हजार 399 रुपए तक पहुंच गई थी। पीएचई विभाग के संधारण खंड -1 में हुए घोटाले की राशि बढ़कर 33 करोड़ 80 लाख रुपए तक पहुंच गई है। पांच सदस्यीय विभागीय टीम की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। घोटाले की राशि बढ़ने पर ही अब दोनों टीम अपनी जांच का दायरा और बढ़ाना चाहती हैं।
अब इस मामले में ग्वालियर थाना क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज होने के बाद ग्वालियर एसपी राजेश सिंह ने घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है और उसकी कमान भी आईपीएस अधिकारी ऋषिकेश मीणा को सौंपी गई है। शुरुआती दौर में घोटाले के मास्टरमाइंड पंप ऑपरेटर हीरालाल और उसके भतीजे कंप्यूटर ऑपरेटर और एक अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। अब ट्रेजरी विभाग से मिली रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने पीएचई के पांच अधिकारियों सहित 74 लोगों के नाम एफआईआर में बढ़ाए हैं और संभावना व्यक्त की जा रही है एफआईआर का आंकड़ा 100 को पार कर सकता है और घोटाले की रकम भी 50 करोड़ हो सकती है।
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गौरतलब है कि पीएचई विभाग में घोटाले का खेल पिछले पांच सालों से जारी था। मृतक और रिटायर्ड कर्मचारियों के खातों में फेरबदल कर घोटाले की रकम ट्रांसफर कर बंदरबांट किया जा रहा था। घोटाले की रकम को फर्जी तरीके से 74 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। वहीं ट्रेजरी विभाग से मिली रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ है कि 65 खातेदारों के 81 खातों में फर्जी तरीके से भुगतान हुआ था। अब घोटाले की रकम 33 करोड़ 80 लाख रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में मुख्य अभियंता पीएचई का कहना है कि चूंकि वित्त व पीएचई की जांच रिपोर्ट में राशि में काफी अंतर है। इसलिए ईएनसी से चर्चा कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक 27 जुलाई को वित्त विभाग ने 71 खातों में 16 करोड़ 42 लाख 13 हजार 853 रुपये का अनियमित भुगतान होने के संदेह में जांच के निर्देश दिए थे। अंतरिम जांच रिपोर्ट 23 अगस्त को प्रस्तुत की गई। इसमें घोटाले की राशि 18 करोड़ 92 लाख 25 हजार 399 रुपए तक पहुंच गई थी। पीएचई विभाग के संधारण खंड -1 में हुए घोटाले की राशि बढ़कर 33 करोड़ 80 लाख रुपए तक पहुंच गई है। पांच सदस्यीय विभागीय टीम की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। घोटाले की राशि बढ़ने पर ही अब दोनों टीम अपनी जांच का दायरा और बढ़ाना चाहती हैं।
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अब इस मामले में ग्वालियर थाना क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज होने के बाद ग्वालियर एसपी राजेश सिंह ने घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है और उसकी कमान भी आईपीएस अधिकारी ऋषिकेश मीणा को सौंपी गई है। शुरुआती दौर में घोटाले के मास्टरमाइंड पंप ऑपरेटर हीरालाल और उसके भतीजे कंप्यूटर ऑपरेटर और एक अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। अब ट्रेजरी विभाग से मिली रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने पीएचई के पांच अधिकारियों सहित 74 लोगों के नाम एफआईआर में बढ़ाए हैं और संभावना व्यक्त की जा रही है एफआईआर का आंकड़ा 100 को पार कर सकता है और घोटाले की रकम भी 50 करोड़ हो सकती है।
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गौरतलब है कि पीएचई विभाग में घोटाले का खेल पिछले पांच सालों से जारी था। मृतक और रिटायर्ड कर्मचारियों के खातों में फेरबदल कर घोटाले की रकम ट्रांसफर कर बंदरबांट किया जा रहा था। घोटाले की रकम को फर्जी तरीके से 74 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। वहीं ट्रेजरी विभाग से मिली रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ है कि 65 खातेदारों के 81 खातों में फर्जी तरीके से भुगतान हुआ था। अब घोटाले की रकम 33 करोड़ 80 लाख रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में मुख्य अभियंता पीएचई का कहना है कि चूंकि वित्त व पीएचई की जांच रिपोर्ट में राशि में काफी अंतर है। इसलिए ईएनसी से चर्चा कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
