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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Gwalior News ›   If you want your son's body, first pay Rs 500 for two shrouds, shameful act of the biggest government hospital

शर्मनाक: 'पहले कफन के 500 रुपये जमा कराओ, फिर मिलेगी बेटे की लाश', मप्र के बड़े सरकारी अस्पताल की ओछी करतूत

Fri, 05 Sep 2025 06:59 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: ग्वालियर ब्यूरो Updated Fri, 05 Sep 2025 06:59 PM IST
सार

ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह में सड़क हादसे के शिकार 19 वर्षीय युवक की मौत के बाद शव सौंपने से पहले कफन के लिए परिजनों से 500 रुपये मांगे गए। लापरवाहीपूर्ण इलाज और इस अमानवीय वसूली पर हंगामा हुआ। मामले में जांच शुरू कर आउटसोर्स कर्मचारी को हटाया गया है। 

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If you want your son's body, first pay Rs 500 for two shrouds, shameful act of the biggest government hospital
ग्वालियर के अस्पताल की शर्मनाक हरकत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार जयारोग्य अस्पताल समूह के हजार बिस्तर अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार कर देने की एक घटना सामने आई है। मुरैना निवासी 19 वर्षीय युवक कृष्णा श्रीवास की अस्पताल में हुई मौत के बाद परिजन गम में डूबे हुए थे, इस पर भी पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपने से पहले कफन के लिए 500 रुपये मांगे गए।

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आरोप है कि उससे पैसे वसूलने के बाद ही परिजनों क़ो शव दिया गया। इस मामले में मृतक के मामा भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के संभागीय मीडिया प्रभारी पवन सेन ने सीएम डॉ. मोहन यादव को इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट भी की। इसमें उन्होंने लिखा कि सड़क दुर्घटना में मृत के परिजन से कफन के पैसे मत मांगो सरकार, मुख्यमंत्री जी ध्यान दीजिए। सरकारी डॉक्टरों की बंगलों पर दुकान को बंद करवाइए, ग्वालियर ट्रामा सेंटर का भगवान ही मालिक है।
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बता दें कि कृष्णा श्रीवास को सड़क हादसे में घायल होने पर 30 अगस्त को गंभीर चोटें आई थीं। स्वजन उसे जयारोग्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर लेकर आए, लेकिन यहां उसका इलाज लापरवाही की भेंट चढ़ गया। कृष्णा के मामा पवन सेन ने बताया कि उसके पैर में फ्रैक्चर था लेकिन प्लास्टर चढ़ाने में ही दो दिन लगा दिए। इलाज भी ठीक से नहीं मिला। ट्रामा सेंटर में सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति के चलते पूरा जिम्मा जूनियर डॉक्टरों पर था, जो ना पर्याप्त अनुभव रखते हैं और ना ही जल्दी निर्णय ले पाते हैं।



किसी ने नहीं की सुनवाई
पवन सेन ने बताया कि कृष्णा की मौत के बाद स्वजन शव लेने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। यहां कर्मचारियों ने पीड़ित परिवार से 500 रुपये की मांग की। जब स्वजन ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना को जानकारी दी, तब भी हालात नहीं बदले। अंततः मजबूरी में परिवार को पैसे देने पड़े।

मामले में जेएएच के सहायक अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र वर्मा का कहना है कि अगर पोस्टमार्टम हाउस में कफन के लिए पैसे लिए गए हैं तो यह पूरी तरह गलत है। विभाग प्रमुख से जवाब तलब किया गया। साथ ही ट्रामा सेंटर में सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी संबंधी रोस्टर भी मंगाया गया है। प्रथम दृष्टया जांच के बाद वक आउटसोर्स कर्मचारी क़ो सेवा से हटा दिया गया है।

 

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