ग्वालियर: शहर की सड़कों के बाद नेशनल हाईवे की टेस्टिंग, हाईकोर्ट की टीम ने जेसीबी से खुदवाई सड़क
ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे की जांच शुरू हुई। विशेष टीम ने सड़क खुदवाकर डामर, गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए, जिनकी प्रयोगशाला में तकनीकी जांच होगी।
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ग्वालियर में एक साल के भीतर 12 से ज्यादा सड़कों के धंसने और निर्माण गुणवत्ता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब हाईकोर्ट की जांच का दायरा नेशनल हाईवे तक पहुंच गया है। गुरुवार को हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर मेहरा टोल प्लाजा और सिकरौदा चौराहे के बीच सड़क को जेसीबी से खुदवाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच शुरू की।
जांच के दौरान सड़क की अलग-अलग परतों को हटाकर डामर, गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए गए। इन सैंपलों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। यहां विशेषज्ञ यह जांच करेंगे कि सड़क निर्माण में तय तकनीकी मानकों और स्वीकृत सामग्री का पालन किया गया था या नहीं।
हाईकोर्ट के निर्देश पर एनएचएआई के अधीन आने वाली सड़क को मौके पर खुदवाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच करने की यह पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जांच टीम की मौजूदगी में जेसीबी से सड़क की परतें हटाई गईं, ताकि कागजों में दर्ज निर्माण मानकों और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके।
दरअसल, ग्वालियर में लगातार सड़कों के धंसने, गड्ढे बनने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शहर में बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल हैं और कई सड़कें निर्माण के कुछ समय बाद ही खराब होने लगी हैं।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केवल संबंधित विभागों की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र और तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए। इसके तहत वकीलों और तकनीकी विशेषज्ञों की चार सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की गई।
इस टीम ने पहले ग्वालियर शहर की कई प्रमुख सड़कों का निरीक्षण किया। विक्की फैक्टरी से झांसी रोड, चेतकपुरी-सिंधिया महल गेट और चेतकपुरी से एजी ऑफिस पुल मार्ग सहित कई स्थानों पर सड़क की सतह और निर्माण गुणवत्ता की जांच की गई। 19 अगस्त को गुढ़ी-गुढ़ा नाका और बेटी बचाओ चौराहे से कोर सैंपल भी लिए गए थे।
जांच प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष रखने के लिए सैंपलिंग की लोकेशन पहले से सार्वजनिक नहीं की जा रही है। संबंधित सड़क का चयन सैंपल लेने से कुछ समय पहले किया जाता है, ताकि निर्माण एजेंसियों को पहले से किसी तरह की तैयारी का मौका न मिले।
इससे पहले जांच टीम ने शहर की सड़कों की हाईटेक स्कैनिंग भी कराई थी। लेजर कैमरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से सड़क की सतह, समतलीकरण और डामर की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। अब आगरा-मुंबई हाईवे से लिए गए नमूनों की जांच पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला, ग्वालियर में होगी। यहां डामर की मात्रा, गिट्टी की गुणवत्ता, कॉम्पैक्शन और सड़क की अलग-अलग परतों की मजबूती की वैज्ञानिक जांच की जाएगी।
जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश होने के बाद यह साफ हो सकेगा कि ग्वालियर की सड़कों के बार-बार धंसने के पीछे तकनीकी खामी है, निर्माण में गुणवत्ता की कमी है या फिर नियमों की अनदेखी की गई है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट में पेश होने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है।
