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सौगात: तानसेन की स्मृतियों को सहेजने ग्वालियर में बनेगा 'म्यूजियम ऑफ म्यूजिक', 19.18 करोड़ रुपये होंगे खर्च
Mon, 05 Oct 2026 07:48 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 05 Oct 2026 07:48 PM IST
सार
ग्वालियर के ऐतिहासिक मोतीमहल परिसर में तानसेन की स्मृतियों और भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत को सहेजने के लिए ‘म्यूजियम ऑफ म्यूजिक’ बनाया जाएगा। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने परियोजना के लिए 19.18 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। दोमंजिला भवन में तानसेन के जीवन और संगीत साधना से जुड़ी गैलरी विकसित की जाएंगी।
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ग्वालियर के मोतीमहल में म्यूजियम ऑफ म्यूजिक बनाया जाएगा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संगीत सम्राट तानसेन की स्मृतियों और भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत को सहेजने के लिए ऐतिहासिक मोतीमहल परिसर में 'म्यूजियम ऑफ म्यूजिक' का निर्माण किया जाएगा। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने इस संग्रहालय के निर्माण हेतु 19.18 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है। पर्यटन बोर्ड ने परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके अंतर्गत तकनीकी बोली की जांच पूरी की जा चुकी है। अब वित्तीय बोली की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अंतिम रूप से चयनित एजेंसी को निर्माण कार्य का वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया और निर्माण योजना
अधिकारियों को उम्मीद है कि वित्तीय बोली की प्रक्रिया इसी महीने पूरी कर ली जाएगी। प्रक्रिया पूरी होते ही चयनित कंपनी काम की शुरुआत करेगी। इस पूरी परियोजना की थीम संगीत और भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा पर आधारित होगी। संग्रहालय के माध्यम से तानसेन के जीवन, उनकी संगीत साधना और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण स्मृतियों को विशेष गैलरी के जरिये प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यटन बोर्ड का उद्देश्य इस स्थल को शास्त्रीय संगीत के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
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दोमंजिला भवन में बनेंगी दीर्घाएं
म्यूजियम ऑफ म्यूजिक का निर्माण मोतीमहल परिसर में स्थित संभागायुक्त के पुराने कार्यालय के हॉल और कमरों में किया जाएगा। यह एक दोमंजिला भवन है। पूर्व में आग लगने की घटना के पश्चात संभागायुक्त कार्यालय को मोतीमहल के दूसरे हिस्से में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद खाली हुए इस हिस्से को संग्रहालय के रूप में उपयोग करने की योजना बनाई गई। इस भवन के दोनों तल पर अलग-अलग गैलरी और प्रदर्शनी क्षेत्र बनाए जाएंगे, जहां विभिन्न प्रदर्शनियां आयोजित होंगी।
मोतीमहल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मोतीमहल ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत का एक मुख्य अंग है। सिंधिया राजवंश के दौरान निर्मित यह भवन लंबे समय तक राजपरिवार की गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा रहा। स्वतंत्रता के बाद भी मोतीमहल का महत्व बना रहा और यहां कई महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय चलते रहे। यह परिसर ग्वालियर संभाग के प्रशासनिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए रहा। अपनी भव्य वास्तुकला, विशाल परिसर और ऐतिहासिक महत्व के कारण मोतीमहल शहर के प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल है। अब संगीत संग्रहालय बनने से इसकी ऐतिहासिकता को नया आयाम प्राप्त होगा।
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टेंडर प्रक्रिया और निर्माण योजना
अधिकारियों को उम्मीद है कि वित्तीय बोली की प्रक्रिया इसी महीने पूरी कर ली जाएगी। प्रक्रिया पूरी होते ही चयनित कंपनी काम की शुरुआत करेगी। इस पूरी परियोजना की थीम संगीत और भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा पर आधारित होगी। संग्रहालय के माध्यम से तानसेन के जीवन, उनकी संगीत साधना और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण स्मृतियों को विशेष गैलरी के जरिये प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यटन बोर्ड का उद्देश्य इस स्थल को शास्त्रीय संगीत के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
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दोमंजिला भवन में बनेंगी दीर्घाएं
म्यूजियम ऑफ म्यूजिक का निर्माण मोतीमहल परिसर में स्थित संभागायुक्त के पुराने कार्यालय के हॉल और कमरों में किया जाएगा। यह एक दोमंजिला भवन है। पूर्व में आग लगने की घटना के पश्चात संभागायुक्त कार्यालय को मोतीमहल के दूसरे हिस्से में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद खाली हुए इस हिस्से को संग्रहालय के रूप में उपयोग करने की योजना बनाई गई। इस भवन के दोनों तल पर अलग-अलग गैलरी और प्रदर्शनी क्षेत्र बनाए जाएंगे, जहां विभिन्न प्रदर्शनियां आयोजित होंगी।
मोतीमहल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मोतीमहल ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत का एक मुख्य अंग है। सिंधिया राजवंश के दौरान निर्मित यह भवन लंबे समय तक राजपरिवार की गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा रहा। स्वतंत्रता के बाद भी मोतीमहल का महत्व बना रहा और यहां कई महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय चलते रहे। यह परिसर ग्वालियर संभाग के प्रशासनिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए रहा। अपनी भव्य वास्तुकला, विशाल परिसर और ऐतिहासिक महत्व के कारण मोतीमहल शहर के प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल है। अब संगीत संग्रहालय बनने से इसकी ऐतिहासिकता को नया आयाम प्राप्त होगा।
