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गुना: गले में तख्तियां, हाथ में आवेदन और आंखों में उम्मीद; 5 बीघा जमीन के लिए जनसुनवाई पहुंचा आदिवासी परिवार
Tue, 22 Sep 2026 04:40 PM IST
गुना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: गुना ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 04:40 PM IST
सार
गुना कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में धनोरिया गांव की विधवा आदिवासी महिला सुशीला बाई सहरिया परिवार के साथ जमीन वापस दिलाने की मांग लेकर पहुंचीं। महिला ने गांव के ही सरवन धाकड़ पर करीब पांच वर्षों से पांच बीघा जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया। प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की।
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गले में आवेदनों की माला पहनकर पहुंचा आदिवासी परिवार
विस्तार
गुना कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक आदिवासी परिवार अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग को लेकर पहुंचा। फतेहगढ़ क्षेत्र के धनोरिया गांव की रहने वाली विधवा महिला सुशीला बाई सहरिया अपने परिवार के सदस्यों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचीं। परिवार के लोगों ने गले में तख्तियां डाल रखी थीं और हाथों में आवेदन लेकर अधिकारियों से अपनी समस्या पर कार्रवाई की मांग की।
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सुशीला बाई ने जनसुनवाई में दिए आवेदन में बताया कि धनोरिया गांव में करीब पांच बीघा कृषि भूमि उसके दिवंगत पति घासीलाल सहरिया के नाम दर्ज है। महिला के मुताबिक, इसी जमीन पर परिवार लंबे समय से खेती करता आ रहा था। खेत में सिंचाई के लिए बोरिंग और बिजली की डीपी भी लगी हुई है। महिला का कहना है कि खेती से होने वाली आमदनी ही परिवार के भरण-पोषण का प्रमुख जरिया थी।
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महिला ने अपने आवेदन में गांव के ही सरवन धाकड़ पर करीब पांच वर्षों से जमीन पर जबरन कब्जा किए जाने का आरोप लगाया है। सुशीला बाई के अनुसार, परिवार जब भी अपनी जमीन पर जाने या खेती करने का प्रयास करता है, तो कथित रूप से विवाद की स्थिति बन जाती है। महिला ने गाली-गलौज और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। सुशीला बाई का कहना है कि उनके पति के जीवित रहते भी इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी। उनके मुताबिक, फतेहगढ़ थाना और बमोरी तहसील स्तर पर लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
महिला ने अधिकारियों को बताया कि पति की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उसके ऊपर आ गई है। ऐसे में कृषि भूमि उसके लिए केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का आधार है। महिला का कहना है कि यदि जमीन वापस नहीं मिली तो बच्चों के पालन-पोषण और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।
जनसुनवाई में परिवार ने प्रशासन से जमीन से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने, मौके की स्थिति का सत्यापन करने और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो कथित कब्जे से जमीन मुक्त कराने की मांग की। परिवार ने अधिकारियों से मामले में निष्पक्ष जांच कर राहत दिलाने की गुहार लगाई है।

जनसुनवाई में आदिवासी परिवार
