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गुना: फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में राजनीतिक मुद्दों पर प्रस्तुति, मचा बवाल, मानवाधिकार आयोग ने दिए जांच के आदेश
Sat, 17 Oct 2026 08:16 AM IST
गुना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: गुना ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2026 08:16 AM IST
सार
गुना के एक निजी स्कूल में छात्रा की सामाजिक-राजनीतिक संदेशों वाली फैंसी ड्रेस प्रस्तुति पर विवाद बढ़ गया है। ABVP और सकल हिंदू समाज ने प्रदर्शन किए, जबकि NHRC के नाम से जारी पत्र में दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही गई है।
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निजी स्कूल के फैंसी ड्रेस कॉम्पटीशन में छात्रा की प्रस्तुति
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहर के एक निजी विद्यालय में आयोजित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता अब शिक्षा, बच्चों की अभिव्यक्ति और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी से जुड़े विवाद का रूप ले चुकी है। प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में एक छात्रा की प्रस्तुति को लेकर शुरू हुआ विरोध अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और सकल हिंदू समाज ने आपत्ति जताते हुए विद्यालय के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नाम से जारी पत्र में भी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा गया है।
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मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई, जब गुना के क्राइस्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम में बच्चों ने अलग-अलग वेशभूषा धारण कर अपनी प्रस्तुतियां दीं। इसी दौरान एक छात्रा की प्रस्तुति चर्चा का विषय बन गई।
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छात्रा स्कूल यूनिफॉर्म में मंच पर पहुंची थी। उसके चेहरे पर पट्टी बंधी थी और उसके हाथ में एक तख्ती थी, जिस पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को स्कूली हाजिरी के रूप में दर्शाया गया था। प्रस्तुति में बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, भ्रष्टाचार, नफरत, आतंकवाद, पेपर लीक और घोटालों जैसे विषयों का उल्लेख किया गया। इसके विपरीत लोकतंत्र को अनुपस्थित दिखाया गया, जबकि वोट चोरी जैसे आरोपों को भी तख्ती पर स्थान दिया गया था।
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छात्रा की पीठ पर लगी दूसरी तख्ती में सवाल पूछने वाले बच्चों, शिक्षा और लोकतांत्रिक जागरूकता के महत्व से जुड़ा संदेश लिखा था। प्रस्तुति का मूल भाव यह था कि यदि बच्चों में सवाल पूछने और विचार करने की प्रवृत्ति समाप्त हो जाए तो शिक्षा केवल किताबों तक सीमित रह सकती है। हालांकि इसी संदेश को लेकर अलग-अलग संगठनों ने आपत्ति जताई और विद्यालय की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
प्रस्तुति के सामने आने के बाद गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विद्यालय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के प्रतिनिधियों ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की। आपत्ति इस बात को लेकर जताई गई कि विद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रम में इस प्रकार की राजनीतिक विषयवस्तु वाली प्रस्तुति कैसे शामिल हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
विवाद बढ़ने के बाद विद्यालय प्रबंधन ने अपना पक्ष सामने रखा। स्कूल की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि प्रस्तुति में व्यक्त विचारों से संस्थान का कोई संबंध नहीं है। प्रबंधन के अनुसार छात्रा को उसके अभिभावकों ने तैयार करके कार्यक्रम में भेजा था। इस तरह विद्यालय ने प्रस्तुति की जिम्मेदारी से खुद को अलग बताया और अभिभावकों की भूमिका की ओर संकेत किया।
इस स्पष्टीकरण के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ और शुक्रवार को सकल हिंदू समाज के कार्यकर्ताओं ने विद्यालय के बाहर प्रदर्शन कर स्कूल का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि मामले में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि उचित कदम नहीं उठाए जाने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
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विद्यालय के बाहर हो रहे विरोध के बीच मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नाम भी जुड़ गया है। उपलब्ध कराए गए पत्र के अनुसार आयोग के विधि प्रभाग ने 16 अक्टूबर को मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, गुना कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है और संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में नाबालिग विद्यार्थियों को कथित तौर पर वैचारिक और राजनीतिक संदेशों वाली गतिविधियों में शामिल किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण और शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त शिकायत में एक अन्य कथित घटना का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि राष्ट्रीय गान के बाद एक छात्र द्वारा राष्ट्रीय नारा लगाए जाने पर उसे दंडित किया गया था। शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं को बच्चों के अधिकारों और विद्यालय की शैक्षणिक जिम्मेदारियों से जोड़ते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।
महत्वपूर्ण यह है कि ये सभी बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं, इन्हें जांच में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। आयोग के नाम से जारी पत्र के अनुसार संबंधित अधिकारियों को आरोपों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ रिपोर्ट की प्रति निर्धारित ई-मेल पते पर भेजने को भी कहा गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने विद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक गतिविधियों की विषयवस्तु, बच्चों की भागीदारी और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि विद्यालयों को शैक्षणिक गतिविधियों में जिम्मेदारी और सतर्कता बरतनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता से शुरू हुआ यह विवाद स्कूल परिसर से निकलकर प्रशासनिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष यह तय करने में अहम होंगे कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
