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भाजपा में बढ़ी तकरार?: केंद्रीय मंत्री के घर के बाहर हड़ताल के एलान पर विधायक को नोटिस, सिंघार ने उठाए सवाल
Tue, 06 Oct 2026 11:53 AM IST
धार ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: धार ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:53 AM IST
सार
धरमपुरी से भाजपा विधायक कालू सिंह ठाकुर को अपनी ही पार्टी की केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के धार स्थित निवास के बाहर भूख हड़ताल का ऐलान करने पर प्रदेश नेतृत्व ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायक के आचरण को अत्यंत आपत्तिजनक और पार्टी अनुशासन के विपरीत बताया है।
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केंद्रीय राज्य मंत्री और विधायक आमने-सामने
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
धार जिले की धरमपुरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक कालू सिंह ठाकुर द्वारा अपनी ही पार्टी की केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के निवास के बाहर भूख हड़ताल का एलान करना अब भारी पड़ता नजर आ रहा है। पार्टी अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने विधायक को कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी पत्र में विधायक कालू सिंह ठाकुर के इस आचरण को ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ और ‘पार्टी अनुशासन के विपरीत’ बताया गया है। पत्र के माध्यम से विधायक को निर्देशित किया गया है कि वे तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण दें, अन्यथा उनके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या था पूरा मामला
बता दें कि धरमपुरी विधायक कालू सिंह ठाकुर ने धामनोद नगर पालिका सीएमओ द्वारा जनहित के मुद्दों पर सुनवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया था। इसी के विरोध में विधायक ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के धार स्थित निवास के बाहर भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान किया था। इस घटना के बाद से ही जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई थी।
कलेक्टर ने बुलाई हाईलेवल बैठक
इस सियासी भूचाल के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने तुरंत संज्ञान लेते हुए धामनोद नगर परिषद की सीएमओ माया मंडलोई, सीवरेज ठेकेदार और पार्षदों को तलब किया। बैठक में कांग्रेस के छह और भाजपा के दो पार्षद शामिल हुए और उन्होंने अपना पक्ष रखा। बैठक के दौरान सीएमओ माया मंडलोई ने सफाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा 22 विकास कार्यों के कार्यादेश (Work Order) जारी किए जा चुके हैं, लेकिन संबंधित ठेकेदार द्वारा काम पूरा नहीं किया जा रहा है। इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी गई है।
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ये भी पढ़ें- आस्था, कला और हुनर का संगम: सागर में 50 साल से बन रही दुर्गा प्रतिमाएं, देशभर में रहती है डिमांड
25 करोड़ के विकास कार्यों में एफडीआर मौजूद
सीएमओ ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ के आदेशानुसार उनकी पुनः धामनोद में पदस्थापना हुई है और लोकायुक्त से जुड़े तीन मामलों में उन्हें माननीय न्यायालय से स्टे प्राप्त है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर परिषद के खाते में विकास कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये की एफडीआर सुरक्षित रूप से मौजूद है। एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर विकास कार्यों और ठेकेदार की लापरवाही को लेकर मंथन जारी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी विधायक को नोटिस मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उठाए सवाल
उमंग सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में आखिर चल क्या रहा है? भाजपा विधायक कालू सिंह ठाकुर अपनी ही पार्टी की केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर के घर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठने की बात कर रहे हैं। विधायक का आरोप है कि अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे, शिकायतों के बावजूद सीएमओ माया मंडलोई पर कार्रवाई नहीं हो रही और विकास कार्य ठप पड़े हैं। यानी विधायक की मंत्री नहीं सुन रही, अधिकारी विधायक की नहीं सुन रहे और सरकार के भीतर ही कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं! हो भी क्यों, जब मुख्यमंत्री न खुद किसी की सुनते है, न चलने देते हैं तो अधिकारी किसी की क्यों सुनेंगे? यह सिर्फ धामनोद का विवाद नहीं, पूरी सरकार और भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी, वर्चस्व की लड़ाई और “मैं बड़ा” की राजनीति का भयावह चेहरा है। जब सत्ताधारी दल के विधायक को अपनी ही सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल करनी पड़े, तो समझिए मध्यप्रदेश में शासन नहीं, सत्ता के भीतर संघर्ष चल रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, आपके इशारों और संरक्षण में चल रही भाजपा की इस आपसी खींचतान में मध्यप्रदेश की आम जनता पिस रही है।
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क्या था पूरा मामला
बता दें कि धरमपुरी विधायक कालू सिंह ठाकुर ने धामनोद नगर पालिका सीएमओ द्वारा जनहित के मुद्दों पर सुनवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया था। इसी के विरोध में विधायक ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के धार स्थित निवास के बाहर भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान किया था। इस घटना के बाद से ही जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई थी।
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कलेक्टर ने बुलाई हाईलेवल बैठक
इस सियासी भूचाल के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने तुरंत संज्ञान लेते हुए धामनोद नगर परिषद की सीएमओ माया मंडलोई, सीवरेज ठेकेदार और पार्षदों को तलब किया। बैठक में कांग्रेस के छह और भाजपा के दो पार्षद शामिल हुए और उन्होंने अपना पक्ष रखा। बैठक के दौरान सीएमओ माया मंडलोई ने सफाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा 22 विकास कार्यों के कार्यादेश (Work Order) जारी किए जा चुके हैं, लेकिन संबंधित ठेकेदार द्वारा काम पूरा नहीं किया जा रहा है। इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी गई है।
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25 करोड़ के विकास कार्यों में एफडीआर मौजूद
सीएमओ ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ के आदेशानुसार उनकी पुनः धामनोद में पदस्थापना हुई है और लोकायुक्त से जुड़े तीन मामलों में उन्हें माननीय न्यायालय से स्टे प्राप्त है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर परिषद के खाते में विकास कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये की एफडीआर सुरक्षित रूप से मौजूद है। एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर विकास कार्यों और ठेकेदार की लापरवाही को लेकर मंथन जारी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी विधायक को नोटिस मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उठाए सवाल
उमंग सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में आखिर चल क्या रहा है? भाजपा विधायक कालू सिंह ठाकुर अपनी ही पार्टी की केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर के घर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठने की बात कर रहे हैं। विधायक का आरोप है कि अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे, शिकायतों के बावजूद सीएमओ माया मंडलोई पर कार्रवाई नहीं हो रही और विकास कार्य ठप पड़े हैं। यानी विधायक की मंत्री नहीं सुन रही, अधिकारी विधायक की नहीं सुन रहे और सरकार के भीतर ही कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं! हो भी क्यों, जब मुख्यमंत्री न खुद किसी की सुनते है, न चलने देते हैं तो अधिकारी किसी की क्यों सुनेंगे? यह सिर्फ धामनोद का विवाद नहीं, पूरी सरकार और भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी, वर्चस्व की लड़ाई और “मैं बड़ा” की राजनीति का भयावह चेहरा है। जब सत्ताधारी दल के विधायक को अपनी ही सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल करनी पड़े, तो समझिए मध्यप्रदेश में शासन नहीं, सत्ता के भीतर संघर्ष चल रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, आपके इशारों और संरक्षण में चल रही भाजपा की इस आपसी खींचतान में मध्यप्रदेश की आम जनता पिस रही है।
