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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Dewas: I want to sell my kidney..so that arrangements for food and house can be made for the family...permission sought from CM

देवास: मैं अपनी किडनी बेचना चाहता हूं, ताकि बच्चों की फीस भर सकूं... सीएम से मांगी इजाजत

Wed, 15 Dec 2021 06:26 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Wed, 15 Dec 2021 06:26 PM IST
सार

मुख्यमंत्री से मांग कर लाचार शख्स का कहना है कि मैं किडनी बेचना चाहता हूं क्योंकि इससे जो रुपये मिलेंगे उससे छत की व्यवस्था हो जाएगी और बच्चों के स्कूल की फीस भर दूंगा। सरकार की किसी योजना का लाभ भी मुझे नहीं मिला है। जब तक मेरा उद्धार नहीं होगा मैं यहीं बैठा रहूंगा।

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Dewas: I want to sell my kidney..so that arrangements for food and house can be made for the family...permission sought from CM
इस तरह पोस्टर लगाकर बैठा है धरने पर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक शख्स अपनी किडनी बेचना चाहता है। इसके लिए मुख्यमंत्री से इजाजत मांग रहा है और धरने पर बैठा है। शरीर लकवाग्रस्त है और शासन की योजनाएं कागजों में सिमटी हैं। रुआंसे स्वरों में वह कहता है कि किडनी बेचकर जो रुपये मिलेंगे उससे बच्चों की स्कूल फीस भरेगा और रहने के लिए मकान बनाएगा।
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हालातों से हारे इस इंसान का नाम है संतोष सोनी, जो देवास के एबी रोड स्थित धरना स्थल पर बैठा है। आते-जाते लोग उसे देख रहे हैं और उसके पीछे लगे पोस्टर को पढ़ रहे हैं जिसमें उसने अपनी व्यथा लिखी है। दरअसल संतोष इटावा में रहते हैं और पैर लकवाग्रस्त हैं। उनका कहना है कि एक डॉक्टर की गलती से उसे इसकी सजा मिली है। गलत इलाज से लकवे ने जकड़ लिया। रहने को घर नहीं है और हालत ऐसी हो गई है कि कुछ काम भी नहीं कर सकता।
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उसने बताया कि तीन बच्चे हैं जिनको जैसे-तैसे पाल रहा हूं। बच्चे स्कूल जाते हैं मगर स्कूल से बार-बार फीस के लिए कहा जाता है। जब कुछ काम ही नहीं है तो तो पैसे कहां से लाऊंगा और कहां से फीस भरूंगा। संतोष का कहना है पहले मैं राशन दुकान की गाड़ी चलाता था जिससे घर चलता था। करीब आठ माह पहले बीमार हुआ और जिस डॉक्टर से इलाज करवाया उसके कारण लकवाग्रस्त हो गया। मैं चाहता हूं कि जिस डॉक्टर की वजह से ये हालत हुई है, उसको सजा मिले। मुझे छत की व्यवस्था हो जाए तो राहत मिलेगी। इसलिए मैं किडनी बेचना चाहता हूं, क्योंकि इससे जो रुपये मिलेंगे उससे छत की व्यवस्था हो जाएगी और बच्चों के स्कूल की फीस भर दूंगा। सरकार की किसी योजना का लाभ भी मुझे नहीं मिला है। जब तक मेरा उद्धार नहीं होगा मैं यहीं बैठा रहूंगा।
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