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Damoh News: 'रुक जाना नहीं' योजना के तहत परीक्षा देने वाले छात्रों को 75 किमी दूर जाकर हल करना होगा पेपर

Fri, 17 May 2024 04:37 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Fri, 17 May 2024 04:37 PM IST
सार

शिक्षा विभाग के संचालक पीके तिवारी का कहना है कि रुकना नहीं अभियान की परीक्षाएं हमेशा जिला स्तर पर आयोजित होती हैं। पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर कोई सेंटर नहीं बनाया गया है।

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Damoh Students appearing for exam under Ruk Jana Nahi scheme will have to go 75 km away to solve paper
परेशानी से अवगत कराते छात्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दमोह में रुक जाना नहीं योजना के तहत 20 मई से पेपर देने का दूसरा मौका छात्रों को मिल रहा है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह हो गई है कि दमोह की तेंदूखेड़ा तहसील के छात्रों को 75 से 80 किमी दूर दमोह जाकर परीक्षा देनी होगी, जो संभव नहीं है। ब्लॉक स्तर पर कोई परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है, जिन गांव में आवागमन के साधन नहीं हैं, वहां के छात्र दो बजे कैसे परीक्षा केंद्र पहुंचेंगे यह सबसे बड़ा सवाल है। इन छात्रों ने अब यही समस्या बताते हुए कुछ निराकरण करने की मांग की है। बता दें, कक्षा दसवीं और बारहवीं में फेल होने वाले छात्रों को शासन के द्वारा दूसरा मौका दिया जा रहा है।

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कक्षा दसवीं और बारहवी में फेल होने वाले जिन छात्रों को दूसरा मौका मिल रहा है, उनकी संख्या सैकड़ों में है। इनको दोपहर दो बजे दमोह जाकर परीक्षा देनी है। तेंदूखेड़ा ब्लॉक में ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां पर रहने वाले छात्रों को गांव से तेंदूखेड़ा आने में ही काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्योंकि उनके गांव में आज भी आवागमन की सुविधा नहीं है।
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तेंदूखेड़ा में सैलवाड़ा में आने-जाने के लिए कोई नियमित वाहन नहीं है। एक बस है, उसका भी समय तय नहीं है। दूसरा मार्ग इमलीडोल है, यहां कोई वाहन नहीं चलता। यदि बच्चे परीक्षा देने के लिए दमोह जाते भी हैं तो वहां से आने और घर जाने के लिए कोई साधन नहीं है। छात्रों ने बताया कि शासन ने हमें पास होने का दूसरा मौका दिया है। हम लोग मेहनत से परीक्षा पास भी कर लेंगे, लेकिन परीक्षा केंद्र तेंदूखेड़ा ब्लॉक की जगह दमोह में बनाया है, इससे हमें काफ़ी दूरी तय करनी पड़ेगी और उसमें काफ़ी समस्याएं हैं।
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परीक्षा केंद्र की दूरी है 70 से 75 किलोमीटर
तेंदूखेड़ा ब्लॉक से जो छात्र बोर्ड परीक्षा में असफल हुए हैं, उनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे हैं और आर्थिक कमजोर होने के साथ ऐसे स्थानों पर रहते हैं, जो तेंदूखेड़ा से काफ़ी दूर है। उन गांव में न तो सुबह के समय वाहन है न शाम के समय और इनके पास ऐसे कोई वाहन भी नहीं हैं, जो इतना लम्बा सफर तय कर सके। सर्रा गांव निवासी छात्र अमर सिंह ने बताया कि वह बोर्ड परीक्षा में पास नहीं हो पाया है, अब उसे परीक्षा देने के लिए दमोह जाना है। लेकिन सर्रा की दमोह से दूरी 70 किलोमीटर है और ऐसा कोई वाहन नहीं है, जो उसके गांव से सही समय दमोह पहुंचा सके।

इसी तरह कुछ छात्राएं हैं, जिनके घर में केवल माता-पिता हैं। वह भी प्रतिदिन मजदूरी पर आश्रित है। उनको भी परीक्षा देने दमोह जाना पड़ रहा है। यह बात सुनकर छात्रा और उसके माता-पिता मानसिक रूप से परेशान है। उनका कहना है यदि सेंटर तेंदूखेड़ा में होता, तब भी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब यह सेंटर दमोह में बनाया गया है, जो बड़ी समस्या है।यदि बेटी को परीक्षा दिलाने दमोह जाते हैं तो सुबह से उनके गांव से तेंदूखेड़ा पहुंचने कोई वाहन नहीं है और यदि पहुंच जाते हैं तो वापस घर आने कोई वाहन नहीं है।

सैकड़ों छात्र बोले, कैसे जाएंगे दमोह
तारादेही हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल में असफल हुए बच्चों ने मीडिया को अपनी परेशानी बताई। उन्होंने बताया कि हम लोग ऐसे गांव में रहते हैं, जो वनांचल क्षेत्र में है। इसमें चढ़ना, खारी, देवरी, कोटखेड़ा, झमरा, कोसमदा, यह वे गांव हैंं जहां से पहले तारादेही आना पड़ेगा। उसके बाद फिर बस मिलेगी तो दमोह जाना पड़ेगा और वापसी का कोई कोई साधन ऐसा नहीं है कि हम लोग सुरक्षित घर पहुंच सके। कई बच्चे तो ऐसे भी हैं, जिनके माता-पिता मजदूरी करने दूसरे राज्यों में हैं और बच्चे अपने रिश्तेदारों के घर रहकर पढ़ रहे हैं तो कई अकेले रहते हैं। आर्थिक स्थिति भी उनकी कमजोर है। ऐसे में वह बीस मई से शुरू होने वाली परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। इसलिए इन बच्चों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उनका परीक्षा सेंटर ब्लॉक स्तर पर बनाया जाए।


जिला शिक्षा अधिकारी बोले, मंजूरी नहीं मिली
75 से 80 किमी दूर बने परीक्षा केंद्र से छात्रों को होने वाली परेशानी के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी एसके नेमा ने कहा कि मैंने संचालक के पास प्रस्ताव भेजा था, जिसमें रुकना नहीं अभियान की परीक्षा के लिए ब्लॉक स्तर पर सेंटर बनाने की मांग की थी। लेकिन मंजूरी नहीं मिली इसलिए इस मामले में आप संचालक से ही बात करें। वहीं, शिक्षा विभाग के संचालक पीके तिवारी का कहना है कि रुकना नहीं अभियान की परीक्षाएं हमेशा जिला स्तर पर आयोजित होती है। पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर कोई सेंटर नहीं बनाया गया है। रहा दूरी का सवाल तो जो छात्र परीक्षा देने आएंगे, उनमें किसी के एक या दो पेपर होंगे, उनके रुकने की व्यवस्था जिला स्तर पर की गई है।

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