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Damoh News: डंपर की टक्कर से घायल दूसरे बेटे ने भी तोड़ा दम, 17 दिन पहले पिता और दो बच्चों को कुचल गया था वाहन

Wed, 17 Apr 2024 08:51 PM IST
दमोह ब्यूरो अमर उजाला, न्यूज डेस्क, दमोह
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Wed, 17 Apr 2024 08:51 PM IST
सार

दमोह के नरगवां गांव में 30 मार्च को डंपर की टक्कर से घायल हुए दूसरे बेटे मनीष आदिवासी ने भी दम तोड़ दिया। इस हादसे में एक भाई की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरे भाई और पिता को टक्कर मारता हुआ डंपर खेत में जा घुसा था।

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The second son, injured in a collision with a dumper in Damoh's Nargava village
मनीष आदिवासी

विस्तार

दमोह जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले नरगवां गांव में 30 मार्च को डंपर की टक्कर से घायल हुए दूसरे बेटे मनीष आदिवासी ने भी दम तोड़ दिया। इस हादसे में एक भाई की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरे भाई और पिता को टक्कर मारता हुआ डंपर खेत में जा घुसा था।दोनाें को जबलपुर रेफर किया गया था जहां पांच वर्षीय मासूम की हालत ठीक होने पर घर आ गया था, लेकिन मंगलवार की रात उसकी भी मौत हो गई।
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एक साथ दो बच्चों की मौत का सदमा माता-पिता नहीं झेल पा रहे, क्योंकि घटना के समय दोनों बेटे के साथ कुछ समय पहले ही हंस-खेल रहे थे और एक झटके में दोनों बच्चों की मौत हो गई।
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पिता के साथ खेत जा रहे थे बच्चे
घटना 30 मार्च की सुबह तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र के नरगुवां गांव की है। मनोज आदिवासी के दोनों बेटे शिवांक पांच वर्ष और मनीष सात वर्ष साइकिल से खेत की ओर जाने के लिए पिता के साथ निकले थे। तभी एक डंपर जबलपुर की ओर से आ रहा था, जो ढलान पर अनियंत्रित होते हुए शिवांक को कुचलता हुआ पिता-पुत्र को टक्कर मारने के बाद खेत में जा घुसा। इस घटना में शिवांक ने मौके पर दम तोड़ दिया और दूसरे बेटे मनीष और पिता मनोज आदिवासी के घायल होने पर गंभीर हालत में इलाज के लिए तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां दोनों की हालत गंभीर होने पर जबलपुर रेफर किया गया था।
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डॉक्टरों ने बेटे मनीष का एक पैर काटकर अलग कर दिया था और कुछ दिन इलाज के बाद उसे छुट्टी दे दी और वह घर आ गया। मंगलवार रात वह सोया तो उठा ही नहीं है। इस मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि डॉक्टर ने जिस पैर को काटा था उसमें इंफेक्शन हो गया था। स्वजन मासूम को लेकर दोबारा जबलपुर में डॉक्टर के पास गए, लेकिन वह डॉक्टर नहीं मिला और फिर मासूम बच्चे को लेकर अपने घर आ गए। मंगलवार शाम बेटा अच्छा था और पिता से बोला कि उसको चक्कर आ रहे हैं, वह पलंग पर सो गया उसके बाद बच्चा उठा ही नहीं। जब दिन रात तक बच्चा नहीं होता तो स्वजनों ने जगाया लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। बाद में स्वजन उसे स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए जहां डाक्टरों ने मासूम को मृत बता दिया। बुधवार सुबह तेंदूखेड़ा पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई करने के बाद मासूम बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों को सौंप दिया।
एक साथ दो बच्चों की मौत से परिवार के लोग सदमे में हैं और उनका रो रोकर बुरा हाल है। मृत बच्चों के दादा भी इस सदमे को नहीं भुला पा रहे। 
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