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Damoh News: 'अमृत भारत योजना' के तहत स्टेशन सुंदरीकरण से हरियाली को संकट, 70 साल पुराने पेड़ काटने की तैयारी

Fri, 11 Apr 2025 09:06 AM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Fri, 11 Apr 2025 09:06 AM IST
सार

अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशन के बाहर पहले से ही 400 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं और अब स्टेशन के बाहर 70 साल पुराने 10 पेड़ों को हटाने की योजना है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और रेल संघर्ष समिति के सदस्यों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है।

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Damoh News: Beautification of railway station under 'Amrit Bharat Yojana' is a threat to greenery
स्टेशन परिसर में खड़े 70 साल पुराने विशाल पेड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दमोह के रेलवे स्टेशन पर 'अमृत भारत योजना' के तहत सुंदरीकरण का काम किया जा रहा है, लेकिन हरियाली उजाड़ी जा रही है। रेलवे द्वारा पहले अधिकारियों के क्वार्टर बनाने के लिए बीते साल 400 पेड़ों को काट दिया गया। अब स्टेशन के बाहर लगे 70 साल पुराने 10 पेड़ों को काटने की तैयारी चल रही है। इस तैयारी के चलते आने वाले दिनों में रेलवे स्टेशन से हरियाली गायब हो जाएगी।
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दरअसल दमोह रेलवे स्टेशन पर 'अमृत भारत योजना' के तहत 25 करोड़ की लागत से पहले चरण का काम चल रहा है। इसके अंतर्गत स्टेशन के बाहर सर्कुलेटिंग एरिया को बढ़ाकर करीब 600 मीटर लंबा किया जा रहा है। इस सुंदरीकरण के नाम पर स्टेशन के बाहर लगे पीपल, नीम, अशोक, पारस पीपल सहित अन्य प्रजातियों के दस पेड़ काटे जाने का प्लान बनाया गया है। रेल संघर्ष समिति के प्रांजल चौहान, संतोष रैकवार ने बताया कि रेलवे द्वारा एक साल पहले भी ओवरब्रिज के बाजू से करीब आधा एकड़ के बगीचा में लगे 400 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया था। यहां पर अधिकारियों के लिए क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। उनकी जगह एक भी पेड़ नहीं लगाया गया। अब स्टेशन के बाहर बचे इन पेड़ों को काटे जाने से हरियाली गायब हो जाएगी। साथ ही स्टेशन की सुंदरता बढ़ने की बजाय कम हो जाएगी।
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यहां पूजन करने वाले दादा मूरत गिरी ने बताया कि वह यहां पर करीब 60 साल से पूजन कर रहे हैं। मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। यात्री आकर दर्शन करते हैं और ठहरते हैं। हमारी मांग है कि केवल एक छोटा सा मंदिर बना रहने दें। बाकी जगह हटा दी जाए। साथ ही यहां के पेड़ों को भी न काटा जाए, क्योंकि यह पेड़ वह बचपन से देखते आ रहे हैं। जो हजारों लोगों को शीतल छांव दे रहे हैं।
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नई जगह शिफ्ट होंगी मंदिर की मूर्तियां
इन पेड़ों के नीचे शिवजी, हनुमानजी का प्राचीन मंदिर है। यहां पर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। रेलवे द्वारा इन मंदिरों को भी तोड़कर वहां विराजमान मूर्तियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए कॉलोनी में बने पार्क में एक छोटा सा मंदिर बनवाया गया है। यहां पर केवल टीनशेड लगाया गया है। मंदिर को हटाने के लिए यहां के पुजारी को नोटिस देकर एक सप्ताह के अंदर जगह खाली करने के लिए कहा गया है।

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एक दिन में मिलती है 274 लीटर ऑक्सीजन
पर्यावरणविद डॉ. आलोक सोनलकर ने बताया कि पेड़ पौधे सभी जीवों का जीवन का आधार है। एक पीपल का पेड़ 24 घंटे में लगभग 274 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जो एक औसत व्यक्ति की जरूरत का लगभग आधा है। पेड़ों का संरक्षण होना आवश्यक है। रेलवे के सहायक मंडल अभियंता अनिल चौधरी ने बताया अमृत भारत योजना के तहत सर्कुलेटिंग एरिया को बढ़ाया जा रहा है, ताकि स्टेशन के बाहर भीड़ न लगे। इसमें एक-दो पेड़ को नुकसान हो सकता है। सभी पेड़ों को नहीं काटा जा रहा है। मंदिर को भी दूसरी जगह बनवा दिया गया है। जहां मूर्तियों को शिफ्ट किया जाएगा।
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