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Damoh News: पथरिया व बांसाकलां गांव में मिले डीपीटी के तीन मरीज, स्वास्थ्य अमले को दिए गए निर्देश
Tue, 15 Oct 2024 01:31 PM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Tue, 15 Oct 2024 01:31 PM IST
सार
MP: पथरिया नगर के वार्ड नंबर आठ एवं बांसाकला गांव में डीपीटी डिप्थीरिया (गलघोंटू) बीमारी से प्रभावित तीन मरीज सामने आए हैं। जानकारी लगते ही सोमवार शाम पथरिया सीबीएमओ डॉ. शशिकांत पटेल ने दोनों जगह भ्रमण किया।
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गांव में निरीक्षण करती टीम
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
जिले के पथरिया नगर के वार्ड नंबर आठ एवं बांसाकला गांव में डीपीटी डिप्थीरिया (गलघोंटू) बीमारी से प्रभावित तीन मरीज सामने आए हैं। जानकारी लगते ही सोमवार शाम पथरिया सीबीएमओ डॉ. शशिकांत पटेल ने दोनों जगह भ्रमण किया। साथ ही मरीज के परिजनों से जानकारी लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम लगाकर पूरे गांव और वार्ड का सर्वे और कार्य निरीक्षण किया गया। सर्वे के दौरान संभावित मरीजों को दवाई दी गई एवं टीम को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।
बता दें कि डिप्थीरिया रोग गले के पिछले हिस्से में एक मोटी परत बनाता है। इससे सांस लेने में समस्या, लकवा, दिल का दौरा आने की संभावना बन जाती है। मरीज के चिंहित होने पर सीबीएमओ
ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बांसाकला और उप स्वास्थ्य केन्द्र नंदरई, बोतराई, केवलारी में आयुष्मान आरोग्य शिविर का अवलोकन कर शिविर में दी जाने वाली सेवाओं के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
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यह कहलाता है डीपीटी
डिप्थीरिया (गलघोंटू) इसे डिप्थीरिया-पयूसि स-टिटनेस (डीपीटी) व टिटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) के नाम से जाना जाता है। इसमें बड़ों और बच्चों में काली खांसी और गलघोंटू जैसा रोग हो जाता है। इसे खत्म करने के लिए टीका लगाया जाता है। इस टीके से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह टीका लगाने के बाद इसका असर भी दिखाई देता है। बच्चों में बुखार आना, कमजोरी महसूस होना, जहां टीका लगता है वहां दर्द होना स्वाभाविक है। सीबीएमओ डॉक्टर पटेल ने बताया कि तीन मरीज अभी तक सामने आए हैं। जिनका इलाज चालू हो गया है ऐसे में अब संक्रमण नहीं बढ़ेगा।
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बता दें कि डिप्थीरिया रोग गले के पिछले हिस्से में एक मोटी परत बनाता है। इससे सांस लेने में समस्या, लकवा, दिल का दौरा आने की संभावना बन जाती है। मरीज के चिंहित होने पर सीबीएमओ
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ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बांसाकला और उप स्वास्थ्य केन्द्र नंदरई, बोतराई, केवलारी में आयुष्मान आरोग्य शिविर का अवलोकन कर शिविर में दी जाने वाली सेवाओं के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
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यह कहलाता है डीपीटी
डिप्थीरिया (गलघोंटू) इसे डिप्थीरिया-पयूसि स-टिटनेस (डीपीटी) व टिटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) के नाम से जाना जाता है। इसमें बड़ों और बच्चों में काली खांसी और गलघोंटू जैसा रोग हो जाता है। इसे खत्म करने के लिए टीका लगाया जाता है। इस टीके से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह टीका लगाने के बाद इसका असर भी दिखाई देता है। बच्चों में बुखार आना, कमजोरी महसूस होना, जहां टीका लगता है वहां दर्द होना स्वाभाविक है। सीबीएमओ डॉक्टर पटेल ने बताया कि तीन मरीज अभी तक सामने आए हैं। जिनका इलाज चालू हो गया है ऐसे में अब संक्रमण नहीं बढ़ेगा।
