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Damoh: उज्जैन के जिस अखाड़े में सीएम मोहन ने सीखा कुश्ती, उसी में पहलवान धर्मेंद्र ने चार साल की पहलवानी

Thu, 09 Jan 2025 10:17 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Thu, 09 Jan 2025 10:17 PM IST
सार

उज्जैन के जिस अखाड़े में मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुश्ती के दांव पेंच सीखे, उसी में दमोह के पहलवान धर्मेंद्र बंसल ने भी चार साल जोर आजमाइश की और अब दमोह में निशुल्क पहलवानी का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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Damoh Wrestler Dharmendra learned wrestling in same arena in Ujjain where CM Mohan learned wrestling
प्रशिक्षण देते पहलवान धर्मेंद्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उज्जैन के जिस अखाड़े में मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुश्ती के दांव पेंच सीखे, उसी में दमोह के पहलवान धर्मेंद्र बंसल ने भी चार साल जोर आजमाइश की। जब कुश्ती के दांव पेंच लगाने में अनुभवी हो गए तो एक दर्जन से ज्यादा मंचों पर प्रदर्शन किया। यहां तक कि मप्र स्तर पर कुश्ती में गोल्ड मेडल भी जीता। दमोह के चैनपुरा में रहने वाले धर्मेंद्र अब दमोह में कुश्ती के दाव-पेंच बच्चों को सिखा रहे हैं, वे पिछले दो साल से कुश्ती का निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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साल 2022 में उन्होंने दमोह जिला कुश्ती संघ के बैनर तले शहर के चैनपुरा बजरिया वार्ड 5 मानसपाठ रोड पर कुश्ती का अखाड़ा खोलकर स्कूल से यूनिवर्सिटी तक के छात्रों को निशुल्क कुश्ती का प्रशिक्षण देना शुरू किया। इसके पहले वे कुछ समय तक किराए के हॉल में प्रशिक्षण देते थे। इस अखाड़े में 25 से 30 बच्चे कुश्ती के दाव-पेंच सीख रहे हैं। इनमें से चार पहलवान मेडल हासिल कर चुके हैं।
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कुश्ती सीखने वाले धरमवीर ने भी जीता गोल्ड
पिछले साल सितंबर माह में खंडवा में स्कूल टूर्नामेंट में 15 वर्षीय पहलवान धरमवीर गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। इसी अखाड़े में प्रशिक्षण ले रहे पवन बंसल, विनोद अहिरवार ने स्कूल टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल जीता है। खेलो इंडिया टूर्नामेंट में अजय अहिरवार मध्यप्रदेश में तीसरे नंबर पर आए। इन सभी को पहलवानी के दाव-पेंच सिखाकर कुश्ती में माहिर बनाया जा रहा है।
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बड़े भाई से मिली प्रेरणा
22 वर्षीय धर्मेंद्र बताते हैं कि उनके बड़े भाई जितेंद्र भी पहलवान हैं जिनसे प्रेरणा लेकर उज्जैन में डॉ. मोहन यादव और पारस जैन के गुरु अखाड़े में कुश्ती सीखी। यहां उस्ताद राधेश्याम चौधरी हैं। इस वर्ष इस अखाड़े को सौ साल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि चार साल तक वहां प्रशिक्षण लिया। 2018 में भोपाल मप्र केसरी का खिताब हासिल किया। इंदौर के रेंचो पहलवान को हराकर गोल्ड मेडल जीता। उस समय मेरे मन में आया कि मेरे जैसे और लड़के दमोह से आएं और अपनी एवं दमोह की कुश्ती में पहचान बनाए। इसके बाद दमोह आकर अखाड़े में निशुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया। सुबह 5 से 8 एवं शाम को 5 से 8 बजे तक प्रशिक्षण देते हैं। इसमें संघ के वरिष्ठ पहलवान पहलवान महेश, भरत, केके, जितेंद्र, पं. राम मिश्रा, श्याम विश्वकर्मा का मार्गदर्शन और सहयोग भी मिलता है।

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